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'आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है...'
- Author, ज़ीशान ज़फ़र
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद
पाकिस्तान में फ़ैशन शो अमूमन खुली जगहों पर नहीं आयोजित किए जाते.
इसके लिए फ़ैशन स्टूडियोज़ होते हैं, ख़ास तौर पर बनाई गई चुनिंदा जगहें होती हैं. आप ऐसा कह सकते हैं कि इनके आयोजन बंद दरवाज़ों के भीतर ही होते हैं.
लेकिन अब पाकिस्तान में फ़ैशन की फ़िज़ा बदलती हुई दिख रही है. नई पीढ़ी के डिजाइनर सड़कों पर फ़ैशनेबल कपड़े लाने की कोशिश कर रहे हैं.
इन्हीं में से एक मोहसिन सईद भी हैं जिन्होंने हाल ही में लाहौर शहर के पुराने इलाके में सड़कों पर एक फ़ैशन सूट किया.
ये सवाल कई लोगों के जेहन में आता है कि आम पाकिस्तानी फ़ैशन के बारे में क्या सोचते हैं.
मोहसिन का कहना है कि ज़्यादातर लोग कपड़े पहनने को ही फ़ैशन मानते हैं. लेकिन हकीकत में ये उससे कहीं ज़्यादा है.
उनके ख़्याल से फ़ैशन न केवल खुद को जताने का एक तरीका है बल्कि लोगों को भी एक दूसरे से जोड़ने वाली चीज़ है.
पब्लिक प्लेस पर फ़ैशन शो पाकिस्तान के लिहाज से एक नई बात जान पड़ती है.
मोहसिन सईद सार्वजनिक जगहों पर फ़ैशन शूट करने के दिलचस्प पहलुओं की ओर ध्यान दिलाते हैं.
उनका कहना है कि इसकी शुरुआत 19वीं सदी में हुई जब फ़ैशन पब्लिक प्लेस और सड़कों पर उतरा.
वे कहते हैं कि इसके जरिए आप अपने पर्यावरण, शहर की इमारतों, अपनी संस्कृति और जीवनशैली जैसी चीज़ों के बारे में दुनिया को बता सकते हैं.
क्या पाकिस्तान में पब्लिक प्लेस पर फ़ैशन शूट पहली बार हो रहा है?
इस सवाल के जवाब में मोहसिन बताते हैं कि ऐसा नहीं है. अतीत में फ़ैशन शो और शूट सार्वजनिक जगहों पर हुआ करते थे लेकिन ये पुरानी बात है, अब हालात बदल गए हैं.
वे कहते हैं, "उस समय लोगों का रवैया बहुत सकारात्मक था और लोग सहयोग करते थे. लेकिन समय के साथ देश में मजहब के नाम पर चरमपंथ बढ़ने लगा."
"इस वजह से लोगों ने सार्वजनिक जगहों पर होने वाले फैशन शूट में दखल देना शुरू कर दिया."
"छह साल पहले कराची में एक फैशन शूट के दौरान एक शख़्स गुस्सा होकर मेरे पास आया बोला, इसे रोको."
मोहसिन सईद को इस बर्ताव पर हैरत हुई लेकिन फिर भी उन्हें लगा कि आउटडोर फैशन शो जारी रहेंगे.
लाहौर शहर के जिस पुराने इलाके में इस फ़ैशन शूट का आयोजन किया गया, वहां पुरानी इमारतें हैं, इतिहास के क़िस्से हैं और एक अलग सी बात है.
मोहसिन सईद को लगता है कि पाकिस्तान में पब्लिक प्लेस पर महिलाओं की मौजूदगी उनकी आबादी के लिहाज से बहुत कम है.
शायद उनका ख़्याल हकीकत से भी मेल खाता है. उन्हें उम्मीद है कि ऐसे फ़ैशन शूट महिलाओं को पब्लिक प्लेस पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.
मोहसिन सईद बताते हैं कि लाहौर में इस फ़ैशन शूट के दौरान बड़ी तादाद में लोग देखने के लिए इकट्ठा हुए. वे तस्वीरें खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे लेकिन कोई भी पास नहीं आया और न ही किसी ने शूटिंग में दखल देने की कोशिश की.
उनका कहना है कि इस फैशन शूट का मक़सद लोगों की आदत बनाना भी है ताकि कोई औरत तैयार होकर ऐसी जगहों पर आ सके. इस प्रकार की सकारात्मक कोशिशें नियमित रूप से होती रहनी चाहिए. धीरे-धीरे लोगों को इसकी आदत पड़ जाती है, और वे इससे परेशान होने के बजाय इसे आम सी बात समझने लगते हैं.
वे कहते हैं, "मैं अकेले ये बदलाव नहीं ला सकता. दूसरे लोग भी बंद दरवाज़ों से बाहर आएं और पब्लिक प्लेस पर फ़ैशन शो और शूट आयोजित करें. इससे न केवल महिलाओं में सुरक्षा की भावना पैदा होगी बल्कि ये दुनिया के लिए बदलाव का संदेश होगा."
पाकिस्तानी फ़ैशन डिजाइनरों के मुताबिक भले ही मुल्क में मजहब के नाम पर कट्टरपंथ बढ़ रहा हो लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो फ़ैशन पसंद करते हैं.
हां, वे इसे खुलकर जता नहीं पाते.
मोहसिन सईद ने कहा कि इस फ़ैशन शो का संदेश बॉलीवुड का मशहूर गीत, 'आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है...' से समझा जा सकता है.
वे कहते हैं, 'जब तक हम खुद कुछ नहीं करते और दूसरों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं, कोई बदलाव नहीं होगा, न ही लोगों को इसकी आदत पड़ेगी और औरतें खुले आसमान के नीचे पब्लिक प्लेस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकेंगी.'
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