अम्मा, भाई से अलग अपनी पहचान चाही थीः सोहा अली खान

- Author, विदित मेहरा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'मुंबई मेरी जान' के बाद सोहा अली खान एक बार फिर अपनी आने वाली फ़िल्म में जर्नलिस्ट के रूप में दिखाई देंगी. ये फ़िल्म है, फराज़ हैदर के निर्देशन में बनी 'वॉर छोड़ो ना यार'.
<link type="page"><caption> फ़िल्म</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/09/130919_small_budget_films_pkp.shtml" platform="highweb"/></link> में अपनी भूमिका को लेकर वे काफी उत्साहित हैं. सोहा ने बताया, "इस फ़िल्म में हम मीडिया की ताकत दिखा रहे हैं. मीडिया के जरिए हम क्या क्या कर सकते हैं. हम लोगों तक सच्चाई पहुंचा सकते हैं, लोगों को जागरूक कर सकते हैं, किसी विषय पर लोगों को जाग उठा सकते हैं. यह फ़िल्म लड़ाई छोड़ने के बारे में है. इसमें रिपोर्टर अपनी ताकत इस्तेमाल करती है, ताकि लोगों तक सच्चाई पहुंच सके."
सत्याग्रह में सोहा की भाभी करीना कपूर ने पत्रकार की भूमिका निभाई थी. कहीं सोहा अली खान उनसे तो प्रभावित नहीं हुईं. वे बताती हैं, "मैं टीवी देखती रहती हूं. इसके अलावा मुंबई मेरी जान में मैं पत्रकार की भूमिका में थी. सभी अभिनेताओं ने कभी न कभी पत्रकार की भूमिका निभाई है. मेरी मां ने भी जर्नलिस्ट का रोल किया है. इसमें कोई नई बात नहीं."
'वॉर छोड़ो ना यार' फ़िल्म का मुख्य विषय युद्ध है. युद्ध के बारे में वो कहती हैं, "हमें युद्ध बिलकुल छोड़ना चाहिए. भारत और पाकिस्तान के बीच जो बरसों से लड़ाई चल रही है, मेरा मानना है कि वह हमारे फायदे में नहीं है. पाकिस्तान के भी फायदे में नहीं है. हां, कुछ गिने-चुने लोग हैं, जिनके फायदे में है. जो पैसे इसमें बचेंगे, उससे शिक्षा, बुनियादी ढांचा, सेहत आदि पर खर्च किया जा सकता है. यह हमारे लिए बेहतर होगा."

सोहा ने कहा कि वो बाघा बार्डर भी गई हैं लेकिन कभी युद्ध जैसी स्थितियों को करीब से नहीं देखा.
'वॉर छोड़ो ना यार' में अपने किरदार के बारे में बीबीसी से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने जीवन और करियर के कई अनजाने पहलू के बारे में बताया.
फराज़ हैदर की यह <link type="page"><caption> पहली फ़िल्म</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/10/131002_besharam_review_sk.shtml" platform="highweb"/></link> है.सोहा कहती हैं कि उन्होंने बहुत खूबसूरत, कुशल और अलग किस्म की स्क्रिप्ट लिखी है और लगता नहीं कि यह उनकी पहली फ़िल्म है.
मम्मी की छाप

भविष्य के बारे में सोहा का कहना है कि वो इसके बारे में नहीं सोचतीं और अपने काम को एन्जॉय करती हैं. सोहा ने कहा, "मेरे लिए एक्टिंग एक बिज़नेस नहीं है. मैं खुशनसीब हूं कि मेरी ऐसी मजबूरी भी नहीं है जिसके लिए मैं काम करुं. बस अभिनय से प्यार है. इस पेशे से मुहब्बत है. मैंने अपने लिए कोई मुकाम तय नहीं किया है."
क्या उनके जीवन पर माँ शर्मीला टैगोर और भाई सैफ़ अली खा़न की छाप रही है? इस पर सोहा ने कहा, "अम्मा एक अभिनेत्री रही हैं, और भाई भी अब एक सुपरस्टार हैं. यदि अपने जीवन पर इन दोंनो के छाप की बात करुं तो मेरे ऊपर ये नकारात्मक ही रहा. इन्हें देखकर लगता था, नहीं मुझे एक्टिंग नहीं करनी. मुझे इन सबसे अलग अपनी पहचान बनानी है."
सोहा ने बताया कि एक्टिंग को चुनना उनके लिए आसान नहीं था. वे कहती हैं, "बहुत सोचने के बाद,बहुत कोशिश के बाद मैंने इस पेशे के सामने लगभग सरेंडर किया. इन सबसे पहले मैंने बैंक में भी काम किया, एनजीओ में काम किया. खूब पढ़ाई की. आपके अंदर अगर अभिनेता छुपा हुआ है, तो वह बहुत जल्द बाहर आ ही जाता है. दूसरी तरफ यह फ़िल्म इंडस्ट्री बेहद सम्मोहक है.इसीलिए अम्मा और भाई के बावजूद मैंने अभिनय चुना."
भाई सैफ़ से सलाह
भाई सैफ़ अली खान के साथ रिश्तों के बारे में सोहा न कहा कि वे लोग आपस में फ़िल्मों के विषय में बिलकुल चर्चा नहीं करते.
सोहा ने बताया, "पेशेवर नज़रिए से देखा जाए तो हम बिलकुल अलग हैं. आत्मनिर्भर हमेशा से रहे हैं. काम को काम पर ही छोड़ते हैं. डाइनिंग टेबल पर बहुत सारी दूसरी बातें हैं करने के लिए."
पसंदीदा डाइरेक्टर की लिस्ट में सोहा मीरा नायर, अनुराग कश्यप, विक्रम आदित्या मोटवानी, जोया अख़्तर को शामिल करती हैं. उनका कहना है कि वे तिग्मांशु धूलिया के साथ बार बार काम करना चाहेंगी.
करीना या शर्मीला?

सोहा ने करीना कपूर और शर्मीला टैगोर से रिश्तों के बारे में भी बातें साझा कीं. सोहा ने बताया, अगर ये सवाल किया जाए कि करीना या शर्मिला. तो जवाब अलग-अलग होगा. जैसे कि अगर मुझे चुनना पड़े कि खाना कौन बनाएगा, तो शर्मिला टैगोर को चुनूंगी.यदि मेरे सामने ये सवाल आया कि ड्रेस किससे लूँ, तो बेशक करीना कपूर मेरा पहला चुनाव होंगी.
सोहा को सलमान और आमिर खान दोंनो पसंद है और उनका कहना है कि वे किसी एक को नहीं चुन सकती.
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