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बढ़ती मुद्रास्फीति से सरकार निराश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सालाना मुद्रास्फीति की दर इतनी बढ़ गई है कि वित्त मंत्रालय को अपनी निराशा का इज़हार करना पड़ा है. दो अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर 12.01 से बढ़कर 12.44 प्रतिशत हो गई है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा, "मुद्रास्फीति की दर पिछले चार सप्ताह से काफ़ी स्थिर थी लेकिन यह वृद्धि बहुत निराशाजनक है." थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर किए गए आकलन के मुताबिक़ ये आँकड़े जारी किए गए हैं जिसमें आम जीवन से जुड़ी सभी वस्तुओं की क़ीमत शामिल होती है. खान-पान के वस्तुओं की क़ीमतों वाले सूचकांक में भी भारी वृद्धि हुई है, मक्के की क़ीमत में चार प्रतिशत, मसालों में तीन प्रतिशत, फलो-सब्ज़ियों में दो प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है. ऊर्जा और वाहनों पर होने वाले ख़र्च के सूचकांक में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई, ऊर्जा क्षेत्र का सूचकांक तो लगभग 18 प्रतिशत के निकट पहुँच गया है. पहले उम्मीद की जा रही थी कि मानसून की अच्छी बारिश और पेट्रोल की क़ीमतों में आई कमी का असर भारत में दिखेगा और मुद्रास्फीति की दर क़ाबू में आएगी. बढ़ती मुद्रास्फीति के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि के भी अनुमान से काफ़ी कम रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है. मुद्रास्फीति के ऐसे डरावने आंकड़े ऐसे समय पर आ रहे हैं जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतन काफ़ी बड़े पैमाने पर बढ़ाया गया है, इस फ़ैसले के बाद केंद्र सरकार पर 15,700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा. कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि वेतन में भारी वृद्धि से भी मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी हो सकती है. |
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