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इमरान ख़ान, पाकिस्तान का वो 'कप्तान' जिसे भूलना मुश्किल
- Author, शारदा उगरा
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
कई साल पहले अपनी पीढ़ी के खिलाड़ियों को सामान्य गुस्ताख़ी और निडरता को समझाने की कोशिश करते हुए एक पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा था, "देखिए हम इमरान ख़ान की ट्रेनिंग से निकले हैं."
उनको निकले हुए कम से कम 25 साल हुए होंगे लेकिन इमरान ख़ान की ट्रेनिंग उनके दिल और दिमाग़ में अब भी बसी हुई थी.
इमरान ख़ान की राजनीतिक ज़िंदगी जैसी भी गुज़री है और उनके बारे में उनके साथी खिलाड़ी जो भी सोचते हैं, हमें एक बार फिर ये पता चल गया कि पाकिस्तान के क्रिकेट में इमरान ख़ान की ट्रेनिंग और इमरान ख़ान की अहमियत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है.
आज भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी पाए गए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अटक जेल में बंद हैं. लेकिन आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान ख़ान का प्रभाव जेल में बंद प्रधानमंत्री से ज़्यादा है.
इस हफ़्ते पाकिस्तान के आज़ादी दिवस के मौक़े पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपने देश के किक्रेट के सुनहरे पलों को याद करते हुए एक वीडियो जारी किया था.
इस वीडियो में न तो इमरान ख़ान का नाम लिया गया था और न ही इमरान ख़ान की कोई तस्वीर थी.
वीडियो को लेकर दिखी नाराज़गी
पाकिस्तान में क्रिकेट फ़ैन्स और इमरान ख़ान के साथी खिलाड़ी वीडियो में इमरान का ज़िक्र न होने पर काफ़ी नाराज़ थे.
पूर्व क्रिकेटर वसीम अकरम ने ट्वीट कर लिखा, ''राजनीतिक मतभेद अलग हैं लेकिन इमरान ख़ान विश्व क्रिकेट के प्रतीक हैं और उन्होंने अपने समय में पाकिस्तान को एक मज़बूत टीम के रूप में विकसित किया और हमें एक रास्ता दिया... पीसीबी को वीडियो हटा देना चाहिए और माफ़ी मांगनी चाहिए.'
थोड़ी देर बाद एक नया वीडियो सामने आया, जिसमें इमरान और उनकी ऐतिहासिक 1992 विश्व कप जीत को दिखाया गया है.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कहा, "पीसीबी ने विश्व कप 2023 के लिए एक प्रचार अभियान शुरू किया है. एक वीडियो 14 अगस्त 2023 को अपलोड किया गया था. वीडियो छोटा था और इसमें कुछ महत्वपूर्ण क्लिप ग़ायब थे. वीडियो के लंबे वर्जन में इसे ठीक कर दिया गया है.''
इमरान ख़ान 30 साल पहले क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन क्या कारण है कि अपने देश के प्रशंसकों की यादों में उनकी इतनी गहरी छाप है? उनके विवादास्पद राजनीतिक करियर के बावजूद पाकिस्तान क्रिकेट में उनकी स्थिति इतनी मज़बूत कैसे है?
जो लोग क्रिकेटर इमरान के दौर के बाद बड़े हुए हैं, उनके लिए क्रिकेटर इमरान और कप्तान इमरान के मायने जानने ज़रूरी है.
जब इमरान ने पाकिस्तान क्रिकेट को नई दिशा दी
यह 1970 और 1980 के दशक के आख़िर की बात है. वेस्ट इंडीज़ उस समय की सबसे मज़बूत और सबसे सफल क्रिकेट टीम हो सकती थी लेकिन बाजी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने मारी.
वजह थी, खेल उनके नियमों के मुताबिक़ खेला जाता था. उनकी क्रिकेट की संस्कृति इस कदर हावी थी कि किक्रेट कैसे खेले जाना चाहिए और इसे कैसे चलाया जाना चाहिए.
उस समय एशिया से आने वाले क्रिकेटरों के लिए कई घिसी-पिटी बातें की जाती थीं. जैसे, वे (एशियाई क्रिकेटर) बहुल प्रतिभावान हैं लेकिन स्वभाव से नाजुक और अस्थिर हैं. घरेलू परिस्थितियों के बाहर जीत नहीं सकते हैं. स्टाइलिश हैं लेकिन शांत हैं.
उस दौर में इमरान ने यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तान अपनी तेज़ गेंदबाजी प्रतिभा, स्टाइलिश बल्लेबाज़ी और अपने नेतृत्व के दम पर बाक़ी दुनिया के सामने खड़ा होने वाला एशियाई देश बन जाए.
1980 के दशक के दौरान पाकिस्तान की टीम ने इमरान की कप्तानी में विदेश सरजमीं पर आठ सिरीज़ खेलीं और विरोधी टीमों को कड़ी टक्कर दी.
साल 1987 में इमरान ने पाकिस्तान को भारत और इंग्लैंड दोनों देशों में पहली टेस्ट सिरीज़ जिताई. इमरान के नेतृत्व में पाकिस्तान वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ मार्च 1976 से लेकर मार्च 1995 तक एक भी टेस्ट सिरीज़ न हारने वाली इकलौती टीम बन गई थी.
अप्रैल, 1988 में दोनों देशों के बीच टेस्ट सिरीज़ 1-1 की बराबरी पर छूटी और इमरान ख़ान को 'मैन ऑफ द सिरीज' घोषित किया गया था.
इमरान की अपनी क्रिकेट उपलब्धियां जबरदस्त हैं. पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने के मामले में इमरान ख़ान तीसरे नंबर (362 विकेट) पर हैं, उनसे आगे सिर्फ़ वसीम अकरम (414 विकेट) और वकार यूनिस (373 विकेट) हैं.
बल्लेबाज़ी में इमरान ने टेस्ट क्रिकेट में 3807 रन बनाए हैं, जिसमें छह शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं. बल्लेबाज़ी के इन आंकड़ों के साथ इमरान टेस्ट में पाकिस्तान के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की टॉप-15 लिस्ट में शामिल हैं. यहां तक कि कप्तान बाबर आज़म भी इमरान ख़ान से 35 रन दूर हैं.
वनडे क्रिकेट में इमरान ख़ान 182 विकेट के साथ पाकिस्तान के टॉप-10 गेंदबाज़ों में शुमार हैं. वहीं बल्लेबाज़ी में इमरान ख़ान ने 33.1 की औसत और 72.65 के स्ट्राइक रेट से 3709 रन बनाए हैं.
इमरान न्यूट्रल अंपायरिंग के चैंपियन थे और लोग भूल जाते हैं कि पहली बार किसी टेस्ट सिरीज़ में न्यूट्रल अंपायर रखने का विचार इमरान ख़ान का था.
1989 में भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान आई थी और इस दौरान सिरीज़ में दो न्यूट्रल अंपायर जॉन होल्डर और जॉन हैम्पशायर (दोनों इंग्लैंड से) ने अंपायरिंग की थी.
1980 के दशक में इमरान न्यूजीलैंड के रिचर्ड हेडली, इंग्लैंड के इयान बॉथम और भारत के कपिल देव के साथ खेल के चार महान ऑलराउंडरों में से एक थे.
अपने देश के क्रिकेट पर उनके प्रभाव के लिए उन्हें बाकियों से आगे जगह दी जानी चाहिए. कपिल ने भारत को ऐतिहासिक 1983 विश्व कप जिताया और 1986 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में जीत दिलाई थी.
लेकिन इमरान का कद उनसे भी बड़ा है क्योंकि उन्होंने 1992 विश्व कप की आश्चर्यजनक जीत से पहले ही पाकिस्तान की क्रिकेट में जो करने में सक्षम थे वह किया.
इमरान उसके बाद आने वाली महान पीढ़ी के मार्गदर्शक, संरक्षक और सख्त हेडमास्टर बन गए. तेज़ गेंदबाज़ी के दो खिलाड़ी वसीम अकरम और वकार यूनुस, आकिब जावेद और इंज़माम उल हक़ के रूप में युवा प्रतिभाएं और रमीज़ राजा जैसा जुझारू खिलाड़ी कुछ उदाहरण हैं.
उनकी नज़र टैलेंट पर होती थी और वह क्रिकेटरों के बीच लड़ाकों की पहचान करने की अपनी सहज प्रवृत्ति पर दांव लगाने को तैयार थे.
इमरान के नेतृत्व में, पाकिस्तान एक मज़बूत प्रतिस्पर्धी के रूप में जाना जाता था. वसीम अकरम ने अपनी आत्मकथा सुल्तान में उनके बारे में लिखते हुए कहा है, "इमरान का स्वभाव लगातार हमला करना, हर चीज़ की कोशिश करना, पूर्णता का लक्ष्य रखना था."
अकरम जिस 'लगातार हमले' की बात कर रहें हैं दरअसल, उसके लिए इमरान ख़ान का अपने गेंदबाज़ों को संभालना बहुत ज़रूरी था.
1992 का विश्व कप इमरान और पाकिस्तान के क्रिकेट का सबसे महान समय था. तब पहले राउंड के आठ मैचों में से पांच में पाकिस्तान को केवल एक जीत नसीब हुई थी.
इसके बाद पाकिस्तान ने तीन मैच जीते और फ़िर उन्हें कोई नहीं रोक पाया. इमरान ने उस टूर्नामेंट को अपने दाहिने कंधे की टूट हुई हड्डी के साथ खेला और चोट को गुप्त रखते हुए लगातार शॉट्स खेले.
सिर्फ़ छह महीने बाद उन्होंने अपनी चार आत्मकथाओं में से एक में लिखा कि वह अपने हाथ को दर्द दिए बिना पानी का एक गिलास नहीं उठा सकते थे.
उन्होंने छह महीने बाद क्रिकेट छोड़ दिया और एक परोपकारी व्यक्ति के रूप में रिटायरमेंट के बाद अपना करियर बनाया. सार्वजनिक दान से सबसे कम राशि से लाहौर में पाकिस्तान का पहला विशेष कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर बनाया.
पेशावर में इसका एक सेंटर है और कराची में एक सेंटर बनाने के लिए पैसा जुटाया जा रहा है. उनकी संस्था शिक्षा और आपदा राहत पर ध्यान केंद्रित करती है.
उन्होंने 1998 में अपनी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की स्थापना की और जब उनका राजनीतिक जीवन उनके सफल क्रिकेट करियर से बहुत अलग रास्ते पर चला गया है तब पाकिस्तान के लिए उस व्यक्ति को भूलना मुश्किल है जिसे आज तक अकरम 'कप्तान' कहते हैं.
इमरान ख़ान और उनका योगदान पाकिस्तान क्रिकेट के आधार का मूलभूत हिस्सा है.
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