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किसिंग के लिए नहीं, बापू के लिए चली कैंची
- Author, सुशांत मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
साल 2017 की पहली रिलीज़ 'ओके जानू' पर सेंसर की कैंची चली लेकिन ये किसी किसिंग या किसी ग्लैमर सीन के लिए बल्कि फ़िल्म महात्मा गांधी से जुड़ी बातों को लेकर है.
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने बीबीसी को बताया, "हमने इस फ़िल्म से निर्माताओं को कुछ डॉयलॉग हटाने के लिए कहा है और ये बातें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ी थीं."
पहलाज ने कहा, "किसी भी ऑईकॉन या प्रसिद्ध आदमी के नाम को ग़लत तरीके से दिखाने या सुनाए जाने की स्थिति में हमें अपना काम करना पड़ता है. अगर आप किसी प्रसिद्ध आदमी का नाम ले रहे हैं और वो ग़लत तरीके से लिया जा रहा है तो पहले उस आदमी से 'एनओसी' या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट लेकर आईए."
महात्मा गांधी को लेकर यह क्या संवाद थे इस बारे में पहलाज ने कोई टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा, "आप फ़िल्म में देखिए कि अगर वो कट ग़लत है तो फिर आप मुझसे पूछिए, लेकिन सर्टिफ़िकेशन एक्ट के अनुसार ये हमारा अधिकार क्षेत्र है कि हम क्या काटें और क्या नहीं और हमें मालूम है कि हम क्या कर रहे हैं."
फ़िल्म से जुड़े एक स्त्रोत के अनुसार जो तीन शब्द बदलने के लिए कहे गए हैं, वो हैं 'बापू', 'चरखा' और 'साबरमती', "फ़िल्म में एक जगह हल्के फ़ुल्के मज़ाक में इन तीन शब्दों का इस्तेमाल किया गया था लेकिन अब हम इसे बदल रहे हैं."
इस सीन के बारे में विस्तार से बताने से इंकार करते हुए उन्होनें कहा, "हम कोई कंट्रोवर्सी नहीं चाहते और फ़िल्म देखने पर आपको समझ आ जाएगा कि यह किस बारे में है."
फ़िल्म के निर्देशक शाद अली ने कई बार फ़ोन किए जाने पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी और निर्माता करण जौहर के बैनर धर्मा प्रोडक्शन की ओर से भी कोई आपत्ति इस मामले में दर्ज नहीं करवाई गई है.
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