'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' का रिपोर्ट कार्ड

स्टूडेंट ऑफ द ईयर

बेहद खूबसूरत क्लासरूम, मनमोहक डिज़ाइनर पोशाक पहने छात्र और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेडियम.. करण जौहर की फिल्म में आपका स्वागत है.

अपनी पहली फिल्म 'कुछ कुछ होता है' की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद एक बार फिर से कुछ उसी तरह की थीम लेकर आए हैं फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' में. बदलाव ये है कि दो लड़कियों और एक लड़के की जगह अब फिल्म के केंद्र में है एक लड़की और दो लड़के.

फिल्म में नया क्या है. सिर्फ इसके सितारे..आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा. तीनों की ये पहली फिल्म है.

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वो बात थी 1998 की जब 'कुछ कुछ होता है' में शाहरुख, काजोल और रानी की तिकड़ी ने कमाल दिखाया था. अब ये 2012 की बात है. जब करण ने फिल्म में सितारे बदल दिए, लेकिन कहानी वही दोहराना चाह रहे हैं. छात्र जीवन के प्यार, मोहब्बत और दोस्ती की.

फर्क ये है कि लड़कियों की स्कर्ट और छोटी हो गई है. क्लासरूम, किसी सपनों के संसार की तरह नज़र आता है. जहां हरी, पीली और लाल कुर्सियां छात्रों के कपड़ों से मेल खाती हुई नज़र आती हैं.

स्कूल में लड़के-लड़कियां महज़ मौज मस्ती करते नज़र आते हैं. फिर वो पढ़ते कब हैं. ये तो दिखाया ही नहीं गया है.

सुंदर कपड़े, रंग बिरंगे स्कूल बैग्स, रोमांस, नाच, गाना और खेल कूद पूरी फिल्म में बस यही नज़र आता है. करण जौहर की नज़र में क्या स्कूली लाइफ की यही हक़ीक़त है.

कहानी

आलिया भट्ट को अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.
इमेज कैप्शन, आलिया भट्ट को अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.

देहरादून के सेंट टेरेसा स्कूल में कुछ बेहद अमीर लोगों के बच्चे और कुछ मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे पढ़ते हैं.

रोहन नंदा (वरुण धवन) एक बेहद अमीर उद्योगपति (राम कपूर) का छोटा बेटा है और स्कूल में अपने चमचों के साथ दूसरों पर अपनी धौंस जमाता रहता है.

<link type="page"> <caption> क्या कहते हैं करण जौहर</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/10/121015_karan_johar_pkp.shtml" platform="highweb"/> </link>

उसके प्रभुत्व को चुनौती देने आता है एक मिडिल क्लास लड़का अभिमन्यु सिंह (सिद्धार्थ मल्होत्रा) जो बड़ा होकर अपना नाम कमाना चाहता है.

अभिमन्यु एक-एक करके हर क्षेत्र में रोहन को पछाड़ने लगता है. यहां तक कि उसकी गर्लफ्रेंड शनाया (आलिया भट्ट) के भी करीब पहुंच जाता है. और फिर शुरू होती है प्यार की तकरार. और इन सबके बीच होते हैं ढेर सारे गाने.

अभिनय

करण जौहर ने अपने तीनों नए कलाकारों को खूबसूरती से पेश किया है और उनकी कमियों को छिपाने की कोशिश की है.

रोल के हिसाब से वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा को बराबरी का मौका मिला है लेकिन वरुण के किरदार में ज़्यादा शेड्स हैं.

रही बात आलिया भट्ट की, तो उन्हें अपनी पहचान बनाने में ख़ासा वक्त लगेगा. इस फिल्म में तो खैर किसी तरह से बात बन जाएगी क्योंकि उनके करने के लिए ही कुछ खास नहीं है. लेकिन आगे, कड़ी मेहनत की दरकार है.

फिल्म में ऋषि कपूर की भी अहम भूमिका है, वो कॉलेज के डीन बने हैं और उनका काम हमेशा की तरह अच्छा है.

स्टूडेंट ऑफ द ईयर
इमेज कैप्शन, फिल्म हक़ीक़त से कोसों दूर है.

लेकिन, ना जाने क्यों उनके किरदार को गे (समलैंगिक) बनाया गया है. ऋषि एक मंझे हुए कलाकार होने की वजह से ये काम भी बखूबी निभा गए हैं.

रोहित रॉय और राम कपूर भी अपनी भूमिकाओं में जमे हैं.

फिल्म का संगीत अच्छा है और थिरकने पर मजबूर करता है. खासकर गीत 'राधा' और कुछ 60 और 70 के दशक के गीतों के रीमिक्स.

इसके अलावा अयंका बोस की फोटोग्राफी भी सराहनीय है.

'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' एक खुशनुमा फिल्म तो है लेकिन फिल्म देखते हुए आप ये ज़रूर सोचेंगे कि कहां इस तरह के स्कूल हैं जहां बच्चे सिर्फ गाते, बजाते और खेलते रहते हैं.

फिल्म में चंद लम्हों के लिए काजोल अपने लुभावने डांस के साथ नज़र आती हैं. उनकी मौजूदगी एक सुखद अहसास देती है.

लेकिन कुल मिलाकर फिल्म में कुछ खास नहीं है.