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हार्दिक की बजाय सूर्या को चुनकर गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं की मंशा क्या हो सकती है?
- Author, आनंद वासु
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
भारतीय क्रिकेट टीम में चीज़ें मौसम से भी तेज़ और बिना किसी ख़ास चेतावनी के बदल सकती हैं.
अभी कुछ वक़्त पहले ही हार्दिक पांड्या ने ज़ोरदार वापसी की थी.
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान उन्होंने मुंबई इंडियंस के कप्तान के तौर पर रोहित शर्मा की जगह ली थी, जिसके बाद उन्हें हर एक ग्राउंड में फैंस निशाना बना रहे थे.
मगर अमेरिका और वेस्टइंडीज में हुए टी20 वर्ल्ड कप में हार्दिक ने शानदार वापसी की और कुछ लोगों ने उन्हें वर्ल्ड कप के हीरो के तौर पर भी देखा.
इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान हार्दिक ने अहम भूमिका निभाई थी. अपनी गेंदबाज़ी और मिडिल ऑर्डर में कहीं भी बल्लेबाज़ी करने की क्षमता की वजह से वो टीम को एक ज़रूरी संतुलन दे रहे थे.
फ़ाइनल मुक़ाबले के अहम ओवरों में गेंदबाज़ी कर उन्होंने टीम की जीत में अपना योगदान दिया.
इसके बाद ज़िम्बाब्वे दौर के लिए कुछ खिलाड़ियों को आराम दिया गया था.
अब भारत ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने जा रही सिरीज़ में अपनी ''फुल स्ट्रेंथ'' टीम का एलान किया है, जिसमें कप्तानी के विकल्प के तौर पर हार्दिक पांड्या को नज़रअंदाज़ किया गया है.
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सूर्यकुमार को कप्तानी देने के मायने क्या हैं?
सूर्यकुमार यादव को टी20 इंटरनेशनल टीम का कप्तान बनाया गया है, इस कदम को थोड़ा असामान्य कदम भी माना जा सकता है.
भले ही टी20 मैचों में बड़ा स्कोर बनाने में सूर्यकुमार की क्षमता काम आती है लेकिन उनका चयन वनडे और टेस्ट के लिए नहीं हो पाता है.
हालांकि, सूर्यकुमार यादव को 50-ओवर और टेस्ट क्रिकेट में सीमित मौके दिए गए हैं लेकिन वो अपनी जगह पक्का करने के लिए कुछ ख़ास नहीं कर सके.
भारतीय टीम का इतिहास देखें तो एक ही कप्तान को तीनों फॉर्मेट की कप्तानी मिलती रही है. ये तब और स्पष्ट हो गया जब विराट कोहली ने टी20 कप्तानी छोड़ी और फिर उनसे वनडे की कप्तानी ले ली गई, बाद में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की कप्तानी से इस्तीफ़ा दे दिया.
वहीं, सूर्या की टी20 की कप्तानी कुछ और भी इशारा करती है. हार्दिक को किसी भी व्हाइट-बॉल फॉर्मेट का उप-कप्तान नहीं बनाया गया है. इसके बजाय, शुभमन गिल जो टी20 वर्ल्ड में खेल नहीं पाए थे उन्हें उप-कप्तान बनाया गया है.
ऐसे में ये साफ़ है कि बीसीसीआई मानता है कि भविष्य में गिल सभी फॉर्मेट के कप्तान बन सकते हैं.
पांड्या को नज़रअंदाज़ क्यों किया गया?
पांड्या के ख़िलाफ़ जो चीज़ गई है वो है उनकी फिटनेस से जुड़ी चिंताएं. बतौर ऑलराउंडर अपनी भूमिका निभाना पांड्या के लिए इतना आसान नहीं रहा है.
पांड्या, कभी-कभी पूरी सिरीज़ नहीं खेल पाए, फिर उन्होंने जमकर मेहनत की और वापसी की. उन्हें कभी-कभी गेंदबाज़ी भी छोड़नी पड़ी और केवल बल्लेबाज़ के तौर पर खेलना पड़ा.
रिपोर्ट्स् के मुताबिक़, नए हेड कोच गौतम गंभीर ने ख़ास तौर पर सूर्या को कप्तान बनाने का आग्रह नहीं किया था, बल्कि उन्होंने पांड्या जैसे किसी खिलाड़ी के साथ काम करने में असहजता जताई थी जो फिटनेस और चोट की वजह से टीम में अंदर-बाहर होते रहते हैं.
हार्दिक पांड्या ने श्रीलंका दौरे में वनडे से ब्रेक मांगा है, बीसीसीआई ने उनका ये आग्रह मंजूर भी किया है. लेकिन अगले वनडे इंटरनेशनल में स्थिति क्या होगी, ये कहना मुश्किल है.
क्या हार्दिक पांड्या एक ऑलराउंडर के तौर पर टीम में वापसी करेंगे?
पांड्या की क्षमता को देखकर तो ये कहा जा सकता है कि उन्हें निश्चित रूप से वापसी करनी चाहिए लेकिन ये भी साफ़ है कि भारत के पास इस वक्त पहले से कहीं अधिक ऑलराउंडर विकल्प मौजूद हैं.
शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और रियान पराग, ये सभी खिलाड़ी श्रीलंका सिरीज़ के लिए दोनों ही टीमों में हैं.
ये मुमकिन है कि इनमें से कोई शानदार प्रदर्शन करे और टीम में अपनी जगह पक्की कर ले.
आगे के लिए सोच रहे हैं चयनकर्ता और कोच
ये साफ़ है कि सूर्यकुमार यादव की बतौर कप्तान नियुक्ति कम समय के लिए है.
वो 34 साल के हैं, एक ही फॉर्मेट में इंटरनेशनल लेवल पर खेलते हैं, इसके बावजूद उनके लंबे समय तक खेलने की संभावना नहीं है.
गिल अगले संभावित कप्तान होंगे. ऋषभ पंत, जिन्हें विकेटकीपर होने का फ़ायदा मिलेगा और वो सभी फॉर्मेट के बल्लेबाज़ हैं, गिल का प्रदर्शन अगर अनुमान के मुताबिक़ नहीं होता है तो कप्तानी के लिए ऋषभ संभावित उम्मीदवार होंगे.
श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम का चयन ये भी दिखाता है कि चयनकर्ता और कोच सीमित ओवरों के क्रिकेट को नई दिशा देना चाह रहे हैं.
रोहित, कोहली और जडेजा के टी20 इंटरनेशनल से संन्यास लेने के बाद आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए दरवाज़ा खुल गया है.
इसके अलावा, एक फैक्ट ये भी है कि वनडे टीम में संजू सैमसन का चयन न होना भी दिलचस्प है.
क़रीब 30 साल की उम्र के इस खिलाड़ी में निश्चित तौर पर अब भी क्रिकेट बचा है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद से अब तक 9 साल में उन्होंने महज़ 16 वनडे और 28 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं.
टीम में जगह बनाने की प्रतियोगिता और बल्लेबाज़ी में अधिक योगदान देने वाले विकेटकीपरों की मौजूदगी का मतलब है कि उनका करियर छोटा रहा है. और अब ये दिख रहा है कि चयनकर्ता और कोच भी पीछे देखने की बजाय आगे की सोच रहे हैं.
अभिषेक शर्मा का केस भी दिलचस्प है, उन्होंने हाल ही ज़िम्बाब्वे दौरे पर शानदार शतक जड़ा था. लेकिन वो श्रीलंका सिरीज़ से बाहर हैं, लेकिन अभिषेक अभी युवा हैं और उन्हें अपने वक़्त के लिए इंतज़ार करना होगा.
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