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दुनिया भर में बाज़ार संभले | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर में वित्तीय संकट से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों का असर अब शेयर बाज़ारों पर दिखने लगा है. अमरीकी सरकार के प्रयासों के बाद वाल स्ट्रीट का मुख्य सूचकांक डाओ जोंस में दोपहर के कारोबार में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. इससे पहले एशिया और यूरोप के बाज़ारों में भी बढ़ोतरी दर्ज़ की गई है. उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ ने वित्तीय संकट से निपटने के लिए बैंकों की मदद का ऐलान किया है और इससे पहले अमरीका ने भी बड़े वित्तीय पैकेज की घोषणा की थी. भारत में भी शुक्रवार को क्रेडिट रिज़र्व रेसियो की दर घटाने का असर भी सोमवार को भारतीय बाज़ार पर दिखा और बाज़ार 800 अंक ऊपर बंद हुआ. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का कहना था कि उनकी सरकार को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उससे निपटने में सफलता ज़रुर मिलेंगी. अमरीका के वित्त मामलों के अधिकारी अब जल्दी ही विभिन्न बैंकों के अधिकारियों से मुलाक़ात करने वाले हैं जहां 700अरब डॉलर के पैकेज को खर्च करने के तरीकों पर चर्चा होगी. यूरोपीय सरकारें पहले ही अपने बैंकों को बचाने के लिए अरबों रुपए का निवेश करने की घोषणा कर चुकी हैं. जर्मनी ने जहां अपने बैंकों के लिए 500 अरब यूरो की घोषणा की है जबकि फ्रांस ने 350 अरब यूरो, हॉलैंड ने 200 अरब यूरो, स्पेन ने 100 अरब यूरो और ऑस्ट्रिया ने 85 अरब यूरो की घोषणा की है. |
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