मैं तो अपनी फ़िल्में भी नहीं देखता- नाना पाटेकर

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नाना पाटेकर को अपनी ख़ुद की फ़िल्में देखना भी पसंद नहीं है.
मुंबई में वो पत्रकारों से बात तो कर रहे थे अपनी आने वाली फ़िल्म 'शागिर्द' के बारे में लेकिन जब उनसे पूछा गया कि मौजूदा दौर की कौन सी फ़िल्में उन्होंने देखी हैं तो वो बोले, "मैं तो अपनी ख़ुद की फ़िल्में भी नहीं देखता. एक बार डबिंग पूरी हो जाती है तो मैं उस फ़िल्म की तरफ़ ध्यान भी नहीं देता. 13 तारीख को मेरी फ़िल्म शागिर्द रिलीज़ हो रही है. लेकिन मुझे इसकी परवाह भी नहीं है."
नाना कहते हैं कि फ़िल्म पूरी होने के बाद वो कुछ बदल नहीं सकते. फिर निर्देशक बोले भी कि भाई ये शॉट ठीक से नहीं हुआ तो भी वो फिर कुछ नहीं कर सकते.
'शागिर्द' शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है. इसके निर्देशक तिगमांशु धूलिया है.
नाना ने 'शागिर्द' में दिल्ली क्राइम ब्रांच के एक अफ़सर की भूमिका निभाई है जिसके ज़िम्मे शहर का अपराध ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी है.
फ़िल्म में नाना के अलावा निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप का भी अहम रोल है.
हर तरह के रोल करना ज़रूरी
नाना पाटेकर कहते हैं कि एक कलाकार को हर तरह का रोल करना चाहिए. वो कहते हैं, "आप किसी जंगल से जा रहे हो और आपको प्यास लगे तो आप ये तो नहीं कहेंगे ना कि भई मैं तो सिर्फ़ मिनरल वॉटर पीता हूं. वहां अगर झरना होगा तो आपको उसी का पानी पीना पड़ेगा."

नाना कहते हैं कि पहले उन्होंने कई बेतुके रोल भी किए लेकिन ऐसा वो जानबूझ के करना चाहते थे. उनके मुताबिक़ रोल कोई भी हो अगर प्रभावशाली तरीके से किए जाए तो लोगों को पसंद आता ही है.
नाना पाटेकर मौजूदा दौर की फ़िल्मों से कुछ ख़ास खुश भी नहीं है. वो कहते हैं "नए दौर के दर्शकों ने पुरानी फ़िल्में नहीं देखी इसलिए वो अपने आपको उन फ़िल्मों से जोड़ कर नहीं देख पाते. उसी तरह से मैं नई फ़िल्मों से अपने आपको जोड़ कर नहीं देख पाता. मेरे लिए तो देवदास का मतलब दिलीप कुमार की देवदास है. संजय लीला भंसाली की देवदास का मेरे लिए कोई मतलब नहीं है."
नाना पाटेकर ने ये भी बताया कि इस दौर में वो राजकुमार हीरानी और 'ए वेडनसडे' के निर्देशक नीरज पांडे के साथ काम करना चाहते हैं.












