
हॉंग कॉंग में लोकतंत्र समर्थक लोगों ने प्रदर्शन किया है. तस्वीर एएफपी
अभी कुछ दिनों पहले पूर्वी हॉंग कॉंग की होली क्रॉस चर्च में कई दर्जन शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों ने एक बैठक की थी.
ये लोग चीन द्वारा विद्यालयों में ऐसी पाठ्यक्रम को अनिवार्य बनाने का विरोध कर रहे थे जिसमें चीन के मुख्य भूभाग की संस्कृति और इतिहास का सम्मान करना बताया जाता है.
इस पाठ्यक्रम को सितंबर से प्राथमिक विद्यालयों में लागू किया जाएगा और माध्यमिक वर्गों में इसे अगले साल से पढ़ाया जाएगा.
इस बैठक में लगभग 70 लोगों ने हिस्सा लिया और हॉंग कॉंग की सरकार पर गुस्सा ज़ाहिर किया.
उनका कहना है कि जब लोग इतना विरोध कर रहे हैं तो सरकार इस कोर्स को हटाने का नाम क्यों नहीं ले रही है.
हॉंग क़ॉंग पेशेवर शिक्षक संघ के डायरेक्टर चेयुंग यूई फाई इस बैठक में मुख्य वक्ता थे.
"हमें मालूम है कि आज़ादी क्या होती है. हमें पता है की मानवाधिकार क्या होते हैं. चीन हमारा देश है लेकिन वो लोकतंत्र नहीं हो रहा है. इसलिए हम हॉंग कॉंग की रक्षा करना चाहते हैं."
कार्यकर्ता एंड्रू शुम
उन्होंने कहा, "ये बहुत हैरानी की बात है. मुझे लगता है कि ये अजीब बात है कि इतना विरोध हो रहा है इसके बावजूद सरकार अपने फैसले पर अडिग है. दरअसल ये झगड़ा हॉंग कॉंग और चीन के मुख्य भूभाग के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनैतिक दूरी को जताने वाला एक ताज़ा उदाहरण बन कर उभरा है. ये चीन की सरकार के प्रति हॉंग कॉंग के लोगों का गहरा अविश्वास भी जताता है."
चुनाव की रणनीति
सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविदों और कानून के जानकारों के मुताबिक हॉंग कॉंग में ये लडाई लोकतंत्र समर्थकों और चीनी सरकार के पक्ष में काम करने वाले लोगों के बीच लडी़ जा रही है.
उनका मानना है कि इस लड़ाई का नतीजा हॉंग कॉंग में लोकतंत्र के भविष्य की दशा निर्धारित करेगा.
हॉंग क़ॉंग के साइंस और टेक्नोलॉजी विश्वविधालय के एसोसिएट प्रोफेसर डिक्सन सिंग कहते हैं, "हम एक ज्वालामुखी पर बैठे हुए हैं. चीन सांस्कृतिक रूप से हॉंग कॉंग के एकीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाना चाहता है, ये चुनाव से पहले करने की कोशिश हो रही है जब हर किसी को मत डालने का अधिकार होगा."
चीन के बाकी भूभाग के मुकाबले हॉंग क़ॉंग में लोगों के पास ज्यादा आज़ादी है. वहां का मीडिया स्वतंत्र है, लोगों के पास इकट्ठा होने का अधिकार है और वहां के संस्थान भी पारदर्शी और ज्यादा जिम्मेदार हैं.
वोट का अधिकार

लोगों का मानना है कि चीन की सरकार हॉंग कॉंग के युवाओं के मन को प्रभावित करना चाहती है. तस्वीर रॉयटर्स
लेकिन हॉंग कॉंग के लोगों में सभी को वोट डालने के अधिकार मिलने को लेकर रोष है. 15 साल पहले जब हॉंग कॉंग चीन के प्रशासन में वापस लौटा था तब इसका वादा किया गया था.
चीन ने संकेत दिए हैं कि हॉंग कॉंग के लोगों को ये अधिकार साल 2017 तक मिल सकता है जब शहर के अगले मुख्य कार्यकारी का चुनाव होना है.
हॉंग कॉंग के डेमोक्रेट्स का मानना है कि चीन की सरकार कोशिश कर रही है कि युवा पीढ़ी की सोच को प्रभावित किया जाए ताकि चुनावों में उनकी वफादारी जीती जा सके.
इसी वजह से इस साल जुलाई में नए राष्ट्रीय शिक्षा के खिलाफ कई हजार लोगों ने हॉंग कॉंग के सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था.
26 साल के कार्यकर्ता एंड्रू शुम कहते हैं, "हालांकि हॉंग कॉंग एक लोकतांत्रिक शहर नहीं है लेकिन हमें मालूम है कि आज़ादी क्या होती है. हमें पता है की मानवाधिकार क्या होते हैं. चीन हमारा देश है लेकिन वो लोकतांत्रिक नहीं हो रहा है. इसलिए हम हॉंग कॉंग की रक्षा करना चाहते हैं."
सरकार हुई सावधान
जाहिर है इस तरह के विचार से चीन की सरकार भी सावधान हो गई होगी.
उनके लिहाज से विद्यार्थियों को अपनी मातृभूमि से प्रेम करने का पाठ पढ़ाने में कुछ भी गलत नहीं है.
ग्लोबल टाइम्स अखबार ने अपने एडिटोरियल में लिखा, "जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वो पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होने का खतरा रखते हैं, जैसा कि हॉंग कॉंग में ब्रिटिश राज के दौरान होता था."
अभी ये नहीं कहा जा सकता कि हॉंग कॉंग में लोकतंत्र समर्थकों और चीन समर्थकों के बीच लड़ाई का नतीजा क्या निकलेगा. अभी तो दोनों ही पक्ष हॉंग कॉंग के नागरिकों का दिल जीतने की कोसिश कर रहे हैं.








