|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
निदा फ़ाज़ली से मुआवज़े की माँग
उर्दू के मशहूर शायर मख़्दूम मोहीउद्दीन के बेटे ने एक फ़िल्म में अपने पिता की ग़ज़ल के इस्तेमाल पर फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट, उनकी बेटी पूजा भट्ट और गीतकार निदा फ़ाज़ली के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. नुसरत मोहीउद्दीन का कहना है कि 1997 में प्रदर्शित 'तमन्ना' फ़िल्म का एक गीत 'शब के जागे हुए...' दरअसल उनके पिता की 1940 के दशक में लिखी गई एक ग़ज़ल थी जिस पर निदा का नाम दिया गया है. हैदराबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में नुसरत ने कहा कि उन्होंने 1998 में ही पूजा भट्ट और निदा फ़ाज़ली से संपंर्क कर इस ओर उनका ध्यान दिलाया था.
जब उन्हें इसका कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने इस बारे में क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी. नुसरत का कहना है, "मेरी लगातार कोशिशों के बावजूद उन्होंने अपनी ग़लती नहीं सुधारी तो मुझे यही क़दम उठाना पड़ा". नुसरत मोहीउद्दीन ने 'तमन्ना' फ़िल्म के इस गीत पर अपने पिता के नाम के अलावा दस लाख रुपये के मुआवज़े की भी मांग की है. मख़्दूम मोहीउद्दीन की ग़ज़लें और फ़िल्मों में भी इस्तेमाल हो चुकी हैं. बाज़ार की मशहूर ग़ज़ल 'फिर चली रात बात फूलों की...' मख़्दूम की ही रचना थी. लेकिन नुसरत का कहना है कि अन्य जिन फ़िल्मों में भी उनके पिता की रचनाओं का इस्तेमाल हुआ है उनके लिए बाक़ायदा अनुमति ली गई थी. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||