'सत्यमेव जयते' की सोना क्यों है नाराज़?

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आमिर ख़ान के बहुचर्चित शो 'सत्यमेव जयते के दूसरे संस्करण के पहले संस्करण में बलात्कार और इसकी शिकार महिलाओं को होने वाली दिक़्क़तों जैसे संवेदनशील मुद्दे को उठाया गया जिसकी सोशल मीडिया पर ख़ासी चर्चा हुई. लेकिन साथ ही एक बात की और चर्चा हुई.
कार्यक्रम के आख़िर में गायिका सोना मोहपात्रा के गाए गीत, "बेख़ौफ़ आज़ाद है जीना मुझे" ने लोगों की भावनाओं को छुआ और कई लोगों ने इसे बेहद भावुक गीत बताया.
सोना को इस गीत के लिए बड़ी वाहवाही भी मिली.
सोना कार्यक्रम के पहले संस्करण से ही काफ़ी चर्चा में आ गई थीं जब उन्होंने "ओ री चिरैया" और "रुपय्या" जैसे गाने गाकर लोगों के दिलों को छुआ. इंटरनेट पर उनके गानों को लाखों की संख्या में हिट्स भी मिले.
चुनौती

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अपने संगीतकार पति राम संपत के साथ मिलकर इस शो के संगीत पर काम करने वाली सोना कहती हैं 'सत्यमेव जयते' का संगीत बनाना एक बड़ी चुनौती है.
इसकी वजह आमिर ख़ान जैसे 'परफ़ेक्शनिस्ट' का कार्यक्रम से जुड़ा होना नहीं बल्कि इस कार्यक्रम के मुद्दे हैं जो बेहद गंभीर होते हैं.
बीबीसी से बात करते हुए सोना ने कहा, ‘‘संगीत बनाते वक्त चुनौती रहती है कि वो बहुत उबाऊ भी ना हो और सही तरह से मुद्दे के साथ संतुलन बनाए. हर बार कहां से उस तरह की धुन लाई जाए जो छू ले.’’
'आमिर का साहसी क़दम'

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'सत्यमेव जयते' को लेकर आ रहीं कुछ नकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर वो कि अगर एक बड़ा सितारा ऐसे मुद्दों पर लोगों को जगा रहा है तो इसमें बुराई क्या है.
सोना मोहपात्रा कहती हैं, ‘‘बहुत सारे लोग ये भी कहते हैं कि हम तो ये मुद्दे पहले ही उठा चुके हैं अब आमिर का नाम जुड़ा है तो ज़्यादा बातें हो रही हैं. लेकिन आमिर चाहते तो ज़्यादा पैसे वाला कोई काम करके हंसते-खेलते निकल जाते. ये बहुत मुश्किल शो है. आमिर कर रहे हैं और अगर इसके ज़रिए जागरूकता बढ़ती है तो अच्छी बात है.’’
सोना आमिर का साथ देते हुए कहती हैं कि ये कार्यक्रम काफ़ी भावनात्मक है और अगर आमिर कुछ ऐसा कर रहे हैं तो उनकी तारीफ़ की जानी चाहिए.
सोना ये भी जोड़ती हैं, "जब भी इस तरह का कुछ हो रहा होता है तो शैतान क़िस्म के लोगों रूकावटें पैदा करते ही हैं और वो करते रहेंगे. इससे फ़र्क नहीं पड़ता."
शिकायत
पढ़ाई से इंजीनियर और पेशे से गायिका,संगीतकार और गीतकार सोना मोहपात्रा अपनी बेबाक शख़्सियत के लिए पहचानी जाती हैं.
जब हमने ये पूछा कि इंडस्ट्री के अंदर महिलाओं के प्रति नज़रिए पर वो क्या सोचती हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ये बात साफ़ तौर पर बोलने में कोई हिचक नहीं है कि आज भी फ़िल्मों के सारे गाने लड़कों के लिए बनते है. हीरोइन सिर्फ़ एक वस्तु की तरह होती है जिसे कुछ नाचने के सीन दे दिए जाते है. भले ही उसका किरदार कितना ही सशक्त क्यों ना हो गाने हमेशा हीरो के लिए ही होते हैं.’’
शो बिज़नेस और महिलाएं

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'डेल्ही बेली', 'आई हेट लव स्टोरीज़', 'तलाश' और 'फ़ुकरे' में गाने वाली सोना फ़िल्मों में महिलाओं के चित्रण पर क्या सोचती हैं इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं, ‘‘मुझे लगता है कि महिलाओं के अंदर अलग अलग तरह की ऊर्जा है लेकिन उसे दिखाने में फ़िल्में असफल हैं."
"वो सिर्फ़ एक ही तरह की महिला को दिखाती हैं जो एक ही तरह के कपड़े पहनकर नाच-गा रही है. मैं ये नहीं कह रही हूं कि आप साड़ी लपेटकर सिंदूर लगाकर खड़ी हो जाएं लेकिन महिलाओं की विविध ऊर्जा को समेटने की कोशिश नहीं दिखती है. ये काफ़ी निराशाजनक लगता है.’’
'डेल्ही बेली' फ़िल्म में काम के दौरान आमिर ख़ान संगीतकार राम संपत के काम से काफ़ी प्रभावित हुए जिसके बाद राम को 'सत्यमेव जयते' के संगीत पर काम करने का मौक़ा मिला और फिर सोना भी कार्यक्रम में जुड़ गईं.
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