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बुधवार, 02 मार्च, 2005 को 19:59 GMT तक के समाचार
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मोटरसाइकिल बाज़ार में धूम

होंडा
बजाज को भारतीय बाज़ार में बहुत संभावनाएँ दिख रही हैं
तेजी से फैलते मोटरसाइकिल बाज़ार में विदेशी कंपनियों ने अब भारतीय कंपनियों को कड़ी चुनौती देने की तैयारी तेज़ कर दी है.

इस चुनौती का सामना करने के लिए देशी कंपनियाँ भी कमर कस रही हैं. अगले दो महीनों के भीतर ही ये कसरतें सामने आने वाली हैं.

इस वक्त सबसे ज्यादा धूम 125 सीसी की मोटरसाइकिलों की है. इस वर्ग में दो जापानी मोटरसाइकिल कंपनियाँ भारतीय बाजार में उतर रहीं हैं. ये कंपनियां हैं – होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया और सुज़ुकी मोटर्स.

मोटरसाइकिल के बाज़ार में नई धूम को देखते हुए इन कंपनियों ने अकेले दम इसका फायदा उठाने का बीड़ा उठाया है, वैसे ये कंपनियाँ पहले भारतीय कंपनियों की पार्टनर बनकर बाज़ार में घुसी थीं.

मोटरसाइकिल मध्यवर्ग की जरूरत बनी और अब युवाओं में फैशन का प्रतीक बन रही है इसीलिए कंपनियां महँगे दामों वाली भारी-भरकम मोटरसाइकिलों को बाजार में उतारने की होड़ में जुट रहीं हैं.

एलएमएल की फ्रीडम मोटरसाइकिल
एलएमएल की फ्रीडम मोटरसाइकिल युवा पीढ़ी को लुभाने की कोशिश में

होंडा की तरह सुज़ुकी मोटर्स भी 125 सीसी को मोटरसाइकिल ही बाज़ार में उतारने की जल्दी में है. ये दोनो कंपनियां इन मोटरसाइकिलों को सितंबर-अक्टूबर तक दुकानों में पहुँचा देना चाहती हैं.

‘बिज़नेस स्टैंडर्ड मोटरिंग’ के संपादक बिजय कुमार मानते हैं कि "ये बाज़ार काफी बड़ा है और तेजी से और फैल भी रहा है क्योंकि भारत में मोटरसाइकिल बदलने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ रही है और 100 सीसी की मोटरसाइकिलें काफी अरसे से बाजार और लोगों के घरों में हैं."

इस बाज़ार का सबसे बड़ा हिस्सा अभी बजाज ऑटो लिमिटेड के पास है और विदेशी कंपनियों का मुकाबला करने के लिए बजाज ऑटो अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी कर रहा है.

चुनौती

बिजय कुमार के मुताबिक भारतीय कंपनियों के लिए ये जापानी कंपनियाँ अब मुश्किल खड़ी कर सकती हैं.

वे कहते हैं, "इसके लिए भारतीय कंपनियां खुद ही जिम्मेदार हैं. क्योंकि उन्होंने शोध और विकास (आर एंड डी) पर सही समय पर सही निवेश नहीं किया. अब ये कंपनियां जो भी कर रही हैं हड़बड़ी में कर रहीं है."

 इसके लिए भारतीय कंपनियां खुद ही जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने शोध और विकास पर सही समय पर सही निवेश नहीं किया, अब ये कंपनियां जो भी कर रही हैं हड़बड़ी में कर रहीं है
बिजय कुमार

भारतीय कंपनियों के अधिकारी दावा करते हैं कि विदेशी कंपनियों के आने से देसी कंपनियों पर कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ने वाला क्योंकि उनके मुताबिक़ भारतीय कंपनियों के पास अनुभव है और वे कोई कमज़ोर नहीं हैं.

‘बिज़नेस स्टैंडर्ड मोटरिंग’ के संपादक के मुताबिक इस होड़ में सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है क्योंकि बाज़ार में टक्कर बढ़ने से दामों में कटौती तो होगी और पूरी संभावना है कि विदेशी कंपनियां इसमें आगे रहेंगी.

इसके अलावा मोटरसाइकिलों की क्वालिटी में भी खासा सुधार आएगा और ग्राहकों को फर्राटा भरने के लिए ज्यादा विकल्प भी मिलेंगे.

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