'अतुल्य भारत' के लिए मैं जवान हूं: माधवन

- Author, सुप्रिया सोग्ले
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
'रहना है तेरे दिल में', 'रंग दे बसंती', 'थ्री इडियट्स' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी सफल फ़िल्मों का हिस्सा रहे आर माधवन मानते हैं कि 'अतुल्य भारत' जैसे किसी कैंपेन का हिस्सा बनने के लिए अभी उनकी उम्र छोटी है.
रीलीज़ के लिए तैयार अपनी फ़िल्म 'साला खड़ूस' के प्रोमोशन के सिलसिले में बीबीसी से हुई मुलाक़ात के दौरान माधवन बॉलीवुड में अपने करियर को लेकर चिंतित नज़र आए.
हाल ही में 10 साल से पर्यटन मंत्रालय के 'अतुल्य भारत' के ब्रांड एम्बेसडर रहे आमिर ख़ान की जगह लेने के लिए जहां अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार के नाम लिए जा रहे हैं, वहीं इसके लिए दक्षिण भारत से आर माधवन के नाम की भी चर्चा है.
फ़िल्मों में अपनी साफ़ छवि वाले किरदारों के अलावा निजी जीवन में भी माधवन विवादों से दूर रहे हैं. ऐसे में क्या वो 'अतुल्य भारत' के लिए अपनी दावेदारी को मज़बूत मानते हैं.

माधवन कहते हैं, "मैं अतुल्य भारत का ब्रांड एम्बेसेडर नहीं बनना चाहता. मेरे पास अभी और बहुत काम हैं. मुझे लगता है कि मैं इन सब चीज़ों (सरकारी कैंपेन) के लिए बना ही नहीं हूँ."
वो कहते हैं, "अतुल्य भारत और ऐसे अन्य कैंपेन एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का हिस्सा हैं. यह सब करने के लिए एक उम्र होती है. मुझे लगता है कि मैं उस उम्र तक पहुंचा नहीं हूँ."
हिंदी फ़िल्मों में अक्सर लवर ब्वॉय बनते आ रहे आर माधवन अपनी इमेज को बदलना चाहते हैं.
इमेज के दुष्प्रभाव बताते हुए वो कहते हैं, "किसी इमेज में ढल जाना एक ख़तरनाक चीज़ है, क्योंकि आपको पसंद करने वाली लड़कियां तो कुछ समय बाद फ़िल्में देखना छोड़ देंगी, आप क्या करोगे?"

माधवन कहते हैं, "हम भले ही बतौर कलाकार इमेज से नहीं ऊबते लेकिन हमारी ऑडियंस ऊब जाती है. एक बार दर्शक आप से ऊब गए तो हमारे सामने कई उदाहरण हैं जब 'इमेज' आपको डुबो भी सकती है."
माधवन उदाहरण देते हुए कहते हैं, "सुपरस्टार राजेश खन्ना अपने उम्र के लवर बॉय थे पर हमारी पीढ़ी के लिए वो 'काका' बन गए थे. आज की पीढ़ी के लिए अगर लवर बॉय बना रहता तो मेरे अंदर का कलाकार मर जाएगा इसलिए इमेज में बदलाव लाने की ज़रूरत थी."

आजकल हॉलीवुड में काम करने को लेकर मची होड़ के बारे में भी माधवन काफ़ी निराश नज़र आए.
वो बीते साल एक हॉलीवुड फ़िल्म "नाईट ऑफ़ द लिविंग डेड: डार्केस्ट डॉन" में नज़र आए थे. हॉलीवुड के अनुभव के बारे में वो कहते हैं, "मेरा अनुभव काफ़ी बोरियत भरा रहा. चूंकि वो फ़िल्म एक ग्राफ़िक नॉवेल पर आधारित थी और मुझे एक ही जगह हेलमेट पहनकर अभिनय करना था तो यह कुछ ख़ास नहीं था."
वो बताते हैं, "सेट पर एक कोने में, चुपचाप और किसी से मिलने-जुलने का कोई मौक़ा नहीं, ऐसे में मुझे कोई ख़ास मज़ा नहीं आया और मैं हॉलीवुड को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हूं."

हॉलीवुड में फिर कोशिश करने के सवाल पर वो कहते हैं, "देखिए न मैं प्रियंका चोपड़ा जैसा बड़ा स्टार हूँ और ना ही इरफ़ान ख़ान जैसे किरदार कर सकता हूँ."
माधवन चुटकी लेते हुए कहते हैं, "हॉलीवुड के चक्कर में ज़्यादा नहीं पड़ना वर्ना साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री का मार्केट भी ख़त्म हो जाएगा. इसलिए भलाई इसी में है कि यहीं हीरो बनकर काम करो."
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