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अरुण सरीन अपना पद छोड़ेंगे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की जानी-मानी मोबाइल सेवा कंपनी वोडाफ़ोन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण सरीन एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में अपना पद छोड़ रहे हैं. भारतीय मूल के अरुण सरीन पिछले पाँच वर्षों से वोडाफ़ोन के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे थे. जुलाई 2008 के आख़िर में वे सेवामुक्त हो जाएँगे. वोडाफ़ोन के उप प्रमुख विटोरियो कोलाओ अरुण सरीन का स्थान लेंगे. यह ख़बर उस समय आई है जब वोडाफ़ोन ने कर अदा करने से पहले अपने वार्षिक मुनाफ़े में दो प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की है. हालाँकि हाल के वर्षों में सरीन ने अपनी जगह मज़बूत कर ली थी, वर्ष 2006 में सरीन को शेयर धारकों का विरोध झेलना पड़ा था और उनके काम की आलोचना हुई थी. प्रसार सरीन के नेतृत्व में वोडाफ़ोन ने भारत, तुर्की और रोमानिया के फैलते बाज़ारों में अपना पाँव पसारा था. अपने वार्षिक नतीजों की घोषणा करते हुए कंपनी ने कहा कि भारत में वोडाफ़ोन की आमदनी में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. एक वक्तव्य में सरीन ने कहा, "मैं समझता हूँ कि मैंने जो लक्ष्य रखा था उसे पाने में सफल रहा, विशेष रुप से नई रणनीति बनाने और उसे लागू करने में." वोडाफ़ोन के चेयरमैन सर जॉन बांड ने कहा है कि सरीन कंपनी को 'विशिष्टता पूर्वक' आगे ले गए. सरीन के बाद कंपनी के उप मुख्य कार्यकारी विटोरियो कोलाओ कंपनी के मुख्य कार्यकारी होंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें वोडाफ़ोन ने भारती में हिस्सेदारी ख़रीदी28 अक्तूबर, 2005 | कारोबार मोबाइल फ़ोन का एक और इस्तेमाल13 फ़रवरी, 2007 | कारोबार 'एस्सार और हिस्सा पाने की कोशिश में'28 दिसंबर, 2006 | कारोबार वोडाफ़ोन की झोली में गया हच11 फ़रवरी, 2007 | कारोबार भारत में बड़ी कंपनी बनेगी वोडाफ़ोन14 फ़रवरी, 2007 | कारोबार ब्लैकबेरी ने ठुकराई भारत की माँग27 मई, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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