उत्तरकाशी: शिकायतकर्ता ने कहा, सामान्य अपराध को ‘लव जिहाद’ का मामला बना दिया गया - प्रेस रिव्यू

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लगातार दो सप्ताह से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति झेल रहे उत्तराखंड के उत्तरकाशी के पुरोला में जिस मामले के कारण तनाव पैदा हुआ वो तथाकथित 'लव जिहाद' का मामला नहीं था बल्कि एक सामान्य अपराध का मामला था.
पुरोला में एक नाबालिग़ हिंदू लड़की को अगवा किए जाने की कोशिश के आरोप में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद कुछ दक्षिणपंथी हिंदू समूहों ने वहां रह रहे मुसलमानों को इलाक़ा छोड़कर जाने की धमकी दी थी, जिसके बाद वहां तनाव फैल गया.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार लड़की को अगवा किए जाने के मामले में उसके एक रिश्तेदार (जो पेशे से सरकारी स्कूल टीचर हैं) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.
अख़बार ने नाबालिग़ लड़की की पहचान छिपाने के लिए व्यक्ति की पहचान नहीं बताई है. अख़बार लिखता है कि ये व्यक्ति बीते दो सप्ताह से घर से बाहर नहीं निकले हैं और उन्होंने अपना फ़ोन नंबर बदल दिया है.
वो कहते हैं, "शुरुआत से ही इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही थी. दक्षिणपंथी समूहों के कार्यकर्ताओं ने हमारी तरफ से खुद से एक शिकायत भी लिखकर तैयार की थी, लेकिन पुलिस ने वो शिकायत दर्ज नहीं की. ये कभी भी लव जाहिद का मामला नहीं था बल्कि ये एक सामान्य अपराध था."
उन्होंने कहा, "मुझे दुख है कि इस मामले का इस्तेमाल मुसलमानों को यहां से बाहर निकालने के लिए किया गया. मैं मुसलमानों को अपना समर्थन देना चाहता हूं लेकिन मुझे डर है कि मौजूदा माहौल में मुझे ग़लत समझा जाएगा."
"जब मैं फेसबुक खोलता हूं तो वहां पर इस घटना से जुड़े वीडियो में देखता हूं लोग इसे लव जिहाद का मामला बता रहे हैं. मुझे दुख है कि मुझसे किसी ने पूछा ही नहीं कि असली कहानी क्या है."
ये मामला मई 26 तारीख की दोपहर का है जब दो युवकों (उमेद ख़ान और जितेंद्र सैनी) ने कथित तौर पर एक लड़की को जबरन ऑटो रिक्शा में भरकर उसे अगवा करने की कोशिश की.
दक्षिणपंथी हिंदू समूहों ने इसे लव जिहाद का मामला बताया. बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने अख़बार को बताया, "ये स्पष्ट तौर पर लव जिहाद का मामला था. एक आरोपी ने खुद को हिंदू बताया था यहां तक कि उसका सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल भी एक हिंदू लड़के के नाम से है. हमारा मकसद केवल हमारी बहू-बेटियों को बचाना है."
इस घटना के बाद पुरोला और आसपास के इलाक़ों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए और इलाक़े में पोस्टर लगाकर उन्हें इलाक़े से बाहर चले जाने को कहा.

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कुछ मुसलमानों ने दुकानें खोलीं
अख़बार लिखता है कि इस घटना में नाबालिग़ से छेड़छाड़ करने और अगवा करने की कोशिश के अलावा पॉक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया.
लेकिन मई 29 से इसे उस वक्त सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हुई जब कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने धर्म परिवर्तन के ख़ालिफ़ विरोध प्रदर्शन किया और इस दौरान मुसलमानों की लगभग दो दर्जन दुकानों में तोड़फोड़ की गई.
चार दिन बाद एक और विरोध प्रदर्शन आयाजित किया गया, जिस दौरान 25 और दुकानों में तोड़फोड़ हुई. कुछ दुकानों के सामने क्रॉस (X) भी बनाया गया.
इसके बाद धमकी भरे पोस्टर इलाक़े में नज़र आने लगे जिनमें मुसलमानों से कहा गया कि वो जून 15 को होने वाली महापंचायत से पहले घर और दुकान छोड़कर चले जाएं. इस मामले में पुलिस ने शिकायत तो दर्ज की है लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
वहीं इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार क़रीब 20 दिनों के बाद शनिवार को पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुरोला में मुसलमान व्यापारियों ने अपन दुकानें खोलीं.
एक व्यक्ति ने अख़बार को बताया कि पहले दिन व्यापार सामान्य रहा है. और दुकानदारों के साथ-साथ क़रीब 6-7 मुसलमान जो इलाक़ा छोड़कर नहीं गए उन्होंने अपनी दुकानें खोलीं.
अख़बार लिखता है कि बीते दो सप्ताह में जो कुछ हुआ उसके कारण 10 से अधिक मुसलमान परिवार अपना घर छोड़ने को बाध्य हुए हैं.
पुरोला के सर्कल ऑफ़िसर सुरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा है कि यहां स्थिति सामान्य हो रही है और चीज़ें शांतिपूर्ण हैं.
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पिता ने थैले में नवजात का शव लेकर 140 किलोमीटर का सफ़र तय किया
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक पिता को अपने नवजात शिशु का शव थैले में रख कर अस्पताल से गांव तक ले जाने का मामला सामने आया है.
जनसत्ता अख़बार के पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार सुनील धुर्वे नाम के व्यक्ति का कहना है कि बच्चे का शव ले जाने के लिए अस्पताल ने शव वाहन देने से मना कर दिया जिसके बाद उन्होंने थैले में बच्चे का शव रखा और गांव के लिए निकल पड़े.
आर्थिक तंगी के चलते सुनील ने गांव तक का सफर यात्री बस से किया. उनका गांव सहजपुरी, डिंडोरी जिले में है और जबलपुर से क़रीब 140 कलोमीटर दूर है.
अख़बार लिखता है कि ये 15 जून की घटना है. सुनील कहते हैं कि उनकी पत्नी ने 13 जून को डिंडोरी जिला अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था.
बच्चा बेहद कमज़ोर पैदा हुआ था और इस कारण जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने 14 जून को उसे जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अस्पताल में रेफर कर दिया.
अस्पताल में 15 जून को इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई. सुनील कहते हैं कि बच्चे का शव डिंडोरी तक ले जाने के लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से बात की लेकिन उन्हें शव वाहन देने से मना कर दिया गया जिसके बाद वो बच्चे का शव थैले में डालकर लाने को मजबूर हो गए.
नवभारत टाइम्स ने लिखा है कि सुनील को डर था कि थैले में शव होने का पता चला तो उन्हें बस से उतार दिया जाएगा, इसलिए उन्होंने रास्ते भर आंसू नहीं बहने दिया और न ही इस बारे में किसी से चर्चा की.
सुनील रात क़रीब साढ़े दस बजे राज्य परिवन की बस से डिंडोरी पहुंचे जिसके बाद नर्मदा नदी के किनारे बच्चे के शव को दफनाया गया.

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'महिलाओं के लिए कम कपड़े मुसीबत को बुलावा'- मंत्री
तेलंगना राज्य के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली ने कहा है कि कम कपड़े पहनने वाली महिलाएं खुद मुसीबत को निमंत्रण देती हैं.
द स्टेट्समैन में छपी एक ख़बर के अनुसार हैदराबाद की एक घटना से जुड़े सवाल के उत्तर में उन्होंने ये बयान दिया.
हैदराबाद में हाल में कुछ लड़कियां जब बुर्क़ा पहनकर परीक्षा देने के लिए केवी रंगा रेड्डी डिग्री कॉलेज में पहुंची तो उन्हें परीक्षा हॉल के बाहर ही रोक दिया गया. बाद में बुर्क़ा उतारने के बाद ही उन्हें परीक्षा में बैठने की इजाज़त दी गई.
अख़बार लिखता है इस मामले से संबंधित एक सवाल के उत्तर में मंत्री ने कहा, "हमारी नीति पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से कपड़े पहन सकता है. लेकिन यूरोपीय लोगों की तरह कपड़े न पहनें, हो सकता है मामला बिगड़ जाए. हमारी हिंदू बहनों को सिर पर पल्लू रखना चाहिए. हमें अपने परिधान का सम्मान करना चाहिए. अगर आप कम कपड़े पहनेंगी तो आप मुसीबत को निमंत्रण देंगी. आप अधिक कपड़े पहनें ताकि लोग भी सामान्य हो सकें."
भारत राष्ट्र समिति के मोहम्मद महमूद अली की ये टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. कई यूज़र्स पार्टी की महिला नेताओं को टैग कर सवाल करने लगे कि वो इसके बारे में क्या सोचती हैं.
कई लोगों का कहना था कि संसद में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण की मांग करने वाली पार्टी अपने ही नेता के इस तरह के बयान को किस तरह स्वीकार कर पा रही है.
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब महमूद अली ने इस तरह के विवादित बयान दिए हैं. इससे पहले 2019 में बलात्कार का शिकार हुई एक महिला के बारे में उन्होंने कहा था टोल गेट में अगर आप फंस गई हैं तो आपको पुलिस को फोन करना चाहिए, न कि अपनी बहन को.
इससे पहले एक गैंगरेप के मामले में उन्होंने कहा कि स्मार्टफ़ोन और व्हाट्सऐप जैसे आधुनिक गैजेट युवाओं को गुमराह कर रहे हैं.

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जी20 में अफ़्रीकी संघ को भी मिले जगह- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 देशों के नेताओं से गुज़ारिश की है कि अफ्रीकी संघ को भी इस समूह में स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया जाए. इसके लिए उन्होंने जी20 देशों के नेताओं को पत्र लिखा है,.
द हिंदू ने सूत्र के हवाले से ख़बर दी है कि प्रधानमंत्री ने भारत में होने वाले जी20 देशों के अगले शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को पूर्ण सदस्यता देने का प्रस्ताव दिया है.
अख़बार लिखता है कि सूत्र के अनुसार मोदी ने वैश्विक मंच पर अफ़्रीका की आवाज़ को बुलंद करने और साझा दुनिया के भविष्य को तैयार करने के लिए ये कदम उठाया है.
मोदी ने लिखा है कि दिल्ली में सितंबर में होने वाले सम्मेलन में 55 देशों वाले अफ़्रीकी संघ को भी सदस्यता दी जाए, जैसा उन्होंने गुज़ारिश की है.
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