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अर्दोआन तुर्की में राष्ट्रपति का चुनाव जीतकर अब मेयर के लिए क्यों परेशान हैं?
- Author, कैगिल कासापोग्लू
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के दिल में इस्तांबुल की एक ख़ास जगह है.
यह न केवल उनका जन्मस्थान है बल्कि यहीं से उन्होंने 70 के दशक में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था.
अर्दोआन सबसे पहले बियोग्लू ज़िले में एक इस्लामी पार्टी की युवा शाखा के प्रमुख बने थे.
उस इस्लामी पार्टी में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए. इसके सदस्य से शुरू करते हुए वे इस्तांबुल के मेयर बने. फिर देश के प्रधानमंत्री और अब राष्ट्रपति.
अर्दोआन इस्तानबुल में ही पले-बढ़े और यहीं रोज़ी रोटी कमाने की कोशिश की.
इस्तांबुल मेडिपोल यूनिवर्सिर्टी में संचार विभाग और जेनर पॉलिटिकल रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष प्रो अहसान अक्तास कहते हैं, "अर्दोआन की शख़्सियत इस्तांबुल से जुड़ी हुई है."
उनके अनुसार, "इस्तांबुल उनका घर है. 2019 के नगर निकाय चुनावों में विपक्ष के हाथों इस्तांबुल में हुई हार उनके लिए काफ़ी नुक़सानदेह रहा."
2019 के नगर निकाय चुनाव में मिली हार का ज़िक्र करते हुए प्रो अक्तास ने बताया कि उस हार ने एके पार्टी और उसकी पूर्ववर्ती पार्टी के इस्तांबुल पर 25 साल पुराने शासन को ख़त्म कर दिया.
2019 की हार ने अर्दोआन के लगातार जीत वाले चुनावी रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था. उन्हें वहां हराने वाले विपक्ष के लोकप्रिय नेता एक्रेम इमामोग्लू थे.
वे रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) के नेता हैं. पिछले पाँच साल से इस्तांबुल को वही चला रहे हैं. लेकिन राष्ट्रपति अर्दोआन अब इस्तांबुल को फिर से वापस पाना चाहते हैं.
'तुर्की का मॉडल' है इस्तांबुल
राष्ट्रपति और संसद के चुनावों के लगभग एक साल बाद अब 31 मार्च को तुर्की में एक बार फिर चुनाव होने जा रहा है. यह पूरे देश में होने वाला नगर निकाय चुनाव है.
विपक्षी सीएचपी का लक्ष्य इस्तांबुल, तुर्की की राजधानी अंकारा और देश के मुख्य पर्यटन शहर अंताल्या सहित कई प्रमुख शहरों पर नियंत्रण बनाए रखना है.
असल में अर्दोआन को इस्तांबुल में पांच साल पहले दो बार हार का सामना करना पड़ा था. सबसे पहले मार्च 2019 और फिर जून 2019 में.
इलेक्शन बोर्ड ने अर्दोआन की पार्टी एकेपी के अनियमिताओं के आरोपों के आधार पर देश में फिर से चुनाव कराने का आदेश दिया था.
इसिक यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर सेडा डेमिरलप कहती हैं, "2019 में सत्तारूढ़ एकेपी के ख़िलाफ़ देश के प्रमुख शहरों में मिली जीत ने विपक्ष का मनोबल बढ़ाया. इससे राष्ट्रपति चुनावों में जीत की उनकी उम्मीदें बढ़ गई थीं."
हालांकि पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष अर्दाआन के ख़िलाफ़ चुनाव हार गया. फिर भी इस्तांबुल जीतने और तुर्की जीतने के बीच एक मज़बूत संबंध है. अगर इमामोग्लू इस्तांबुल पर कब्ज़ा बनाए रखते हैं, तो 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के जीतने की उम्मीदें काफ़ी अधिक होंगी.
प्रो अक्तास का कहना है कि इस्तांबुल, तुर्की के नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति को आकार देने का एक अहम अवसर देता है.
उनके अनुसार, "जब आपको इस्तांबुल का समर्थन मिलता है, तो आप राष्ट्रीय राजनीति और विश्व राजनीति के भी एक अहम खिलाड़ी बन जाते हैं."
इस्तांबुल की आबादी 1.6 करोड़ है, जो देश की लगभग 8.5 करोड़ आबादी का पांचवां हिस्सा है.
इसके मतदाता विभिन्न राजनीतिक, जातीय, धार्मिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के हैं. उनकी जड़ें तुर्की के विभिन्न शहरों में फैली हैं. इस्तांबुल कइयों के लिए 'तुर्की का एक मॉडल' है.
यह तुर्की का मुख्य आर्थिक केंद्र भी है, जिसका देश की जीडीपी में अहम योगदान है.
इस्तांबुल पर नियंत्रण का मतलब व्यापार, पर्यटन और वित्त सहित तुर्की की आर्थिक गतिविधियों के एक अहम हिस्से पर नियंत्रण हो जाना होता है.
मौजूदा मेयर के लिए परीक्षा की घड़ी
राष्ट्रपति अर्दोआन ने इस्तांबुल के मेयर पद के लिए अपने पूर्व पर्यावरण और शहरीकरण मंत्री मूरत कुरुम का नाम आगे बढ़ाया है. लेकिन यह चुनाव बहुत हद तक मेयर इमामोग्लू और राष्ट्रपति अर्दोआन के बीच माना जा रहा है.
52 साल के इमामोग्लू पहले व्यवसायी थे और इस्तांबुल के कम चर्चित ज़िले बेयलिकडुज़ु के मेयर बनने के बाद चर्चा में आए.
कई लोग उन्हें आने वाले वक़्त में राष्ट्रपति अर्दोआन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं. अभी तक तो सभी विपक्षी उम्मीदवार उन्हें हराने में कामयाब नहीं हुए.
बेयलिकडुज़ु में 24 मार्च को एक चुनावी रैली में इमामोग्लू ने कहा कि वह एकेपी के ख़िलाफ़ अपनी सफलता को दोहराने के प्रति अडिग हैं. उन्होंने कहा, "2019 में हमने एक अध्याय बंद कर दिया था. 31 मार्च को एकेपी इतिहास बन जाएगी."
अर्दोआन पार्टी की रैलियों में अपने इस्तांबुल मेयर पद के उम्मीदवार मूरत कुरुम के साथ शामिल हुए.
राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि इस्तांबुल में अर्दोआन को फिर से हराने से इमामोग्लू का राजनीतिक दावा और मज़बूत होगा. इससे 2028 के राष्ट्रपति चुनावों में भाग लेने का उनका रास्ता प्रशस्त होगा.
हालाँकि इमामोग्लू ने अब तक साफ़ तौर पर नहीं कहा है कि वे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगे.
तुर्की के अख़बार कम्हुरियेट को 24 मार्च को दिए एक साक्षात्कार में उनसे पूछा गया था कि क्या वे आधिकारिक तौर पर अगले राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होंगे.
इस पर उन्होंने कहा, "इस्तांबुल के लिए मेरे बड़े सपने हैं. मैं किसी और चीज़ का सपना नहीं देखता, बल्कि इन्हें पूरा करने का सपना देखता हूं. चार साल बाद होने वाली किसी चीज़ पर अभी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा."
अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें शहर में रेल सिस्टम के हुए विस्तार, नए हरित स्थलों के उद्घाटन और बेहतर सामाजिक सहायता पर सबसे अधिक गर्व है.
मेयर के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हज़ारों नए आवास का निर्माण करके शहरी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा दिया. इसे वे जारी रखने का वादा करते हैं.
भूकंप का डर
तुर्की पिछले क़रीब छह साल से आर्थिक संकट से जूझ रहा है.
चुनाव प्रचार के दौरान, आर्थिक सुधार के वादे लोगों का समर्थन जुटाने में मददगार साबित हो रहे हैं. हालांकि इस्तांबुल को अब 'भूकंप' का डर सता रहा है.
वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इस्तांबुल में कभी भी विनाशकारी भूकंप आ सकता है.
उनके अनुसार, स्थानीय अधिकारियों को जान और माल का नुकसान कम करने के लिए हर संभव सावधानी बरतनी चाहिए.
पिछले साल दक्षिणी तुर्की में आए दो बड़े भूकंपों में 53 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे.
एकेपी के एजेंडे में पुरानी इमारतों को ध्वस्त करके उनकी जगह भूकंप-रोधी इमारतें खड़ी करना है.
प्रो डेमिरलप कहती हैं, "मुराट कुरुम शहरी विकास के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है. और इसका एक प्रतीकात्मक महत्व भी है. फिर भी यह जीत तय करने के लिए काफ़ी नहीं है."
वे कहती हैं, "मुराट कुरुम एक टेक्नोक्रेट हैं. वे अपने ब्रैंड के बजाय अपनी पार्टी के ब्रैंड से जुड़े रहेंगे, जबकि इमामोग्लू के मामले में यह विपरीत है."
अर्दोआन का चुनावी अभियान
अपने प्रमुख मंत्रियों के साथ मिलकर राष्ट्रपति अर्दोआन पूरी सक्रियता से स्थानीय निकाय चुनावों का प्रचार कर रहे हैं. उनका इस्तांबुल पर विशेष ध्यान है.
इस्तांबुल में 24 मार्च को जुटे अपने हज़ारों समर्थकों से उन्होंने कहा, "इस्तांबुल को उसके असली मालिक को लौटा दिया जाएगा." उन्होंने अपने समर्थकों से वहां जीत तय करने के लिए दिन-रात काम करने की अपील भी की.
उन्होंने कहा, "हम 31 मार्च को एक नए युग के दरवाज़ें खोलेंगे. मैं देश में जहाँ भी जाता हूँ, वहाँ हर किसी से इस्तांबुल में अपने रिश्तेदारों को फोन करने और एकेपी के लिए वोट करने के लिए कहता हूँ."
70 साल के अर्दोआन ने कहा कि यह चुनाव उनका 'आख़िरी' होगा. वे अभी राष्ट्रपति का अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं.
क़ानून के अनुसार वे 2028 के बाद चुनाव के लिए फिर खड़े नहीं हो सकते. हालांकि उन्होंने अभी तक किसी को अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाया है.
प्रो अक्तास कहते हैं, "एकेपी के लिए किसी दूसरे संभावित नेता की पहचान करना बेहद मुश्किल है. अर्दोआन एक करिश्माई और बहुत मज़बूत नेता हैं. जब हम सर्वे करने वालों से पूछते हैं कि वे अर्दोआन की जगह किसे देखना चाहते हैं, तो जवाब नहीं मिलता. पार्टी के लिए यह चुनौती है."
हालांकि राष्ट्रपति के आलोचक इस बात से असहमत हैं कि यह उनका आख़िरी चुनाव है.
उनका मानना है कि इस्तांबुल में चुनावी जीत मिलने पर वे इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों स्तरों पर सत्ता को मज़बूत बनाने के लिए कर सकते हैं.
उनके अनुसार, इसका इस्तेमाल वे राष्ट्रपति का एक और कार्यकाल पाने के लिए संविधान में बदलाव करने के लिए कर सकते हैं.
बँटा हुआ विपक्ष
पिछले चुनावों की तुलना में इस बार अर्दोआन को एक फ़ायदा है, वो ये कि अब विपक्ष एकजुट नहीं है. सर्वेक्षणों से पता चला है कि इस्तांबुल में टक्कर कांटे की होगी.
पोलिंग फर्म कोंडा के अनुसार, इस्तांबुल के एक हालिया सर्वेक्षण में इमामोग्लू को 38.2% वोट मिले, जबकि एकेपी के मूरत कुरुम को केवल 32.2% वोट मिले.
इस्तांबुल में कुर्दों की बहुत बड़ी आबादी है. 2019 में इमामोग्लू की जीत का मुख्य कारण राष्ट्रवादियों, धर्मनिरपेक्षवादियों, उदारवादियों, रूढ़िवादियों, इस्लामवादियों और सबसे अहम कुर्दों के छह-पक्षीय गठबंधन से मिला समर्थन था.
लेकिन 2023 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद विपक्ष का यह गठबंधन टूट गया. मौजूदा चुनाव में इनमें से कई विपक्षी दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं.
हालांकि इस्तांबुल में किसी अन्य विपक्षी दलों के उम्मीदवार के जीतने की संभावना नहीं है. लेकिन इमामोग्लू की जीत की संभावनाओं को वे नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
वैसे एक अहम बात इमामोग्लू के पक्ष में जा सकती है. 'न्यू वेलफेयर पार्टी' ने इस्तांबुल में एकेपी का समर्थन करने के बजाय अपना उम्मीदवार खड़ा करने का फ़ैसला लिया है.
इस्तांबुल में जीतने के लिए इमामोग्लू और कुरुम को न केवल अपने वफादार समर्थकों का वोट चाहिए, दूसरी पार्टियों के वोटरों का भी साथ ज़रूरी है.
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