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मंदी की मार से तेल फिसला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैश्विक मंदी के कारण माँग में कमी आने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का दाम पिछले साढ़े तीन वर्षों के सबसे कम स्तर पर पहुँच गया है. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में कच्चे तेल का भाव 49 डॉलर 62 सेंट प्रति बैरल रहा. वहीं लंदन के वायदा बाज़ार में एक बैरल ब्रेंट क्रूड के लिए 48 डॉलर 90 सेंट की बोली लगाई गई. इस वर्ष जुलाई में तेल का भाव 147 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया था और उसके बाद से अब तक इसमें लगभग दो तिहाई की कमी आ चुकी है. दाम में भारी कमी को देखते हुए तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक की 29 नवंबर को बैठक होने वाली है. हडसन कैपिटल एनर्जी के जोनाथन कॉर्नाफेल का कहना है, "माँग पक्ष की ओर से कोई भी सकारात्मक ख़बर नहीं मिलने और वैश्विक मंदी की मार से ये हालत बनी है." अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने गुरुवार को कहा था कि अगले साल की शुरुआत में आर्थिक विकास दर में और गिरावट आ सकती है. इससे बाज़ार में ये धारणा गई कि अमरीका में तेल की माँग घट जाएगी. ओपेक ने हाल ही में विएना में हुई आपात बैठक में तेल के उत्पादन में 15 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने का निर्णय लिया था. |
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