76 के 'अंगड़ाई किंग' की बीबीसी से ख़ास मुलाक़ात

- Author, मधु पाल
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
बचपन से ही मैंने शशि कपूर की कई फ़िल्में देखीं. 60 और 70 के दशक की उनकी कई फ़िल्मों को टीवी पर देखा.
अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी मुझे 'दीवार', 'त्रिशूल', 'कभी-कभी', 'सुहाग' और 'नमक हलाल' जैसी फ़िल्मों में बहुत लुभाती थी.
<link type="page"><caption> शशि कपूर से बीबीसी की ख़ास बातचीत सुनें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/03/140315_shashi_kapoor_audio_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>
उनके परिवार के बाक़ी सदस्यों जैसे उनके बड़े भाई दिवंगत शम्मी कपूर, उनके भतीजे ऋषि कपूर, उनके पोते रणबीर कपूर, पोती करीना कपूर वग़ैरह से कई फ़िल्मी कार्यक्रमों को कवर करने के दौरान मेरी मुलाक़ात हो चुकी है. लेकिन शशि कपूर से मैं कभी नहीं मिली थी.
<link type="page"><caption> (...और स्टेज पर ही मेरी धोती खुल गई)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/11/061120_shashi_column1.shtml" platform="highweb"/></link>
वो बहुत कम घर से बाहर निकलते हैं और उन्हें हाल में सार्वजनिक समारोहों में यदा-कदा ही देखा गया है. मेरे ज़ेहन में उनका फ़िल्मी चेहरा ही अंकित था.
असल शशि कपूर कैसे हैं ये मेरे लिए हमेशा एक पहेली ही थी. तो इस बार मैंने ठान लिया कि उनके जन्मदिन 18 मार्च से पहले मैं उनसे मुलाक़ात करूंगी.
मुलाक़ात का मिशन

मैंने उनके जुहू स्थित घर पर कई चक्कर लगाए. लेकिन गेट पर तैनात गार्ड्स ने मुझे बताया कि शशि कपूर किसी से नहीं मिलते और घर से बाहर भी बहुत कम निकलते हैं इसलिए मुलाक़ात संभव नहीं है.
लेकिन मैंने हार नहीं मानी. आख़िरकार एक बार उनकी बिल्डिंग के गार्ड ने मुझे शशि जी के निकट सहयोगी अमरेज सिंह से मिला ही दिया.
<link type="page"><caption> (जेनिफ़र मुझे अगले जन्म में भी मिलेंगी)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/11/061126_shashi_column2.shtml" platform="highweb"/></link>
अमरेज जी ने मुझसे कहा, "साहब की सेहत ठीक नहीं रहती. वो किसी से ज़्यादा बातचीत करते ही नहीं इंटरव्यू भी नहीं देते. फिर आप मिलकर क्या करेंगी."

मैंने उन्हें समझाया कि इंटरव्यू संभव नहीं भी हुआ तो भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामना तो दे ही सकती हूं.
उम्मीद की किरण
आख़िर अमरेज सिंह ने हमें बताया कि शशि कपूर अपने नियमित चेकअप के लिए अस्पताल गए हैं. जब वो लौट कर आएंगे तब उनसे पूछ कर बताएंगे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं.
उन्होंने हमें शशि कपूर के घर के सामने स्थित पृथ्वी थिएटर में इंतज़ार करने को कहा.
<link type="page"><caption> (राजकपूर में कुछ ख़ास बात थी...)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/12/061203_shashikapoor_column3.shtml" platform="highweb"/></link>
मुलाक़ात की पक्की गारंटी ना होने के बावजूद मैंने इंतज़ार करने का फ़ैसला किया और अपनी सहयोगी सुप्रिया सोगले को भी बुला लिया.
जब शशि कपूर को देखा

इमेज स्रोत, official website
दो घंटे के इंतज़ार के बाद हमे एक गाड़ी को शशि कपूर के घर आते देखा. मन में उम्मीद बंधी. मैं सोचने लगे कि अब शशि कपूर से मुलाक़ात होगी.
मन में उनकी फ़िल्मों के दृश्य कौंधने लगे. 'दीवार' में नीतू सिंह का साथ का उनका गाना, "कह दूं तुम्हें या चुप रहूं" हो या मुमताज़ के साथ उनका गाना "ले जाएंगे ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे" जैसे गानों के ख़ूबसूरत शशि कपूर की छवि सामने आने लगी.
लेकिन गाड़ी के रुकते ही जो नज़ारा देखा उससे मुझे धक्का सा लगा. गाड़ी के रुकते ही एक बुज़ुर्गवार को दो लोगों ने सहारा देकर गाड़ी से नीचे उतारा.
<link type="page"><caption> (हटकर काम की कोशिश थी फ़िल्मवालाज़)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/12/061218_shashikapoor_column4.shtml" platform="highweb"/></link>
76 साल का ये बुज़ुर्ग शख़्स था 60 और 70 के दशक का वो हैंडसम हीरो जिसकी लड़कियां दीवानी हुआ करती थीं.
मैं यक़ीन नहीं कर पा रही थी. उसके बाद शशि कपूर को व्हील चेयर पर बैठाया गया. मैं उन्हें देख ही रही थी कि तभी आवाज़ आई कि मैडम मिल लीजिए साहब से.
संक्षिप्त मुलाक़ात
मैं उनके पास गई और अभिवादन करके उन्हें बताया कि मैं बीबीसी से मधु पाल हूं. शायद उन्हें सुनाई नहीं पड़ा. उन्होंने कहा, "क्या."
तब मैंने थोड़ा ज़ोर से कहा, "मैं बीबीसी से हूं. आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं." फिर मैंने उन्हें एक गुलदस्ता भेंट किया.
शशि कपूर के चेहरे पर बाल सुलभ मुस्कुराहट आ गई. इतने दिनों बाद कोई पत्रकार उनसे मिलने पहुंचा. ये जानकर वो ख़ुश हो गए.
<link type="page"><caption> (भाग्यशाली हूँ कि कपूर ख़ानदान में पैदा हुआ)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/11/061101_kapoor_special_shashi.shtml" platform="highweb"/></link>
उन्होंने बहुत हौले से कहा, "शुक्रिया. आपसे मिलकर अच्छा लगा. मैं बीबीसी से कई बार मिल चुका हूं. हमारा पुराना नाता है."
उसके बाद उन्हें अंदर ले जाया गया. उन्होंने हमसे हाथ हिलाकर विदा ली.
धर्मेंद्र और अमिताभ से होती है मुलाक़ात

इमेज स्रोत, Deewar
उनके सहयोगी अमरेज सिंह ने हमें बताया कि शशि कपूर सार्वजनिक समारोहों में ज़्यादा नहीं जाते. घर से भी वो सिर्फ़ मेडिकल चेकअप के लिए ही बाहर निकलते हैं.
शशि कपूर हर रविवार पृथ्वी थिएटर में शो देखने जाते हैं. उन्हें ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है. फ़िल्में अब वो नहीं देखते.
उनसे मिलने धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे उनके क़रीबी दोस्त आते रहते हैं. उनके जन्मदिन पर पूरा <link type="page"><caption> कपूर परिवार </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/12/131227_kapoor_family_party_pic_gall_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>इकट्ठा होता है. अमिताभ बच्चन अगर शहर में होते हैं तो वो भी उनसे मिलने आते हैं.
शशि कपूर किसी से ज़्यादा बात नहीं कर पाते. लेकिन सब देखते और अपने प्रति इस प्यार को महसूस करते रहते हैं.
अमरेज सिंह ने बताया कि उन्हें अपने बीते दिनों की कई बातें आज भी याद हैं. उनकी सेहत में भी पहले की तुलना में सुधार आया है.
शशि कपूर से मेरी ये मुलाक़ात भले ही चंद मिनटों की थी, लेकिन यादगार रही. उनकी वो मुस्कुराहट में भूल नहीं पाऊंगी.
<bold>(बीबीसी हिंदी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












