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सोने ने 10 हज़ार का स्तर पार किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान पर इसराइली हमलों से बढ़े तनाव की वजह से तेल की क़ीमतें तो चढ़ी हीं साथ ही एक बार फिर सोने की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. भारतीय बाज़ार में सोने की कीमत सात हफ़्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर है. भारत में 10 ग्राम स्टैंडर्ड सोने की कीमत 10100 रुपए हो गई है और चांदी की कीमत भी 18 हज़ार प्रति किलो के स्तर पर पहुँच गई है. मई और जून में गिरावट के बाद एशियाई बाज़ार में सोने की कीमत में 8.4 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और यह 668 डॉलर प्रति ओंस हो गई है. दरअसल सोना एक टिकाऊ निवेश और भरोसेमंद संपत्ति माना जाता है और किसी भी संकट के समय इसकी मांग बढ़ा जाती है जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है. भारत में सोने की चमक आम ज़िंदगी में आसानी से देखी जा सकती है और सोना आमतौर पर शादी ब्याह में बहुमूल्य तोहफ़ा माना जाता है. भारत को दुनिया में सोने के एक बहुत बड़े बाज़ार के रूप में देखा जाता है. लेकिन भारत में अधिकांश सोना ज़ेवरात बनाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है. इधर लेबनान पर इसराइली हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आशंकाएँ गहरा गईं हैं और तेल की क़ीमतें बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची हैं. तेल के बाज़ार में आए इस उछाल से चीन और भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है जो अपनी ज़रूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें तेल की क़ीमतें चढ़ीं, शेयर बाज़ार लुढ़का14 जुलाई, 2006 | कारोबार बढ़ रही है सोने की चमक10 मई, 2006 | कारोबार भारत में सोने-चाँदी के आयात की छूट28 जनवरी, 2004 | कारोबार आभूषण बेचने की होड़07 फ़रवरी, 2003 | कारोबार सोने की चमक फीकी24 सितंबर, 2003 | कारोबार सोने का आकर्षण बढ़ा16 फ़रवरी, 2003 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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