गुजरात में आतंक निरोधी बिल पारित हुआ

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गुजरात सरकार ने विवादित 'गुजरात राज्य कंट्रोल ऑफ़ टेररिज्म एंड ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम' (गुजकोक) बिल पास कर दिया किया है. राज्य सरकार पहले भी दो मौक़ों पर इस तरह का बिल पारित कर चुकी है लेकिन उसे तत्कालीन राष्ट्रपतियों से मंज़ूरी नहीं मिली थी.
मंगलवार को राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने बिल पेश किया जो बहुमत से परित हुआ. कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया.
राज्य की भाजपा सरकार का कहना है कि नया बिल नए रूप में पेश किया गया है.
इस बिल का विरोध करते हुए गुजरात के कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने मीडिया से कहा, "कोई राज्य सरकार ऐसा बिल नहीं पारित कर सकती जो केंद्र सरकार के विपरीत हो. दो राष्ट्रपति पहले ही इस बिल को नकार चुके हैं."
कड़ा क़ानून

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राज्य सरकार के आतंकवाद और संगठित अपराध संबंधी पुराने विधेयकों को दो पूर्व राष्ट्रपतियों प्रतिभा पाटिल और डॉ. अब्दुल कलाम ने अपनी सहमति नहीं प्रदान की थी.
गुजरात सरकार के प्रवक्ता नितिन पटेल ने कहा, "सरकार को आतंकवाद को लेकर सख्त रवैया अपनाने की ज़रूरत है. आतंकवादी घटनाओं को रोकने का लिए हमें ऐसे कड़े कानून चाहिए. इस बिल से आतंकवादी घटनाओं में शामिल लोग आसानी से ज़मानत पर बाहर नहीं जा सकेंगे."
लेकिन कांग्रेस राज्य सरकार के तर्कों से सहमत नहीं है. गोहिल ने बताया, "पहले नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते वक्त भी यह बिल विधानसभा में पेश हुआ था. उस समय इसका कड़ा विरोध हुआ था."
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का विरोध

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विपक्षी दलों के अलावा मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील गिरीश पटेल ने स्थानीय पत्रकार अंकुर जैन से कहा, "इस बिल में नाम को सिवा कुछ भी नया नहीं है. इस कानून के अंतर्गत पुलिस को दिया गया बयान अदालत में पेश किया जा सकता है. इसका बड़े पैमाने पर ग़लत इस्तेमाल होने की आशंका है और अल्पसंख्यकों को लगेगा कि उन पर हमेशा ग़लत मामलों में फ़सांए जाने का ख़तरा बना रहेगा."
उन्होंने बताया "गुजरात में किसी प्रकार का आतंकवाद का ख़तरा नहीं है. इसलिए इस बिल के पीछे राज्य सरकार की मंशा समझना मुश्किल है."
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