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महिलाएँ अब भी पुरुषों से पीछे
ब्रिटेन में हुए एक नए सर्वेक्षण से पता चला है कि महिलाएँ अब भी नौकरियों में पुरुषों के मुक़ाबले कम ऊँचे पदों पर हैं. समान अवसर आयोग ने महिलाओं से किए जा रहे इस भेदभाव को तुरंत दूर करने को कहा है. आयोग के अध्यक्ष जूली मेलोर का कहना है, लिंग को लेकर भेदभाव के विरोध में क़ानून पारित हुए तीस साल हो चुके हैं लेकिन अब भी प्रभावशील पदों पर बहुत कम महिलाएँ हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में अधिकतर नीति-निर्धारण पदों पर पुरुषों का ही बोलबाला है.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि व्यापार जगत में ऊँचे पदों पर केवल नौ प्रतिशत ही महिलाएँ हैं जबकि राष्ट्रीय दैनिकों की संपादक भी नौ ही प्रतिशत हैं. न्यायपालिका और पुलिस में केवल सात-सात प्रतिशत ही उँचे पद महिलाओं के हिस्से में आए हैं. सरकारी सेवा में 23 प्रतिशत और संसद में केवल 18 प्रतिशत महिलाओं का ही प्रतिनिधित्व है. रिपोर्ट में कहा गया है, यह लोकतांत्रिक नहीं है, संतुलित नहीं है और यह अच्छी बात नहीं है. किसी भी बोर्डरूम या काउंसिल का दरवाज़ा खोल कर देख लीजिए और इस बात की पूरी संभावना है कि वहाँ अधिकतर पुरुष ही नज़र आएँगे.
आयोग का कहना है कि ब्रिटेन में कई-कई घंटों तक काम करने की परंपरा भी महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकती है. आयोग के हाल के आँकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं और पुरुषों के वेतन में जो फ़र्क़ है उसकी वजह से परिवारों को हर वर्ष साढ़े सात हज़ार पाउंड से ज़्यादा का नुक़सान उठाना पड़ रहा है. आयोग ने अधिक से अधिक महिलाओं को उँचे पदों पर लाने के लिए काम के घंटों में लचीलेपन और नियोक्ताओं के सकारात्मक रवैये की सिफ़ारिश की है. |
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