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'शक्ति' का जादू लंदन में
आपमें से कई लोग शायद 'रिमेम्बर शक्ति' से परिचित न हों लेकिन इस संगीत बैंड का इतिहास लगभग चार दशक पुराना है. बात 1972 की है जब गिटार वादक जॉन मैक्लॉफ़्लिन की मुलाक़ात वायलिन वादक एल शंकर से हुई. एल शंकर उस समय अमरीका में संगीत पढ़ भी रहे थे और पढ़ा भी रहे थे. मैक्लॉफ़्लिन और शंकर ने शौक़िया तौर पर साथ बजाना शुरू किया लेकिन जल्द ही वे एक संगीत जोड़ी बन गए. तबला वादक ज़ाकिर हुसैन और मृदंगम वादक रामनाद राघवन के जुड़ते ही शक्ति का जन्म हुआ. लेकिन 1978 तक इस बैंड के सभी-सभी लोग अपने कैरियर को बनाने के लिए अलग-अलग रास्ते चल दिए.
पर 1984 में राघवन के अलावा अन्य सभी संगीतकार फिर साथ आ गए और 'रिमेम्बर शक्ति' की नींव पड़ी. शक्ति में अब इलेक्ट्रॉनिक मंडोलिन वादक यू श्रीनिवास के अलावा खंजिरा वादक सेल्वागणेश भी हैं. ज़ाकिर हुसैन कहते हैं, "हमें साथ लाने का श्रेय जॉन को जाता है. हमारे बैंड की विविधता और भारतीय और पश्चिमी संगीत शैलियों का मिश्रण हमारा असली जादू रहा है." समा बांधा इस सप्ताह रिमेम्बर शक्ति ने यहाँ रॉयल फ़ेस्टिवल हॉल में समा बांधा. उनके संगीत में ऐसा जादू था कि ज़्यादातर लोग अपने पैरों को थिरकने से नहीं रोक पाए.
तरह-तरह के वाद्यों निकाली जा रही धुनों में ज़बरदस्त विविधता थी. ख़ासकर सेल्वागणेश ने तो अपने खंजिरा से लोगों को पूरी तरह से रोमांचित कर दिया. ज़ाकिर हुसैन के अनुसार," फ़्यूज़न संगीत सुनने के लिए काफ़ी बड़ी भीड़ आती है. तभी तो सारी टिकटें कार्यक्रम से काफ़ी पहले ही बिक गईं. हर तरह के लोग इसे सुनने आते हैं. ये लोगों को बहुत पसंद आता है." दर्शकों में मशहूर बैंड बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन और टीना टर्नर के साथ-साथ गिटारवादक जेफ़ बेक भी मौजूद थे. अतिथि कलाकार के रूप में शंकर महादेवन ने भी पूरब और पश्चिम के संगीत का एक मिलाजुला कार्यक्रम प्रस्तुत किया. |
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