फ़िल्म रिव्यू: 'वन बाय टू'

'वन बाय टू'

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    • Author, कोमल नाहटा
    • पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक

रेटिंग: *1/2

वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स की 'वन बाय टू' कहानी है दो ऐसे लोगों की जिनकी ज़िंदगी एक दूसरे से प्रभावित होती है लेकिन हैरानी की बात ये है कि वो दोनों ना तो एक दूसरे को जानते हैं ना ही उनकी कभी मुलाक़ात हुई है. ये हैं अमित शर्मा (अभय देओल) और समरा (प्रीति देसाई).

अमित को अब तक अपनी ज़िंदगी में नाकामी ही हाथ लगी है. समरा अपनी मां (लिलेट दुबे) के साथ रहती है. वो एक बहुत कामयाब डांसर बनना चाहती है. और इसके लिए वो एक डांस रियलिटी शो में हिस्सा लेती है.

अमित उस डांस शो की वेबसाइट हैक करके उसके रिज़ल्ट में फ़ेरबदल करना चाहता है ताकि शो के प्रोड्यूसर को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़े. लेकिन क्यों. वो इसलिए क्योंकि उसी प्रोड्यूसर के लिए अमित की गर्लफ़्रेंड राधिका (गीता त्यागी) उसे छोड़ देती है.

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शो की वेबसाइट हैक करने की वजह से समरा शो से बाहर हो जाती है क्योंकि उसे कम वोट मिलते हैं. जबकि असलियत में उसे सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं.

उधर अमित की मां (रति अग्निहोत्री) उसे अपनी पसंद की लड़की से शादी करने के लिए कहती है, जबकि अमित ऐसा नहीं चाहता और सगाई के दिन वो लड़की वालों के परिवार से इतनी बुरी तरह से पेश आता है कि दोनों की शादी टूट जाती है.

फिर परिस्थितियों का चक्र कुछ ऐसा चलता है कि अमित का संगीतबद्ध किया हुआ एक गाना बेहद लोकप्रिय हो जाता है.

आगे की कहानी में समरा और अमित किस तरह से एक दूसरे को प्रभावित करते हैं. क्या वो कभी मिल पाते हैं. अगर वो मिलते हैं तो ये मुलाक़ात किन परिस्थितियों में होती है. यही फ़िल्म की कहानी है.

अलग कहानी

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देविका भगत की कहानी आम बॉलीवुड फ़िल्मों से बिलकुल अलग हटके है लेकिन दर्शकों का एक बहुत बड़ा वर्ग इससे अपने आपको जोड़ नहीं पाएगा. ऐसी कहानी, जिसके बड़े हिस्से में हीरो और हीरोइन मिल नहीं पाते लेकिन एक दूसरे की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं, उसे आम भारतीय दर्शक कितना पसंद करेंगे ये बड़ा सवाल है.

अमित का ये सोचना की वेबसाइट हैक करने की वजह से शो प्रोड्यूसर की नौकरी चली जाएगी, बड़ा दूरगामी लगता है. देविका का स्क्रीनप्ले बहुत सीमित दर्शक वर्ग को ही अपील करेगा.

सीमित अपील

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फ़िल्म का पहला हिस्सा बहुत बोरिंग है. इंटरवल के बाद कहानी में कुछ दिलचस्प मोड़ आते हैं. फ़िल्म का हास्य भी बेहद सीमित दर्शक वर्ग को ही पसंद आएगा.

फ़िल्म में रोमांस की कमी है और इसका भावनात्मक पहलू भी कमज़ोर है. क्लाईमेक्स भी अलग हटके तो है लेकिन दिलचस्प ज़रा भी नहीं है.

फ़िल्म के संवाद मनोज तपाड़िया और देविका भगत ने लिखे हैं जिनकी सीमित अपील है.

अभिनय

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अभय देओल ने बढ़िया काम किया है. वो अपने किरदार में पूरी तरह से घुस गए हैं और अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है.

प्रीति देसाई ने भी अच्छा काम किया है. वो बहुत बेहतरीन डांस करती हैं. रति अग्निहोत्री ने भी क़ाबिले तारीफ़ काम किया है. लिलेट दुबे भी बेहतरीन रही हैं. दर्शन जरीवाला का काम भी अच्छा है.

देविका भगत का निर्देशन बहुत सीमित दर्शकों को ही पसंद आएगा. शंकर-एहसान-लॉय का संगीत अच्छा है. लेकिन गाने उतने लोकप्रिय नहीं हो पाए इसलिए वो भी फ़िल्म की कोई ख़ास मदद नहीं कर पाएंगे.

अमिताभ भट्टाचार्य के लिखे गाने फ़िल्म के मूड को अच्छी तरह से बयां करते हैं.

कुल मिलाकर वन बाय टू बहुत सीमित अपील वाली फ़िल्म है.

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