इस स्कूल में तैमूर को भेजना चाहते हैं सैफ़-करीना

    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए

अपने जन्म से ही मीडिया के चहेते बन गए तैमूर अली ख़ान पटौदी हाल ही में एक साल के हो गए.

करीना कपूर और सैफ़ अली ख़ान के बेटे तैमूर इतनी छोटी सी उम्र में भी कैमरे के सामने सहज नज़र आते हैं. राज कपूर और रणधीर कपूर की झलक मारने वाले तैमूर सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय हैं.

एयरपोर्ट हो, नानी का घर, बर्थडे पार्टी या अपने ख़ुद के घर की बालकनी का झूला - फ़ोटोग्राफ़र कहीं तैमूर का पीछा नहीं छोड़ते.

दिलचस्पी का आलम ये है कि तैमूर के नाम से बनाए गए एक अनाधिकारिक इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल को 63 हज़ार से भी ज़्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं.

सैफ़ और सोहा भी बोर्डिंग में पढ़े हैं

ज़ाहिर है करीना-सैफ़ की नींद उड़ी हुई है.

सैफ़ अली ख़ान ने फ़ैसला किया है कि तैमूर के 13 साल के होते ही उन्हें इंग्लैंड के किसी बोर्डिंग में भेज दिया जाएगा.

बीबीसी से रूबरू हुए सैफ़ ने कहा कि, "बोर्डिंग स्कूल में पलना शहरों में पलने से बेहतर होता है. बोर्डिंग स्कूल में कई चीज़े सीखने को मिलती हैं जैसे घुड़सवारी, खेल वग़ैरह. वहां से आप बेहतर बनकर निकलते हैं."

तैमूर बोर्डिंग जाने वाले पटौदी परिवार के पहले बच्चे नहीं होंगे. सैफ़ और उनकी बहन सोहा भी बोर्डिंग में पढ़े हैं.

पटौदी पैलेस में मना जन्मदिन

20 दिसंबर को एक साल के हुए तैमूर ने अपना पहला जन्मदिन अपने ख़ानदानी घर पटौदी पैलेस में मनाया. 150 कमरों वाला पटौदी पैलेस गुड़गांव के पास पटौदी में है और इसे इब्राहीम कोठी के नाम से भी जाना जाता है.

तैमूर के जन्मदिन में उनकी मौसी करिश्मा कपूर, उनके बच्चे और नानी बबीता भी शरीक हुए.

इसके बाद तैमूर अपने परिवार के साथ नए साल का जश्न मनाने स्विट्ज़रलैंड चले गए.

बेल्ट से पिटते थे सैफ़

सैफ़ अली ख़ान बचपन में बहुत शरारती थे और उन्हें अपने पिता मंसूर अली ख़ान पटौदी से कई बार बेल्ट से मार भी पड़ी है.

मां शर्मिला टैगोर को भी सैफ़ काफ़ी परेशान करते थे लेकिन शर्मिला को लगता है कि पोते तैमूर सैफ़ जितने शैतान नहीं होंगे.

हिंदी फ़िल्मों में सैफ़ अली ख़ान का आना इत्तेफ़ाकन रहा. जब वह पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं कर पाए तो उन्होंने फ़िल्मों की तरफ रुख किया.

सैफ़ के मुताबिक़, "मुझे लगा कि ख़ुद का भाड़े का फ़्लैट होगा. संघर्ष करूंगा तो अच्छा लगेगा. फ़िल्मों में काम करने की मेरी वज़ह सही नहीं थी. उस दौरान मुझे मेरी पहली तनख्वाह 20 हज़ार रुपये मिली थी.

उन्होंने आगे कहा, ''अभिनय को लेकर अभी कुछ 2-3 साल से मुझमें गंभीरता आई है और अब मेरा अभिनय मेरी पुरानी फिल्मों से बेहतर है."

डीडीएलजे में होते सैफ, अगर...

फ़िल्म इंडस्ट्री में 25 साल बिता चुके सैफ़ अली ख़ान फ़िल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' में मुख्य किरदार निभाते अगर शाहरुख़ ख़ान फ़िल्म के लिए हामी ना भरते.

सैफ़ के मुताबिक़, "आदित्य चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने शाहरुख़ को फ़िल्म ऑफ़र की लेकिन शाहरुख़ ने साफ़ तौर पर 'हां' या 'ना' नहीं बोला. तब आदित्य चोपड़ा ने सोचा कि अगर शाहरुख़ हां नहीं कहेंगे तो वे मेरे पास आएंगे."

सैफ़ आगे कहते हैं ''अगर 'डीडीएलजे' मुझे ऑफ़र होती तो शायद मैं उतना अच्छा नहीं कर पाता जितनी अच्छी तरह शाहरुख़ ने किया है. मैं उस समय पूरी तरह समझा नहीं था कि क्या करना है और क्या नहीं करना है."

'मैं नहीं चाहता था सारा फ़िल्मों में आए'

सैफ़ अली ख़ान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली ख़ान निर्देशक अभिषेक कपूर की फ़िल्म "केदारनाथ" से फ़िल्मों में प्रवेश करने वाली हैं. इस फिल्म में वो सुशांत सिंह राजपूत के साथ नज़र आएंगी.

सैफ़ अली ख़ान कहते हैं, "मैं चाहता था कि सारा कुछ और काम करे और सामान्य ज़िन्दगी जिये क्योंकि वो बेहतरीन छात्रा रही है. फ़िल्म व्यवसाय में बहुत ही ड्रामा और तनाव है पर वो हमेशा से ही अभिनय करना चाहती थी."

'25 की उम्र में ड्रग्स ली'

सैफ़ की अगली फ़िल्म "कालाकांडी" में नज़र आने वालें हैं जिसमें उनका किरदार किरदार ड्रग्स लेते हुए नज़र आएगा.

ड्रग्स को बुरा मानने वाले सैफ़ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं जब 25 साल का था तब मैंने ड्रग्स का सेवन किया था. ड्रग्स आपकी सोच हमेशा के लिए बदल सकता है. मैं बड़े और सुनसान घरों में पला बढ़ा हूं और मुझे रात को अंधेरे से डर लगता था. ड्रग के उस अनुभव के बाद मेरा डर निकल गया पर ये ग़लत भी हो सकता था.''

सैफ़ के मुताबिक़ ''नौजवानों में बहुत जोश होता है और वे नई चीज़ें करना चाहते हैं. उस दौरान अगर सही संगत ना मिले तो बच्चे ड्रग्स में फंस सकते हैं. ज़रूरी है कि जवान बच्चों को अच्छे दोस्तों का साथ मिले.''

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