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इरफ़ान ख़ान को कौन सी बीमारी थी
हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के चर्चित चेहरा इरफ़ान ख़ान नहीं रहे.
क़रीब दो साल से वे एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे थे. इस बीमारी के बारे में उन्होंने ख़ुद ही ट्विटर पर जानकारी दी थी.
5 मार्च 2018 को उन्होंने ट्वीट करके कहा था कि वे एक ख़तरनाक बीमारी से पीड़ित हैं.
उनके इस ट्वीट के आते ही लोग उनकी बीमारी के बारे में तरह तरह की अटकलें लगाना शुरू कर दिया था.
कुछ दिनों बाद उन्होंने एक और ट्वीट करके बताया कि उन्हें 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' है.
क्या लिखा था उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में
ट्वीट में उन्होंने लिखा था, "जीवन में अनपेक्षित बदलाव आपको आगे बढ़ना सिखाते हैं. मेरे बीते कुछ दिनों का लब्बोलुआब यही है. पता चला है कि मुझे न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हो गया है. इसे स्वीकार कर माना मुश्किल है. लेकिन मेरे आसपास जो लोग हैं, उनका प्यार और उनकी दुआओं ने मुझे शक्ति दी है. कुछ उम्मीद भी बंधी है. फ़िलहाल बीमारी के इलाज के लिए मुझे देश से दूर जाना पड़ रहा है. लेकिन मैं चाहूंगा कि आप अपने संदेश भेजते रहें."
अपनी बीमारी के बारे में इरफ़ान ने आगे लिखा था, "न्यूरो सुनकर लोगों को लगता है कि ये समस्या ज़रूर सिर से जुड़ी बीमारी होगी. लेकिन ऐसा नहीं है. इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप गूगल कर सकते हैं. जिन लोगों ने मेरे शब्दों की प्रतीक्षा की, इंतज़ार किया कि मैं अपनी बीमारी के बारे में कुछ कहूं, उनके लिए मैं कई और कहानियों के साथ ज़रूर लौटूंगा."
क्या होता है इस ट्यूमर में?
एनएचएस डॉट यूके के मुताबिक़, 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' एक दुर्लभ किस्म का ट्यूमर होता है जो शरीर में कई अंगों में भी विकसित हो सकता है. हालांकि मरीज़ों की संख्या बताती है कि ये ट्यूमर सबसे ज़्यादा आँतों में होता है.
इसका सबसे शुरुआती असर उन ब्लड सेल्स पर होता है जो ख़ून में हार्मोन छोड़ते हैं. ये बीमारी कई बार बहुत धीमी रफ़्तार से बढ़ती है. लेकिन हर मामले में ऐसा हो, ये ज़रूरी नहीं है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
मरीज़ के शरीर में ये ट्यूमर किस हिस्से में हुआ है, उसी से इसके लक्षण तय होते हैं.
मसलन, अगर ये पेट में हो जाए तो मरीज़ को लगातार कब्ज़ की शिक़ायत रहेगी. ये फ़ेफ़डों में हो जाए तो मरीज़ को लगातार बलगम रहेगा.
ये बीमारी होने के बाद मरीज़ का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ता-घटता रहता है.
बीमारी के कारण?
डॉक्टर अभी तक इस बीमारी के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं.
न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने के विविध कारण हो सकते हैं. लेकिन ये आनुवांशिक रूप से भी होती है. माना जाता है कि जिनके परिवार में इस तरह के मामले पहले रह चुके हों, वो लोग इसके रिस्क में ज़्यादा होते हैं.
कई डिटेल ब्लड टेस्ट, स्कैन और बायोप्सी करने के बाद ही ये बीमारी पकड़ में आती है.
क्या इसका इलाज है?
ट्यूमर किस स्टेज में है, वो शरीर में किस हिस्से में है और मरीज़ की सेहत कैसी है. इन सबके आधार पर ही ये तय होता है कि मरीज़ का इलाज कैसे किया जाएगा.
सर्जरी के ज़रिए इसे निकाला जा सकता है. लेकिन ज़्यादातर मामलों में सर्जरी का इस्तेमाल बीमारी पर काबू करने के लिए किया जाता है.
इसके अलावा मरीज़ को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिससे कि शरीर कम मात्रा में हार्मोन छोड़े.
हार गए जंग इरफ़ान
पिछले साल (2019) में इरफ़ान ख़ान लंदन से इलाज करवाकर लौटे थे और लौटने के बाद वो कोकिलाबेन अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में ही ट्रीटमेंट और रुटीन चेकअप करवा रहे थे.
बीमारी का पता लगने के बाद से इरफ़ान का इलाज लंदन में चल रहा था.
मंगलवार को हालत बिगड़ने के बाद इरफ़ान ख़ान को मुंबई में कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उनकी हालत अच्छी नहीं थी और वे आईसीयू में थे. बुधवार को उनका निधन हो गया.
अपनी बीमारी के दिनों में एक बार उन्होंने ट्वीट किया था- ज़िंदगी में अचानक कुछ ऐसा हो जाता है, जो आपको आगे लेकर जाता है. मेरी ज़िंदगी के पिछले कुछ दिन ऐसे ही रहे हैं. मुझे न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी हुई है. लेकिन, मेरे आसपास मौजूद लोगों के प्यार और ताक़त ने मुझमें उम्मीद जगाई है.
पिछले साल मार्च में इरफ़ान ने ट्वीट करके लोगों का धन्यवाद किया था.
आख़िरकार इरफ़ान ये जंग हार गए.
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