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कच्चे तेल की क़ीमतें रिकॉर्ड ऊँचाई पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें नई ऊचाइयों को छूते हुए शुक्रवार को 142 डालर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं और इस तरह की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं कि क्या तेल उत्पादक देश माँग की आपूर्ति को पूरा कर सकेंगे. लंदन में कच्चे तेल की क़ीमतें भी 141.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं जबकि न्यूयॉर्क में हल्के कच्चे तेल की क़ीमदें 141.71 के आँकड़ें को छू गई हैं. तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक पर हाल के समय में तेल उत्पादन बढ़ाने का दबाव बढ़ा है, हालाँकि इस संगठन के सदस्य देशों में इस मुद्दे पर मतभेद हैं कि क्या तेल का उत्पादन बढ़ाया जाए या नहीं. लीबिया ने तेल उत्पादन कम करने की बात कही है क्योंकि उसके ख़याल से बाज़ार में तेल की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है और वो अच्छी तरह से हो रही है. लीबिया के तेल मामलों के एक वरिष्ठ अधिकारी शोकरी घानेम ने गुरूवार को कहा था कि अमरीका ने तेल उत्पादक देशों के ख़िलाफ़ जो तेतावनी दी है उसे देखते हुए लीबिया तेल उत्पादन में कटौती करने पर विचार कर रहा है. अमरीकी संसद - कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने इस तरह का विधेयक पारित किया जिसके तहत अमरीकी न्याय मंत्रालय उन तेल उत्पादक देशों पर मुक़दमा चला सकेगा जो तेल की आपूर्ति को सीमित करते हैं और तेल की क़ीमतों में उलटफेर करने की कोशिश करते हैं. लेकिन इस विधेयक पर अभी सीनेट में मतदान नहीं हुआ है और राष्ट्रपति कार्यालय - व्हाइट हाउस पहले ही कह चुका है कि वह इस विधेयक पर वीटो कर देगा. विश्लेषक लीबिया की प्रतिक्रिया को भी संदेह की नज़र से देख रहे हैं कि क्या लीबिया ऐसे माहौल में तेल की आपूर्ति कम करने का क़दम उठाएगा जब दुनिया के बाज़ारों में तेल की क़ीमतें इतनी ऊँची हैं. शेयर बाज़ार गिरे तेल की बढ़ती क़ीमतों, महँगाई और वैश्विक अर्थव्यस्था के धराशायी होने के भय से शेयर बाज़ारों में गिरावट हो रही है. अमरीकी शेयर बाज़ार डाऊ जोंस में औद्योगिक सूचकांक 3.03 फ़ीसदी गिरकर 11,453.4 अंक पर बंद हुआ. यह सितंबर 2006 के बाद से सबसे अधिक गिरावट है. तेल की आसमान छूती क़ीमतों के बाद तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने आशंका जताई है कि तेल की क़ीमतें 170 डालर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं. बाज़ार के विश्लेषकों का कहना है कि कॉरपोरेट अमरीका की ख़राब हालत, तेल की क़ीमतों से कंपनियों के लाभ पर पड़ने वाले प्रभाव और अमरीकी वित्त क्षेत्र के बारे में फैले भय से निवेशकों को नुक़सान पहुँचा है. वाचोविया सेक्योरिटीज के मुख्य बाज़ार विश्लेषक अल गोल्डमान ने कहा, 'मुझे लग रहा है कि हम एक बहुत बड़े मंदी की तरफ़ जा रहे हैं, कौन जानता है कि तेल की क़ीमते बढ़ते बढ़ते 170 डालर प्रति बैरल तक पहुँच जाएँ और वहीं स्थिर हो जाएँ.' बाज़ार विशेषज्ञों की भविष्यवाणी के बाद से जनरल मोटर्स के शेयरों के भाव पिछले 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें तेल के भाव सातवें आसमान पर06 जून, 2008 | कारोबार 'तेल सब्सिडी धीरे-धीरे ख़त्म हो'07 जून, 2008 | कारोबार ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा08 जून, 2008 | कारोबार सऊदी अरब तेल उत्पादन बढ़ाएगा15 जून, 2008 | कारोबार तेल की क़ीमतों को लेकर सम्मेलन22 जून, 2008 | कारोबार 'तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश ज़रूरी'22 जून, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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