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सऊदी अरब क्या अब भी इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य करेगा?
- Author, डेविड ग्रिटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ब्रिटेन में सऊदी अरब के राजदूत प्रिंस ख़ालिद बिन बंदर ने कहा है कि उनका देश ग़ज़ा युद्ध के बाद इसराइल के साथ संबंध स्थापित करने में रुचि रखता है, लेकिन कोई भी संभावित समझौता फ़लस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के मद्देनज़र होना चाहिए.
प्रिंस ख़ालिद बिन बंदर ने बीबीसी से कहा कि 7 अक्तूबर को इसराइल पर हमास के हमले से पहले उनका देश अमेरिका के नेतृत्व में हो रहे समझौते के 'क़रीब' था. हालांकि यह बातचीत हमले के बाद ठप्प पड़ गई.
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ग़ज़ा में मारे गए लोगों के 'दुखद' आंकड़ों के बावजूद इसराइल के साथ संबंध बनाने में विश्वास रखता है, लेकिन यह 'फ़लस्तीनी लोगों की क़ीमत पर नहीं होगा.'
सऊदी राजदूत ने ग़ज़ा के मुद्दे पर 'मानवता के नाकाम' होने को लेकर भी चेताया. उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जंग रोकने के लिए काफ़ी कुछ नहीं किया है.
उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर ब्रिटेन की स्थिति को 'उदारवादी' देखना चाहते हैं और चाहते हैं कि ब्रिटेन 'इसराइल के साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा वह अन्य देशों के साथ करता है.'
'इसराइल को लेकर आंखें मूंद लीं पश्चिमी देशों ने'
उन्होंने कहा, "इसराइल को लेकर आंखें मूंद लेना असल समस्या है क्योंकि ये शांति के लिए आंखें मूंदने जैसा है."
सऊदी अरब इस्लामी दुनिया और अरब का नेता है. 1948 में अपनी स्थापना के बाद से सऊदी अरब ने कभी भी इसराइल के अस्तित्व को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है.
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधों को सामान्य बनाने का समझौता इसराइल और पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी.
सितंबर के अंत में, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने एक अमेरिकी टेलीविज़न को दिए इंटरव्यू में ये घोषणा की थी कि "हर दिन हम (सऊदी अरब) इस समझौते के करीब पहुंच रहे हैं."
हालांकि, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि फ़लस्तीनी मुद्दा 'बहुत महत्वपूर्ण' है और कोई भी समझौता 'फ़लस्तीनियों के लिए ज़िंदगी आसान बना देगा.'
उन्होंने यह घोषणा नहीं की थी कि यह समझौता एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की दिशा में प्रगति पर निर्भर करेगा.
फ़लस्तीन के नेता क्या सोचते हैं?
इस मुद्दे पर फ़लस्तीनी नेताओं का सार्वजनिक रुख़ यह है कि अगर फ़लस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में नहीं माना गया तो वे समझौते को सिरे से ख़ारिज कर देंगे, लेकिन इस महीने की शुरुआत में अधिकारियों ने बताया था कि अमेरिका समर्थित सऊदी-इसराइल वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए वो पैसा और इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में ज़मीन पर अधिक नियंत्रण मांग रहे हैं.
सऊदी अरब के अधिकारियों ने कथित तौर पर 7 अक्टूबर के हमलों के कुछ दिनों बाद अमेरिका से त्रिपक्षीय वार्ता रोकने के लिए कहा था. यह हमला दक्षिणी इसराइल में हमास के लड़ाकों ने किया था, जिसमें 1,300 लोग मारे गए थे और 240 लोगों को बंधक बना लिया गया था.
वहीं, ग़ज़ा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इसराइल के ग़ज़ा पर हमले के बाद से 23,200 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाक़ात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पत्रकारों से कहा है कि उन्होंने सऊदी प्रिंस से इसराइल के साथ संबंध स्थापित करने को लेकर चर्चा की है.
उन्होंने कहा, "यहां (सऊदी अरब में) इसे आगे बढ़ाने में स्पष्ट रुचि है, लेकिन इसके लिए ग़ज़ा में संघर्ष को समाप्त करने की आवश्यकता होगी, और इसमें स्पष्ट रूप से यह भी आवश्यक होगा कि फ़लस्तीनी राष्ट्र के लिए एक व्यावहारिक मार्ग हो."
मंगलवार को बीबीसी के टुडे कार्यक्रम में एक इंटरव्यू में, लंदन में सऊदी राजदूत ने पुष्टि की कि उनके देश के नेताओं के बीच समझौते को लेकर 'रुचि' थी.
प्रिंस ख़ालिद ने कहा, "(सौदा) क़रीब था, इसमें कोई संदेह नहीं है. हमारे लिए, आख़िरी पॉइंट निश्चित रूप से फ़लस्तीन के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं था. इसलिए हम अभी भी रिश्ते सामान्य बनाने में विश्वास रखते हैं, लेकिन यह फ़लस्तीनी लोगों की क़ीमत पर नहीं होगा."
उन्होंने कहा, "हम संबंधों को सामान्य बनाने के बहुत क़रीब थे, इसलिए हम एक फ़लस्तीनी राष्ट्र के क़रीब थे. ये (संबंध सामान्य) एक दूसरे के बिना हो ही नहीं सकता. यह किस तरह से किया जाएगा, इस पर चर्चा की गई थी."
हमास का क्या होगा?
जब उनसे पूछा गया कि क्या वो हमास को भविष्य के फ़लस्तीनी राष्ट्र के हिस्से के रूप में देखते हैं? तब उन्होंने इसके जवाब में कहा कि "इस पर काफ़ी विचार करने की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, "अगर आपके पास आशा और सकारात्मक सोच है, तो बदलाव की गुंजाइश हमेशा रहती है. लेकिन जब कोई संघर्ष होता है, तो सबसे पहले आपको यह स्वीकार करना होगा कि दोनों पक्ष हार गए हैं."
"आज इसराइल की मौजूदा सरकार के साथ हमारी समस्या यह है कि वहां अतिवादी और अधिनायकवादी दृष्टिकोण है जो समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और इसलिए आपके साथ संघर्ष कभी ख़त्म नहीं होगा."
उन्होंने विस्तार से नहीं बताया, लेकिन हाल ही में दो धुर दक्षिणपंथी इसराइली मंत्रियों ने फ़लस्तीनियों से ग़ज़ा के बाहर बसने को कहा था, जिसकी अमेरिका ने निंदा की थी.
प्रिंस ख़ालिद ने यह भी चेतावनी दी कि युद्ध के नतीजे के मद्देनज़र कट्टरपंथ का भी ख़तरा है, क्योंकि युद्ध ने ग़ज़ा में न केवल हज़ारों नागरिकों की जान ले ली है, बल्कि व्यापक विनाश और गहरा मानवीय संकट भी पैदा किया है.
उन्होंने कहा, "पिछले तीन महीनों से, दोनों पक्षों की ओर से हिंसा हुई है, ख़ासतौर पर इसराइल के ज़रिए, जिसे एक ज़िम्मेदार राष्ट्र होना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी ऐसा कुछ देखा है. मारे गए लोगों की संख्या बहुत दुखद है."
"ये जो हो रहा है उससे न केवल फ़लस्तीनी लोगों में बल्कि (दुनियाभर में) अप्रभावित लोगों में भी निराशा पैदा होगी. जो कुछ हो रहा है उसमें हम मानवता की विफलता देख रहे हैं क्योंकि किसी ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया है. जो भी प्रयास किए जा रहे हैं वो पर्याप्त नहीं हैं."
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