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अक्लमंद लोगों के लिए कम ब्याज दर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान की एक फ़ाइनेंस कंपनी ने 'अक़्लमंद' ग्राहकों को कम ब्याज दर पर कर्ज़ देने का फ़ैसला किया है. अब सवाल ये है कि अक़्लमंद कौन है और कौन नहीं, इसका फ़ैसला कैसे होगा? 'बुद्धिमान' लोगों के लिए नई स्कीम लाने वाली कंपनी जीई कंज़्यूमर फ़ाइनेंस का कहना है कि जिन्हें अँगरेज़ी और कंप्यूटर का ज्ञान है उन्हें सस्ते लोन दिए जाएँगे. कंपनी का कहना है कि जो लोग वकालत, चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे 'बेहतर' कामों में लगे हैं उन्हें बुद्धिमान माना जाएगा. जीई का कहना है कि बेहतर कामों में लगे, ज़्यादा प्रशिक्षित लोगों के बेरोज़गार होने के आसार कम होते हैं और वे तेज़ी से तरक़्क़ी करते हैं. कंपनी का मानना है कि ऐसे लोगों को कर्ज़ चुकाने में कोई दिक़्क़त नहीं होती इसलिए उन्हें दिया गया लोन बाक़ी ऋणों के मुक़ाबले अधिक सुरक्षित है. जीई का कहना है कि यह पहला मौक़ा है जब व्याज दर तय करने के लिए व्यक्ति की बुद्धिमत्ता को एक पैमाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. जिनकी अँगरेज़ी अच्छी है और जो कंप्यूटर के इस्तेमाल में दक्ष हैं वे कम ब्याज दर वाले कर्ज़ के लिए आवेदन कर सकते हैं. इनके अलावा जो लोग वकील, डॉक्टर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, वित्तीय विश्लेषक और इंजीनियर हैं वे भी सस्ते लोन हासिल कर सकते हैं. इतना ही नहीं, अगर पति-पत्नी दोनों की उम्र तीस वर्ष से कम हो और दोनों बेहतर नौकरियों में हों तो कर्ज़ और सस्ता हो सकता है. जीई का कहना है कि अगर परिवार में माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन भी 'बुद्धिमान' हैं तो कर्ज़ और सस्ता होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें बैंक चलाते बेघर बच्चे25 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना केंचुआ बाँटा, कर्ज़ चुकाया27 मई, 2003 | कारोबार लॉयड्स टीएसबी रुपए में कर्ज़ देगा18 अप्रैल, 2005 | कारोबार उधार इज़्ज़त की भी कैंची है21 अगस्त, 2005 | कारोबार अब बाँझपन के इलाज के लिए भी कर्ज़02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस इस्लामी बैंकिंग का बढ़ता दायरा18 दिसंबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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