रिव्यू: 'राजा नटवरलाल' ने ठगा या लुभाया

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- Author, मयंक शेखर
- पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
रेटिंग: **
'राजा नटवरलाल' एक ठग की कहानी है जो अपनी धीमी रफ़्तार के बावजूद एक बेहतरीन फ़िल्म हो सकती थी.
फ़िल्म में हैं इमरान हाशमी जो बड़ी सहजता से अपनी हर हीरोइन को किस कर लेते हैं. इस हुनर को इतनी ख़ूबसूरती से बॉलीवुड का कोई और हीरो अंजाम नहीं दे पाता.
उनकी फ़िल्मों में होते हैं कुछ गुनगुनाने लायक रोमांटिक गाने. और इन्हीं गानों को पर्दे पर उतारने के लिए ज़रूरत पड़ती है एक अदद हीरोइन की.
'राजा नटवरलाल' में ये काम किया है हुमैमा मलिक ने जो परंपरागत तौर पर आकर्षक कही जा सकती हैं.
ठूंसे गए गाने

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हालांकि फ़िल्म के प्लॉट में हुमैमा का किरदार ज़बरदस्ती ठूंसा गया है.
जब-जब फ़िल्म का रोमांच आपको नाखून चबाने पर मजबूर करने की तैयारी में होता है तब-तब उस रोमांच में खलल डालने के लिए आ जाता है एक गाना जो फ़िल्म से आपका ध्यान ही भटका देता है.
मुझे लगता है कि फ़िल्मकार को इस फ़िल्म के दो संस्करण बनाने चाहिए थे.
एक इमरान हाशमी के प्रशंसकों के लिए और दूसरा, सिनेमा प्रेमियों के लिए. तब शायद ये फ़िल्म दोनों तरह के दर्शक वर्ग को लुभा पाती.
लेकिन मौजूदा फ़िल्म तो किसी भी दर्शक वर्ग को नहीं लुभाती.
कहानी
इमरान हाशमी एक बेमक़सद चिंदी चोर नुमा किरदार राजा की भूमिका में हैं जो पैसा कमाता है और डांस बार में काम करने वाली एक लड़की पर लुटा देता है.
एक दिन वो अपने पार्टनर (दीपक तिजोरी) के साथ 80 लाख रुपए लूटने की योजना बनाता है.
ये पैसे दक्षिण अफ़्रीका में रह रहे एक डॉन ( केके मेनन ) के पास हैं.

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डॉन, राजा के पार्टनर को मरवा डालता है.
राजा अपने दोस्त की मौत का बदला लेने के लिए एक दूसरे ठग योगी (परेश रावल) की मदद लेता है.
राजा का ये सलाहकार, कुख्यात ठग नटवरलाल का शागिर्द है. नटवरलाल उर्फ़ मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव 70 के दशक का कुख्यात ठग है जिसकी ठगी के किस्से पूरे भारत में गूंजते थे.
तर्क से परे

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राजा और योगी, उस डॉन को निशाना बनाते हैं. डॉन की कमज़ोर नस है क्रिकेट, जिसका वो ज़बरदस्त शौक़ीन है.
लेकिन एक ठग, किसी स्मार्ट डॉन को नकली नीलामी प्रक्रिया में आईपीएल की एक टीम ख़रीदने के लिए राज़ी कर लेगा, मैं तो ये बात नहीं मानता. लेकिन फ़िल्म के निर्देशक महोदय को इस बात पर पूरा यक़ीन है.
फ़िल्म में कुछ दिलचस्प मोड़ ज़रूर हैं जो बड़ी चतुराई से फ़िल्माए गए हैं. लेकिन बाक़ी फ़िल्म ऐसे चंद दृश्यों पर पानी फेर देती है.
इसमें दीपक तिजोरी, केके मेनन और परेश रावल जैसे बेहतरीन कलाकार हैं. लेकिन मुख्य भूमिका तो इमरान हाशमी ने निभाई है, जिनकी वजह से हमें फ़िल्म में बहुत कुछ झेलना पड़ता है.
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