जब लता की वजह से गुलज़ार हुए मजबूर

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गुलज़ार जैसे नामी गिरामी गीतकार को अपना फैसला भला किसकी वजह से बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है? जवाब है लता मंगेशकर की वजह से.
किस्सा बहुत पुराना है और इसे पत्रकारों से ख़ुद गुलज़ार ने बांटा.
FIX31464996गुलज़ार को बेहद क़रीब से जानने वाले लोगों की नज़रों में कैसा है उनका व्यक्तित्व? उनकी बेटी की नज़रों में वो कैसे पिता हैं.गुलज़ार: जन्मदिन पर ख़ास कहानियांगुलज़ार: जन्मदिन पर ख़ास कहानियांगुलज़ार को बेहद क़रीब से जानने वाले लोगों की नज़रों में कैसा है उनका व्यक्तित्व? उनकी बेटी की नज़रों में वो कैसे पिता हैं.गुलज़ार: जन्मदिन पर ख़ास कहानियां2014-03-29T16:07:48+05:302016-08-18T16:15:04+05:302016-08-18T16:15:04+05:30PUBLISHEDhitopcat2
60 के दशक में फिल्म 'ख़ामोशी' बन रही थी. जिसके लिए <link type="page"><caption> गुलज़ार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/06/120620_gulzarplay_dk.shtml" platform="highweb"/></link> ने गीत लिखा था, <link type="page"><caption> 'हमने देखी है उन आंखों की महकती ख़ुशबू'.</caption><url href="http://www.youtube.com/watch?v=rSRcxoDynJs" platform="highweb"/></link>
गुलज़ार कहते हैं, "मैंने ये गाना फिल्म के पुरुष कलाकार के लिए लिखा था, लेकिन जब फिल्म के संगीतकार हेमंत कुमार ने ये गीत सुना तो फट से बोले, ये गाना तो लता गाएगी."
गुलज़ार बताते हैं कि ये सुनते ही वो घबरा गए और हेमंत कुमार से बोले, "लेकिन दादा, ये गाना तो किसी मर्द पर फिल्माया जाना चाहिए जो फिल्म की हीरोइन के लिए ये गा रहा है. क्योंकि 'हमने देखी है उन आंखों की महकती ख़ुशबू' कोई स्त्री, पुरुष के लिए गाए ये बात अजीब सी लगती है."

लेकिन हेमंत कुमार अड़े रहे और आखिरकार ये गाना लता मंगेशकर ने ही गाया.
गुलज़ार आगे कहते हैं, "अब आप ये गाना सुनो तो अहसास तक नहीं होगा कि मैंने शुरुआत में ये किसी पुरुष के गाने के लिए लिखा है. ये ताकत है लता मंगेशकर की जो किसी गाने का जेंडर तक बदल देने की क़ाबिलियत रखती हैं."
सुरमयी रात
गुलज़ार ने ये बातें कहीं एलबम 'सुरमयी रात' के लॉन्च के मौके पर, जिसके गीत उन्होंने लिखे हैं और गाया है उनके क़रीबी दोस्त और गायक भूपेंद्र ने.
गुलज़ार ने बताया कि इस एलबम के सारे गीत 'रात' पर आधारित हैं.
जब उनसे पूछा गया कि रात को लेकर इतना आकर्षण क्यों, तो गुलज़ार ने कहा, "दरअसल रात ही वो वक़्त होता है जब आप सिर्फ अपने आपके साथ होते हैं. दिन की चहल-पहल में तो अपने ख़ुद पर फोकस ही नहीं कर पाते हो. इसलिए रात मुझे हमेशा लुभाती है."
'परेशान' हुए गुलज़ार

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इस मौके पर कई बार मीडिया के सवालों ने गुलज़ार को 'परेशान' किया. जब एक बार फिर किसी पत्रकार ने उनसे से सवाल दागा कि 'रात' पर ही आधारित गाने क्यों तो गुलज़ार बोले, "मैं कितनी दफा इस बात का जवाब दूं. बार-बार एक ही बात को दोहराओ तो लगने लगता है कि आप झूठ बोल रहे हो. आप क्यों एक ही सवाल बार-बार पूछते हो."
<link type="page"><caption> (ग़ालिब पर गुलज़ार)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/02/120216_ghalib_pn.shtml" platform="highweb"/></link>
जब उनसे एक पुराने अभिनेता की बरसी पर आधारित सवाल किसी पत्रकार ने पूछा तो गुलज़ार को ये सवाल भी पसंद ना आया और वो बोले, "आप किसी की शादी में जाओ और कोई आपसे जनाज़े की बात करे या किसी की मौत पर ग़म जताने जाओ और कोई किसी की शादी पर सवाल करे तो बड़ी बेतुकी सी बात लगती है. मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि इस तरह की संवेदनशीलता तो कम से कम दिखाए."
गुलज़ार के आने वाले प्रोजेक्ट कौन-कौन से हैं? किन फिल्मों के लिए वो गाने लिख रहे हैं और बतौर फिल्म निर्देशक क्या उनकी वापसी होगी, जब ये सवाल उनसे पूछे गए तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "इस पर फिर कभी बात करेंगे."
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