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वुसत का ब्लॉगः जोधपुरवासियों को मारे गए चिंकारा का ख़त
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मेरे प्यारे जोधपुरियों,
आप सबको मेरा चारों पैरों और सींगों से दंडवत प्रणाम.
आप सबने मुझे और मेरे छोटे भाई पिंगू चिंकारे को हत्या के बाद जो आदर दिया और मेरी नस्ल को बचाने और उसके बढ़ावे के लिए जो जोश दिखाया, उसके बाद मुझे धरती छोड़ने का कोई दुख नहीं.
बल्कि इस दौरान यहां कई गायें, बैल और बेमौत मारे गए लोगों के आ जाने से स्वर्ग में हम सब भारतवासियों की एक बहुत बड़ी कॉलोनी भी बस गई है.
खाने-पीने, चरने-चराने और यहां से वहां तक भागने के लिए खुले मैदानों की कोई कमी नहीं. जानवर और इंसान सभी एक दूसरे का अच्छे से ख़्याल रखते हैं.
सलमान के फ़ैन
मैंने और पिंगू ने यहां आने के कुछ ही समय बाद पाकिस्तान से आने वाली दो सुशील चंकारनों से ब्याह कर लिया.
उनका ताल्लुक ज़िला थरपारकर से है, वो किसी अरब शेख़ की गोली का निशाना बनके यहां पहुंची थीं.
आप सबकी कृपा से अब हमारे चिंकारा परिवार में 41 छोटे-बड़े लोग हैं. पिछले ही हफ्ते मैं दादा भी बन गया.
यहां पर तीन दिन पुराना अख़बार भी आता है.
अख़बार से पता चला कि मेरी और पिंगू की हत्या के जुर्म में जोधपुर की किसी अदालत ने सलमान ख़ान को पांच वर्ष क़ैद की सज़ा दे दी.
सलमान को माफ़ी
मुझे और पिंगू को ख़ुशी भी हुई और दुख भी, ख़ुशी इस बात की कि आप लोगों ने एक अन्याय को न्याय में बदलने में चिंकारा बिरादरी का पूरा-पूरा साथ दिया और दुख इस बात का कि मैं और पिंगू उस सुपरस्टार की गोली का निशाना बने जिसके हम भी फैन थे और हैं और जब हमें उसके वहां आने की ख़बर मिली थी तो हम भी देखने के लिए वहां ख़ुशी-ख़ुशी पहुंचे थे.
यहां स्वर्ग में मेरे बच्चे और नवासे-नवासियां सलमान ख़ान को ज़्यादा नहीं जानते लेकिन टाइगर श्रॉफ़ को ख़ूब जानते हैं.
बल्कि मेरे एक भतीजे ने तो टाइगर की नकल करते हुए परसों ही अपनी पिछली टांग भी तुड़वा ली.
जोधपुरवासियों ये ख़त मैं आपको इसलिए लिख रहा हूं कि मैंने और पिंगू ने कल फ़ैसला किया कि सलमान ख़ान को अब माफ़ कर दिया जाए.
चिंकारा बिरादरी
लेकिन एक शर्त है कि वे राजस्थान में चिंकारा बिरादरी के बढ़ावे और उनकी देख-रेख में तन-मन-धन के साथ हाथ बँटाएं और शहर से आने वालों को ये जागरूकता संदेश भी देते रहें कि चिंकारे दुश्मन नहीं बल्कि पर्यायवरण के दोस्त हैं.
और राजस्थान के वासियों अगर आप सच में हमारे दोस्त हो तो जितनी मोहब्बत आप हमसे करते हो, उतनी ही मोहब्बत अपने जैसे इंसानों को भी दो.
हम चिंकारे भेदभाव नहीं जानते. हमारे यहां कोई भी शंभूलाल नहीं. आप क्यों हम जैसे नहीं बन सकते. ये बात चिंकारा बन के सोचना तुरंत समझ में आ जाएगी.
अब चलता हूं, मेरे दौड़ने का समय हो गया है. ख़ुश रहो मेरे जोधपुरियों राजस्थानियों...
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