श्रद्धा मर्डर केस: आफ़ताब का कमरा देखने वालों का लगा तांता, क्राइम सीन का हाल और पड़ोसियों का डर- ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दो मंज़िला घर की पहली मंज़िल पर बना एक फ़्लैट जिसके दरवाज़े पर ताला जड़ा है.
दरवाज़े के दाईं तरफ़ एक बड़ी-सी खिड़की खुली है और आते-जाते लोग खिड़की से अंदर झांक रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं, खिड़की के पास रखी टेबल पर पड़ी चीज़ों को हाथ में उठाकर उलट-पलट कर देख रहे हैं.
ये किसी भी सामान्य फ़्लैट का हाल लगता है जो ख़ाली पड़ा है.
लेकिन ये फ़्लैट गवाह है उस क्रूरतम हत्याकांड का जिसकी चर्चा इन दिनों पूरे देश में है और जिसकी छानबीन मुंबई से लेकर दिल्ली तक चल रही है.
घटना दिल्ली के छतरपुर पहाड़ी इलाक़े की है जो मेहरौली थाने के अंतर्गत आता है.
यहाँ रहने वाले आफ़ताब पूनावाला पर अपनी प्रेमिका श्रद्धा वालकर की हत्या और उसके कई टुकड़े करके सूबत मिटाने के लिए उन्हें मेहरौली के जंगल में फेंकने का आरोप है.
पुलिस के मुताबिक़ आफ़ताब ने 18 मई को अपने फ्लैट पर ही श्रद्धा की हत्या की और शव के टुकड़े करके उन्हें कई दिनों तक फ्रिज में रखा.
उसने शव के टुकड़ों को सड़ने और बदबू से बचाने के लिए एक नया फ्रिज़ भी ख़रीदा और फिर कई महीनों तक उन टुकड़ों को फेंकता रहा.
लेकिन जब हमने छतरपुर पहाड़ी इलाक़े की गली नंबर एक में क़दम रखा तो दूर से ही मीडिया का जमावड़ा दिख गया. वहां खेल रहे बच्चों ने इशारा कर बता दिया कि वही वाला घर है.
क्राइम सीन होने के नाते ज़हन में थे कि मामला बड़ा है तो पुलिस की सख़्ती होगी. वहाँ पुलिसकर्मी, घर की तालाबंदी और बैरिकेडिंग होगी.
मन में ये सवाल भी था कि आख़िर फ़्लैट के कितना नज़दीक पहुँच पाऊंगी.
लेकिन, आफ़ताब का वो फ़्लैट खुला पड़ा था. मीडियाकर्मी ऊपर-नीचे जा रहे थे, कमरे के बाहर से रिपोर्ट कर रहे थे, खिड़की से कुछ सामान भी हाथ लगाकर देख रहे थे.

उस कमरे के अंदर एक टेबल पर अरोमा के लिए एक बाउल और रंगों का डिब्बा था. ज़मीन पर एक गद्दा पड़ा था. अंदर की तरफ़ एक और कमरा दिखा, लेकिन वहाँ सब कुछ बिखरा हुआ था.
थोड़ी देर बाद वहाँ गली में रहने वाले कुछ लोग आ गए. अब कोई वीडियो बना रहा था तो कोई खिड़की पकड़ अंदर झाँककर सब कुछ देख लेना चाहता था.
कमरे के बाहर बहुत कचरा पड़ा था. शायद छानबीन के दौरान कुछ काग़ज़, सामान के कवर और थर्मोकोल बाहर फेंके गए थे. उनके ऊपर से जाने कितने लोग गुज़र चुके थे.
खिड़की की सलाखों, बाहर लगे पर्दे, दरवाज़े, कुंडियों, जीने की रेलिंग आदि लोगों की पहुँच से दूर नहीं थी.
क्राइम सीन एक ऐसी अहम जगह होती हैजो बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाती है. उस जगह की बारीकियाँ कई अहम सुराग देती हैं जो आख़िर में अपराधी को सज़ा दिलाने में मददगार साबित होती हैं.
श्रद्धा मामले में क्राइम सीन के बारे में सोचें तो लगता है कि उसके नज़दीक भी जाने की इज़ाजत नहीं होगी क्योंकि लोगों की चहलकदमी वहाँ उन बारीकियों को मिटा देगी. हालाँकि, वहाँ नज़ारा कुछ अलग था.
पुलिस मौक़े से सबूत लेकर गई है. जिस फ्रिज में शव के टुकड़े रखने की बात सामने आ रही है वो पुलिस ने जब्त कर लिया है. कमरे में उथल-पुथल नज़र आती है.
इस बीच मामले की जाँच जारी है और पुलिस का कहना है कि वो शव के टुकड़े ढूंढने समेत कमरे में मिले सबूतों की जाँच कर रही है.
शव के कुछ टुकड़े मिले हैं, लेकिन पहचान स्थापित करने के लिए और तलाशी चल रही है.

मीडिया से बचते पर आफ़ताब पर चर्चा करते लोग
इस बीच इलाक़े के लोगों की बातों में दिनभर यही मामला छाया हुआ है. कोई सकते में है तो किसी की बातों में डर दिखाई दे रहा है.
मीडिया के सामने अधिकतर लोगों ने चुप्पी साध ली है. कोई कहता कि 'हम घर से निकलते ही नहीं', कोई कहता कि 'नौकरी पर थे तो किसी ने कहा कि हम थोड़ी दूर रहते हैं'.
ये घर एक पतली सी गली में है. ये सघन इलाक़ा है जहाँ घर एक-दूसरे से जुड़े हैं. लेकिन इस इलाक़े में किराएदार भी बहुत हैं और ज़्यादातर नौकरीपेशा हैं.
कई लोग ख़ुद भी उसी घर में रहते हैं जहाँ किराएदार हैं. लेकिन, कुछ घर ऐसे हैं जिन्हें किराए पर देकर मकान मालिक कहीं और रह रहे हैं.
आफ़ताब जिस घर में रह रहा था, वहाँ ग्राउंड फ्लोर और पहली मंज़िल का मकान मालिक एक ही है और दूसरी मंज़िल किसी और की है.

पड़ोस की ही एक महिला ने बताया कि आफ़ताब से पहले भी यहाँ दो-तीन किराएदार आ चुके हैं.
आफ़ताब भी उन्हीं की तरह था और चुपचाप रह रहा था. उन्हें तो पुलिस के आने पर मामले की जानकारी मिली है.
सामने के घर में रहने वालीं कुसुमलता बताती हैं, ''पहली बार यहाँ 25 से 30 पुलिसवाले आए थे. इसे देखकर गली के लोग इकट्ठा हो गए. तब हमें पता चला कि एक लड़की ग़ायब है. पुलिस अगले दिन आफ़ताब को लेकर फिर से आई. तीसरे दिन पुलिस यहाँ से फ्रिज उठाकर लेकर गई है. उससे पहले तो वो कभी-कभी नीचे खाना और ऑर्डर लेने आता था. लड़की को तो हमने यहाँ देखा भी नहीं था.''
वहीं, जमावड़ा बनाकर खड़े लोगों में से एक लड़की ने कहा कि जिसे प्यार करता था उसी को कैसे मार दिया.
दूसरी लड़की ने कहा कि वो तो बात करते हुए बहुत शरीफ़ लगता था. कभी आते-जाते बात करते सुना है, बहुत अच्छे से बोलता था.

बाहरियों को लेकर चर्चा
लोगों की बातों में किराए पर रहने वालों को लेकर थोड़ा अविश्वास भी दिख रहा है. लोगों को लंबे समय से रहने वालों की जानकारी तो है लेकिन किराएदारों के बारे में बहुत कम जानते हैं.
कुछ मकान छोड़कर रहने वाली जोगिंदर कौर कहती हैं, ''हमारी गली में कभी ऐसा कांड नहीं हुआ. पुलिस के आने पर पता चला कि लड़की को काटकर रखा था. पार्टी चलती थी. गुब्बारे लगे होते थे. डेक बजने की आवाज़ें आती थीं. लेकिन हमने ज़्यादा गौर नहीं किया. हमें कोई बदबू भी नहीं आई.''
''डर सा हो गया है. कभी हुआ नहीं ऐसे. बाहर से आकर जो किराएदार रहते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए. अब पुलिस आ रही है, मीडिया वाले रोज़ आ रहे हैं.''
वहीं, आफ़ताब के फ़्लैट के ऊपर और नीचे रहने वालों ने चुप्पी साध ली है. वो कुछ भी जानकारी होने से इनकार करते हैं.
ऊपर के फ्लैट में रहने वाली एक महिला ने मुंह ढँककर, खिड़की से सिर्फ़ इतनी ही बात की कि 'हम यहाँ जून में आए हैं तो हमने कुछ खास पता नहीं है. सिर्फ़ आफ़ताब को कभी-कभी रेलिंग पर खड़ा देखा था.'

कैसे सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, श्रद्धा वालकर और आफ़ताब आमीन पूनावाला एक डेटिंग ऐप के ज़रिए मिले थे.
दोनों मुंबई के रहने वाले थे और 2019 से लिव इन रिश्ते में रह रहे थे. लेकिन बाद में उनकी बार-बार लड़ाइयाँ होने लगीं. इसके बाद दोनों नौकरी छोड़कर मई में दिल्ली रहने आ गए.
पुलिस के मुताबिक़, यहाँ आफ़ताब ने छतरपुर पहाड़ी इलाक़े में एक फ़्लैट नौ से दस हज़ार रुपए में किराए पर लिया. यहाँ कुछ दिनों तक श्रद्धा भी रहने आई थी.
श्रद्धा के लापता होने का पता उनके एक दोस्त के ज़रिए लगा.
पुलिस के मुताबिक, ''श्रद्धा के पिता विकास वालकर ने बताया कि 14 सितंबर को उनके बेटे को श्रद्धा के दोस्त से पता चला कि उनकी ढाई महीने से श्रद्धा से बात नहीं हुई है और फ़ोन स्विच ऑफ़ आ रहा है.”
इसके बाद पिता ने मुंबई में माणिकपुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.
वहाँ जाँच में आफ़ताब और श्रद्धा के दिल्ली के महरौली में रहने की बात सामने आई. फिर ये मामला दिल्ली में महरौली पुलिस तक पहुँचा.
यहाँ फ़ोन की लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और लोगों से बातचीत के आधार पर आफ़ताब के बारे में पता चला.

आफ़ताब ने मुंबई पुलिस को क्या बताया
पुलिस का कहना है कि जब उन्होंने आफ़ताब को पकड़कर पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया.
मुंबई से बीबीसी संवाददाता दीपाली जगताप को पुलिस ने बताया कि आफ़ताब को दो बार मुंबई में भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था.
आफ़ताब ने पुलिस को बताया था कि श्रद्धा झगड़े के बाद फ्लैट से चली गई थीं.
2018 में श्रद्धा मुंबई के मलाड में कॉल सेंटर में नौकरी करती थीं. श्रद्धा अपनी मां के साथ मुंबई के वसई में रहती थीं और उनके पिता अलग रहते थे.
उसी दौरान वो डेटिंग ऐप से आफ़ताब से मिलीं और फिर अपने घर लेकर आई थीं. लेकिन, घरवालों ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया.
2019 में श्रद्धा आफ़ताब के साथ रहने लगी थीं. उनकी मां की साल 2020 में मौत हो गई थी.
इसके बाद श्रद्धा आफ़ताब के साथ रहने लगी थीं. उनकी लंबे समय से अपने पिता से बात नहीं हुई थी.

इमेज स्रोत, ANI
पुलिस ने और क्या बताया
- एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में एक ही अभियुक्त और पीड़ित है. किसी और के शामिल होने की बात सामने नहीं आई है. लेकिन ये पहलू भी देखा जा रहा है.
- पुलिस का कहना है कि वो हर कोण से केस को सॉल्व करने की कोशिश कर रही है.
- शव के टुकड़ों को पहले एम्स और फिर फ़ॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा. टुकड़े श्रद्धा के ही हैं ये स्थापित करना ज़रूरी है.
- कुछ बीजेपी ने नेताओं ने इस मामले को कथित 'लव जिहाद' से जुड़ा बताया है. पुलिस अधिकारी का कहना है कि लव जिहाद सहित कई एंगल्स पर जाँच हो रही है.
- आफ़ताब की मानसिक स्थिति पर अभी कुछ सामने नहीं आया है.
- डेटिंग ऐप बंबल ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को हर तरह की मदद करने की बात कही है. ऐप के प्रवक्ता ने कहा कि वो अपने सदस्यों की सुरक्षा चाहते हैं और मामले पर नज़र रख रहे हैं. पुलिस आफ़ताब और उनसे ऑनलाइन मिली अन्य महिलाओं की जानकारी चाहती है.
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