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हीरा तराशी के कारोबार में तेज़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वाणिज्य और उद्योग संगठन एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में भारत से हीरे के आभूषणों के निर्यात में पाँच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो सकती है. एसोचैम के अनुसार यूरोपीय संघ, मध्य-पूर्व और अमरीका के आभूषणों में अशुद्धता का स्तर बढ़ने से वहाँ के ख़रीदार भारतीय आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं. इन देशों में आभूषणों की अशुद्धता का स्तर 12 से 13 प्रतिशत तक पहुँच गया है. इस वर्ष हीरे के आभूषणों के साथ-साथ तराशे गए हीरों के निर्यात में भी वृद्धि होने की संभावना है. अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि हीरों के आभूषणों और तराशे गए हीरों के निर्यात में इस वर्ष अप्रैल से सितबंर के बीच पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 11.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई लेकिन आने वाले कुछ महीनों में माँग बढ़ जाएगी. निर्यात बढ़ने का एक दूसरा कारण यह भी बताया गया है कि अक्तूबर में विदेशी बाज़ारों में बिना तराशे हीरों के दाम में करीब डेढ़ से दो प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है. इसके परिणामस्वरूप भारतीय जौहरी ज्यादा मुनाफ़ा बना पाएँगे. निर्यात एसोचैम के अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल कहते हैं कि हीरे की तराशी और इससे बने रत्न आभूषणों के निर्यात में सूरत और महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है. इस साल की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के बीच भारत से करीब 36 हज़ार 700 करोड़ रुपए के हीरे-जवाहरात का निर्यात किया गया. एसोचैम का ये विश्लेषण गुजरात चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, बॉम्बे चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स और इंडियन मर्चेंट्स चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स से उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के आधार पर किया गया है. एसोचैम के अनुसार इस उदार बाज़ारवादी युग में घरेलू आभूषण उद्योग पर लगे सरकारी प्रतिबंधों की वजह से भारतीय आभूषण विश्व बाज़ार में गहरी पकड़ नहीं बना पाए. यदि आभूषणों के निर्यात को प्रोत्साहन दिया जाता तो काफी मात्रा में सोने की खरीद होती और इनसे बने आभूषणों का निर्यात कर भारी मुनाफ़ा कमाया जा सकता था. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय निर्यात सौ अरब डॉलर से ज़्यादा07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस आम के आम, गुठलियों के दाम03 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अब बंदरों के निर्यात का प्रस्ताव03 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस विदेशी फूल, देसी माली21 जून, 2004 | भारत और पड़ोस हीरे चर गई गाय, तलाशी गोबर की20 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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