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रेड्ड़ी ने फ़ोक्सवैगन का हर्जाना ठुकराया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मन कार कंपनी फ़ोल्क्सवैगन ने आंध्र प्रदेश सरकार को 25 लाख डॉलर का हर्जाना देने की पेशकश की है. उसने ये हर्जाना कंपनी के भारत में कामकाज के दौरान हुई उन कथित अनियमितताओं के लिए देने की पेशकश की है जो कंपनी के भारत में नियुक्त पूर्व प्रमुख ने की थीं. लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार ने इस राशि को ये कहते हुए ठुकरा दिया है कि भारत की केंद्रीय जाँच एजेंसी, सीबीआई अभी इस बारे में जाँच कर रही है. फ़ोल्क्सवैगन आंध्र प्रदेश में अपनी नई ईकाई लगाना चाहता था लेकिन परियोजना में अनियमितताओं की ख़बरें आने के बाद जुलाई में काम रोक दिया गया. विवाद की शुरूआत हुई कंपनी की भारतीय ईकाई के प्रमुख हेलमुट शुस्टर के अचानक दिए गए इस्तीफ़े से. ऐसा आरोप लगा कि उन्होंने ऐसे लोगों से पैसे लिए जो कंपनी को कई सामानों की आपूर्ति कर सकते थे और साथ ही विदेशों में कंपनी के ठेके के लिए कंपनियाँ बनाईं. हर्जाना मंगलवार को भारत में फ़ोल्क्सवैगन के प्रतिनिधि फ़्रैंक एल्बी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी से मिले और उन्हें 25 लाख डॉलर का चेक देना चाहा. लेकिन मुख्यमंत्री ने चेक लेने में असमर्थता ज़ाहिर की और कहा कि सीबीआई अभी इस बारे में जाँच कर रही है. मगर उन्होंने फ़्रैंक एल्बी का कुछ अधिकारियों को जर्मनी में फ़ोक्सवैगन मुख्यालय भेजने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया. ये दल विशाखापत्तनम में कंपनी के एक प्लांट को स्थापित करने की बात आगे बढ़ाएगा. आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित प्लांट के लिए 20 करोड़ डॉलर दिल्ली स्थित कंपनी वशिष्ठ वाहन में जमा करवा दिए थे. लेकिन हेलमट शुस्टर के इस्तीफ़े के बाद बैंक से ये राशि ग़ायब हो गई. |
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