खलनायकों, चरित्र अभिनेताओं का शहंशाह: प्राण

प्राण
    • Author, दीपा गहलोत
    • पदनाम, नाट्य एवं फिल्म विभाग, एनसीपीए

इस साल प्राण को लाइफ़टाइम अचीवमेंट के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया.

लेकिन वह सम्मान बहुत देर से मिला. इस समय एक पूरी पीढ़ी ऐसी है जिसने प्राण को बड़े परदे पर नहीं देखा था.

प्राण ने अपना फ़िल्मी जीवन चालीसवें दशक में शुरू किया था. वह उस समय के बहुत कम अभिनेताओं में से हैं जिन्हें सिनेमा प्रेमी अब तक <link type="page"><caption> याद करते हैं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130712_pran_dead_fma.shtml" platform="highweb"/></link>.

इसकी वजह बाद के सालों में उनके द्वारा निभाई गई वह यादगार भूमिकाएं हैं. चरित्र अभिनेता के रूप में वह भूमिकाएं जो उन्होंने खलनायक बनना बंद करने के बाद कीं.

इसमें सह अभिनेता की कुछ कभी न भुलाई जा करने वाली भूमिकाएं भी थीं, जिनमें ज़ंजीर के लाल बालों, बड़े दिल वाले पठान- <link type="page"><caption> शेर ख़ान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/07/130712_pran_sher_khan_dil.shtml" platform="highweb"/></link> का किरदार भी है.

खलनायकों का शहंशाह

उस वक्त सह अभिनेताओं को भी उनकी ख़ास भाव-भंगिमाओं और आवाज़ की वजह से पहचाना जाता था.

प्राण की आवाज़ और भेदने वाली आंखें उनकी पहचान थीं. अपनी हर भूमिका के लिए वह अपने कपड़ों, भाव भंगिमाओं और <link type="page"><caption> तकिया-कलाम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/07/130713_pran_famous_dialogue_sp.shtml" platform="highweb"/></link> पर <link type="page"><caption> ख़ास ध्यान देते थे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130412_pran_award_sk.shtml" platform="highweb"/></link>.

स्टार्स ने अपने ‘लुक’ पर ध्यान देना उनके बहुत बाद में शुरू किया.

प्राण जैसे अभिनेताओं ने सहायक भूमिकाओं के क्षेत्र में अपनी ख़ास जगह बनाई जहां से वह मुख्य कलाकार की भूमिका को बनने-जमने में मदद करते थे.

आज के मुख्य अभिनेताओं को सहायक कलाकारों की ज़रूरत नहीं होती. और अगर उसे लड़ने के लिए कोई गुमनाम पहलवान मिल जाता है तो बस वही काफ़ी है.

प्राण, जंजीर
इमेज कैप्शन, मनोज कुमार की फ़िल्म उपकार में मलंग चाचा का किरदार प्राण का यादगार रोल है

लेकिन अपने वक्त में प्राण उन मुख्य अभिनेताओं के मुकाबले, जो क्लाइमैक्स में उन्हें पीटा करते थे, अक्सर ज़्यादा करिश्माई लगते थे.

प्राण खलनायकों के शहंशाह थे और अपने आप में एक बडे स्टार भी. फिर उन्होंने अपनी विरासत प्रेम चोपड़ा, अमरीश पुरी, रंजीत, गुलशन ग्रोवर जैसे खलनायकों को सौंप दी.

ऐसे खलनायक जिन्हें पहलवानों सा शरीर बनाने और कमीज़ें फाड़ने की ज़रूरत नहीं थी- बस एक क्रूर दृष्टि, भौंहों के उठने या ख़ास तरह के दिखने से ही इनका काम हो जाता.

धीमी आवाज़ में चबा कर बोला गया बर्खुरदार जैसा शब्द सुनते ही दिमाग में प्राण की तस्वीर बन जाती है.

यह बात तो सभी जानते हैं कि प्राण ने अपने खलनायकों वाले किरदारों में ऐसी जान डाली कि लोगों ने अपने बच्चों का <link type="page"><caption> नाम प्राण रखना बंद </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130712_pran_profile_vr.shtml" platform="highweb"/></link>कर दिया.

वर्ष 1999 तक के अपने लंबे फ़िल्मी जीवन में प्राण ने सैकड़ों फ़िल्मों में काम किया. लेकिन उनकी ख़ुशकिस्मती यह थी कि उन्होंने कई पीढ़ी के मुख्य नायक, नायिकाओं के साथ कई यादगार भूमिकाएं कीं.

अब कोई भी उग्र नारायण, राका, मलंग चाचा, राणा, माइकल डिसूज़ा, मोती, जेजे और बेशक शेरखान जैसी भूमिकाएं नहीं लिखता.

और अगर आप इन नामों से जुड़ी फ़िल्मों को नहीं जानते हैं तो आपकी बॉलीवुड की जानकारी अधूरी है.

उनकी फ़िल्मों की क्रेडिट लिस्ट में लिखा आता था- और सबसे ऊपर/महत्वपूर्ण... (And above all) प्राण.

यह हुई कोई उपलब्धि.

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