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मुद्रास्फीति ने 13 साल का रिकॉर्ड तोड़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तेरह साल में यह पहला मौक़ा है जबकि भारत में जुलाई महीने में वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 12 प्रतिशत से भी ऊपर चली गई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जानकारों के हवाले से कहा है कि अभी मुद्रास्फीति में और वृद्धि हो सकती है, साथ ही रिज़र्व बैंक के मौद्रिक उपायों का सिलसिला भी जारी रहेगा. भारत का थोक मूल्य सूचकांक पिछले साल जुलाई से लेकर अब तक 12 महीनों में 12.01 प्रतिशत बढ़ा है. भारत में पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति का आंकड़ा 12 प्रतिशत से नीचे था, 1995 के बाद यह पहला मौका है जब यह आँकड़ा इस स्तर पर पहुँच गया है. इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक रिज़र्व बैंक एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा सकता है. इससे पहले जून-जुलाई में रिज़र्व बैंक तीन बार जल्दी जल्दी ब्याज दर बढ़ा चुका है. रिज़र्व बैंक के गवर्नर वाइ वेणुगोपाल रेड्डी ने कहा है कि मुद्रास्फीति में अगले कुछ महीनों में गिरावट की संभावना नहीं दिख रही है. योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि कच्चे तेल के दामों में कमी आने से स्थिति में कुछ सुधार की संभावना है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अच्छे मानसून और तेल के दामों में कमी की वजह से अगले कुछ महीनों मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है. |
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