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बाल मज़दूरों के इस्तेमाल का सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बाल मज़दूरी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले संगठनों ने ब्रितानी सरकार से माँग की है कि वह उन ब्रितानी कंपनियों ने ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जो बच्चों के इस्तेमाल से तैयार होने वाला माल बेचती हैं. यह माँग ब्रिटेन में सस्ते कपड़े बेचने वाली कंपनी प्राइमार्क के बारे में जानकारी सामने आने के बाद उठाई गई है, प्राइमार्क ने उन तीन भारतीय सप्लायरों का ठेका रद्द कर दिया है जिन्होंने ऐसे लोगों को कपड़े बनाने का ठेका दिया था जो बाल श्रमिकों का इस्तेमाल कर रहे थे. अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए मशहूर बीबीसी के कार्यक्रम पैनोरामा ने यह सचाई उजागर की थी कि प्राइमार्क में बिकने वाले कुछ कपड़ों पर कढ़ाई और उनकी सिलाई का काम भारत में बच्चे करते हैं. बाल मज़ूदरी के ख़िलाफ़ सक्रिय कार्यकर्ता जॉन हिलेरी ने सरकार से माँग की है कि वह कंपनियों की सप्लाई लाइन पर भी ध्यान दे, उन्होंने कहा, "ब्रितानी सरकार को भारत, बांग्लादेश, चीन जैसे देशों में बनने वाले माल के बारे में क़दम उठाना चाहिए, माल ख़रीदने वाली ब्रितानी कंपनियों पर दबाव होना चाहिए कि वे उन्हीं कंपनियों से सामान ख़रीदें जो अपने कर्मचारियों से उचित शर्तों के तहत काम करवाते हैं." भारत में बाल मज़दूरी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले भुवन रिभू का कहना है कि "बाल मज़दूरी की वजह से एक पूरी पीढ़ी तबाह हो रही है, बच्चों का सामाजिक, शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक विकास रुक जाता है." प्राइमार्क का कहना है कि "जानते-बूझते किसी भी हालत में हमारी कंपनी ऐसा माल नहीं बेचेगी जिसके उत्पादन में बाल मज़दूरों का इस्तेमाल किया गया हो, या मज़दूरों का शोषण किया गया हो." प्राइमार्क का कहना है कि उसने सप्लायरों को माल बनाने और आपूर्ति करने का ठेका दिया था लेकिन उन्होंने अवैध तरीक़े से उत्पादन का ठेका किसी और को दे दिया जहाँ ये सारी गड़बड़ियाँ हो रहीं थी जिसका पता उन्हें नहीं था. शर्त प्राइमार्क ने कहा कि उसके अनुबंध की शर्तों में यह शामिल है कि उत्पादन की प्रक्रिया में बच्चों से काम नहीं लिया जाएगा. प्राइमार्क पिछले एक दशक में कपड़े के दुकानों की सबसे सफल चेन के रूप में उभरा है. पूरे ब्रिटेन में प्राइमार्क की 170 दुकानें हैं, उसने पिछले वर्ष 20 करोड़ पाउंड का मुनाफ़ा कमाया है. ब्रिटेन और यूरोप के ग्राहक कहने लगे हैं कि वे अनैतिक तरीक़ों का इस्तेमाल करके तैयार किया गया माल नहीं ख़रीदना चाहते, बाल मज़ूदरी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले संगठनों ने जागरुकता अभियान चलाया है जिसकी वजह से ग्राहक अब काफ़ी सजग हो गए हैं. खेल का सामान बनाने वाली कंपनी नाइकी पर भी ऐसे आरोप लगे थे जिसके बाद उसने अपने सप्लायरों पर सख़्ती की है और उनके बारे में पूरी जानकारी अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराती है. बाल मज़दूरी और मज़दूरों के शोषण के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले संगठनों का कहना है कि सस्ते माल के चक्कर में कंपनियाँ इन बातों पर ध्यान नहीं देतीं कि माल किस तरह तैयार किया जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें बाल मज़दूरी का अर्थशास्त्र06 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरों को रखना हुआ ग़ैरक़ानूनी09 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस रोज़गार गारंटी योजना की दिक्कतें01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जानलेवा हो सकता है एसबेस्टस18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस रोज़गार योजना नहीं, रोज़गार क़ानून02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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