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मुझे इस उम्र में विवादों की ज़रूरत नहीं: ऋषि कपूर
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए
ट्विटर पर अपनी सोच सामने रखने वाले मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर अक्सर अपने ट्वीट के कारण विवादों में घिरे नज़र आते हैं. ऋषि कपूर का कहना है की उम्र के इस पड़ाव में उन्हें विवादों की ज़रूरत नहीं है.
बीबीसी से रूबरू हुए ऋषि कपूर ने ट्विटर पर ट्वीट और ट्रॉलिंग पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मैं बैल को सींग से पकड़ता हूँ. ग़लती करने पर लोगों ने मुझे सही भी किया है. मैं इंसान हूँ ग़लतियाँ करता हूँ. मैं जानबूझकर किसी को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं लिखता. मेरे ट्वीट से किसी को ठेस पहुँचती है तो उस ट्वीट को मैं निकाल भी देता हूँ."
'अब मैं कोमल हो गया हूं'
ऋषि कपूर आगे कहते हैं, "मैं विवाद खड़ा करने के लिए नहीं लिखता और ना ही मुझे इस उम्र में विवाद की ज़रूरत है. पिछले चार-पांच महीनों से मैंने नरमी रखी है क्योंकि मीडिया आपके पीछे पड़ जाती है, लोग आपके पीछे पड़ जाते है. पहले मैं बहुत ही तेज़ और तीखा था पर अब मैं कोमल हो गया हूँ."
दमदार अभिनेता की छवि बना चुके ऋषि कपूर का कहना है कि उनकी छवि बतौर अभिनेता फ़िल्म इंडस्ट्री में उनकी दूसरी पारी ने दी है. ऋषि कपूर का मानना है की उस दौर में लोग उन्हें स्टार मानते थे लेकिन बतौर अभिनेता कभी भी श्रेय नहीं देते थे.
इसके लिए वो अपने आप को ज़िम्मेदार मानते है क्योंकि वो 25 साल तक सिर्फ़ गाना गाते रहे और रोमांस वाली फ़िल्में करते रहे. पर बतौर अभिनेता अब उनके लिए किरदार लिखे जा रहे हैं और उन्हें अलग-अलग भूमिकाएं निभाने का मौका मिल रहा है.
2010 में आई हबीब फ़ैसल की फ़िल्म दो दूनी चार का क़िस्सा बताते हुए ऋषि कपूर आगे कहते हैं, "ये कहानी जब मैंने पढ़ी तो हबीब से पूछा की मुझे कौन-सा किरदार करना है? हबीब ने कहा मास्टर वाला. मैंने हबीब से कहा की ये किरदार तो हीरो है और मैं ना अब लीडिंग हीरो हूँ और ना ही फ़िल्म बेच सकता हूँ. इस पर हबीब ने कहा फ़िल्म की कहानी हीरो है."
ऋषि कपूर के मुताबिक दर्शकों में बदलाव आया है. वो अलग कहानियाँ देखना चाहते हैं. उनका मानना है की आज से 10 साल पहले उनके उम्र के अभिनेताओं के लिए सिवाय पिता के कोई रोल नहीं हुआ करता था और अभिनेता रिटायरमेंट ले लिया करते थे.
वह कहते हैं, "शायद अमित जी ने इसे तोड़ा इसलिए मुझे भी काम मिल रहा है. अब हमारे लिए कहानियाँ लिखी जा रही हैं. पर अब मैं सिर्फ़ उन फ़िल्मों का हिस्सा बनना चाहता हूँ जिसमें मैं योगदान दे सकू."
'रोमांटिक छवि को तोड़ना मुश्किल काम'
फ़िल्मों में अपनी रोमंटिक छवि के लिए पहचाने जाने वाले ऋषि कपूर का कहना है की उनके लिए रोमांटिक हीरो की छवि तोड़ना बेहद मुश्किल काम था पर उनके अभिनय के प्रति जूनून ने उन्हें नई पहचान दी.
2012 की फ़िल्म अग्निपथ में ऋषि कपूर ने नकारात्मक किरदार रऊफ़ लाला का निभाया था. हालांकि इस किरदार को करने के लिए वो शुरुआत में हिचकिचा रहे थे. उन्हें लगा उनके कारण फ़िल्म फ्लॉप हो जाएगी. उन्हें बदनामी और असुरक्षा का डर सता रहा था पर जब उन्होंने लुक टेस्ट दिया तो उनमें आत्मविश्वास जागा और किरदार यादगार बन गया.
अब ऋषि कपूर चाहते हैं की जब वो इस दुनिया में ना रहें तब लोगों को बोलने का मौका मिले की ऋषि कपूर ने फ़िल्मों में बेहद अलग-अलग किरदार किए.
परेश रावल के अभिनय के कायल रहे ऋषि कपूर फ़िल्म "पटेल की पंजाबी शादी" में साथ नज़र आएंगे. संजय छेल द्वारा निर्देशित ये फ़िल्म 15 सितम्बर को रिलीज़ होगी.
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