कैसी है 'लव-शव ते चिकन खुराना'

पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित हिंदी फिल्मों में सरसों के खेत, भांगड़ा-गिद्दा और ज़ोर के ठहाके ही दिखाए जाते रहे हैं. मानो पंजाबी कल्चर का मतलब सिर्फ खाना-पीना और नाच-गाना ही हो.
हां, आपको इस फिल्म में भी पंजाब का असली रंग और स्वाद चखने को मिलेगा. पर शायद इस किस्म की ये पहली हिंदी फिल्म होगी जिसकी मूल विषय वस्तु ही 'खाना' है. इस वजह से लव शव ते चिकन खुराना एक अनोखी फिल्म है.
फिल्म की कहानी
फिल्म पंजाब के एक छोटे से गांव के एक सनकी परिवार की कहानी है जिसका मुखिया गांव के एक प्रचलित ढाबे का मालिक है.
सारा गांव जानता है कि ढाबे की ख़ासियत वहां मिलने वाले चिकन का व्यंजन है जिसे 'चिकन खुराना' कहा जाता है. लेकिन इस खास डिश की विधि परिवार किसी और सदस्य को नहीं पता. मरने से पहले वो इस ढाबे की बागडोर ओमी (कुणाल कपूर) के हाथ सौंप जाते हैं. अब ओमी (जो विदेश से लौटा है) की एकमात्र ख्वाहिश यही है कि किसी तरह से ढाबे के मुखिया की 'चिकन खुराना' डिश को बनाने की विधि हासिल कर सके.

फिल्म की कहानी काफी सहज और सरल तरीके से समझाई गई है. ये दर्शकों के दिलों तक पहुंचती है.
निर्देशक समीर शर्मा की ये पहली फिल्म है और उन्होंने पंजाबी कल्चर के साथ पूरा न्याय किया है.
अच्छा अभिनय
फिल्म की सबसे अच्छी बात ये है कि सारे कलाकार अपने किरदारों में फिट बैठते हैं. विनोद नागपाल, राजेंद्र बेदी, सीमा कौशल, राजेश शर्मा ने अपने रोल के साथ न्याय किया है.
बहुत दिनों बाद कुणाल कपूर की बतौर सोलो हीरो कोई फिल्म आई है. वो पंजाबी लड़के लगते भी हैं, लेकिन अभी अभिनय की उस ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाए हैं जहां उन्हें दर्शकों की तालियां मिले.
बल्कि हरमन के रोल में हुमा क़ुरैशी ने शानदार काम किया है. सुंदर दिखने के साथ-साथ वो अपने स्वाभाविक अभिनय से मन मोह लेती हैं.
फिल्म की एक और खास बात इसका संगीत है जो बेहद कर्णप्रिय और दिलचस्प है. प्रयोगधर्मी संगीतकार अमित त्रिवेदी अपने बेहतरीन संगीत से धूम मचा देंगे.
फिल्म में कोई विलेन नहीं है. फिल्म काफी मर्मस्पर्शी है और कई दृश्य भावुक बन पड़े हैं.












