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इस गांव में है सलमान ख़ान के शिकार हुए हिरणों का स्मारक
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, कांकाणी गांव (राजस्थान) से, बीबीसी के लिए
वो कोई भव्य स्मारक नहीं है. लेकिन कांकाणी गांव के निकट बना एक साधारण चबूतरा वन्य प्राणियों की रक्षा में लड़ी गई असाधारण लड़ाई की याद दिलाता है.
उस मरुस्थल में कहीं हिरण कुलांचे भरते मिलते हैं तो कहीं परिंदे ऐसे चहचहाहट करते हैं गोया वे अपने रक्षकों की प्रशस्ति में गीत गा रहे हों.
हिरणों की हिफ़ाज़त में लगा है गांव
राजस्थान के थार मरुस्थल में बिश्नोई बहुल गावों में जगह-जगह वन्य जीवों के लिए तालाब बने हैं और ग्रामीण हर वक्त शिकारियों से उनकी हिफाजत में लगे मिलते हैं.
बिश्नोई समाज के गावों में गुरुवार को जब बॉलीवुड स्टार सलमान खान को जोधपुर की एक अदालत ने पांच वर्ष की सजा सुनाई, खुशी की लहर दौड़ गई.
जोधपुर ज़िले के इसी कांकाणी गांव में 1998 में सलमान खान ने दो काले हिरणों का शिकार किया था.
कांकाणी के मोहन लाल बिश्नोई कहते हैं, "गांव के सभी लोग अदालत के फ़ैसले का इंतजार कर रहे थे. जैसे ही उन्हें सलमान को सजा सुनाए जाने की ख़बर मिली, गांव में लोग खुश हो गए."
वे कहते हैं, "हम कोई दो दशक से इस मुकदमे को लड़ रहे हैं."
जब सलमान ख़ान ने काले हिरण मारे
कांकाणी के लोग अपने गांव का वो हिस्सा दिखाते हैं जहां उस रात सलमान खान ने दो काले हिरणों का शिकार किया था. उसी जगह के करीब उन दो कृष्ण मृगों को विधि विधान से दफ़नाया गया और इसके बाद एक स्मारक बना दिया गया.
पत्थर और सीमेंट से बने उस ऊंचे स्मारक में किसी उम्दा वास्तुशिल्प के दर्शन नहीं होते, मगर ये चबूतरा बिश्नोई समुदाय के वन्य जीवों की रक्षा के संकल्प की याद दिलाता है.
गांव के लोग हर दिन वहां पक्षियों के लिए दाना डालते हैं और आसपास स्वच्छंद विचरण करते हिरणों की रक्षा करते हैं.
कांकाणी के बंशीलाल कहते हैं सलमान खान ने उन काले हिरणों का शिकार किया जो पहले ही अपने अस्तित्व पर संकट के ख़तरे से जूझ रहे हैं.
कांकाणी के लोग उस जगह को दिखाते हैं जहाँ शिकार किया गया था. इसी गांव के लोगों की गवाही पर सलमान खान को अदालत ने शिकार का दोषी करार दिया और सजा सुनाई.
इसमें पूनम चंद और भारमल की गवाही अहम थी. गांव के लोग कहते हैं उस रात जैसे ही उन्हें गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी, लोगों लगा कि किसी ने शिकार किया है.
कांकाणी के मोहन लाल बिश्नोई कहते हैं, "गांव के लोग उस जगह की ओर दौड़े और वाहनों में जा रहे लोगों का पीछा किया. मगर शिकार में लगे लोग बच निकले."
हिरणों का अंतिम संस्कार कर चबूतरा बनाया गया
दिनेश बिश्नोई कहते है हमें हमारे अराध्य गुरु जम्भो जी ने जंगली जानवरों और प्रकृति की हिफाज़त का पाठ पढ़ाया है.
बिश्नोई कहते हैं मौके पर दो हिरण टूटी सांस के साथ निढाल पड़े मिले. वहां जमीन पर बिखरे पत्थरों पर हिरणों का खून बिखरा था.
वे कहते हैं हमने पुलिस और वन विभाग को घटना की सूचना दी. वन विभाग की कार्रवाई के बाद मृत हिरणों के शव उन्हें सौंप दिए गए.
कांकाणी के लोग बताते हैं कि उन दोनों काले हिरणों का यहीं अंतिम संस्कार किया गया और फिर एक चबूतरा बना दिया गया.
बंशीलाल कहते हैं उनके समुदाय के लिए यह चबूतरा एक पवित्र स्थान है. यहाँ हर दिन पक्षियों के लिए चुग्गा डाला जाता है.
न केवल कांकाणी बल्कि आसपास के गुढ़ा बिश्नोईयान और खेजड़ली जैसे अनेक गावों में इस गर्म मौसम में भी तालाबों में पानी भरा मिलेगा जहां हर दिन हिरण, मवेशी और परिंदे अपनी प्यास बुझाने आते रहते हैं.
बिश्नोई समुदाय के मुताबिक सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षी भी यहाँ जाड़े का वक्त काटने आते हैं.
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