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आईबैक्स ब्रिगेड : भारतीय सेना की वो ब्रिगेड जिसने माणा हिमस्खलन में 46 मजदूरों को जिंदा बचाया
- Author, आनंद मणि त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तराखंड के चमोली ज़िले में माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन में आठ लोगों की मौत हो गई. वहीं 46 लोगों को जीवित बचा लिया गया है. यह बचाव अभियान करीब 55 घंटे तक चला.
माणा गांव के पास 28 फ़रवरी को सुबह सवा सात बजे हुए हिमस्खलन में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का शिविर चपेट में आ गया था. इस शिविर में उस समय 54 मज़दूर रह रहे थे.
हिमस्खलन की जानकारी मिलते ही भारतीय सेना की आईबैक्स ब्रिगेड (IBEX) ने मोर्चा संभाला और सुबह आठ बजे से ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया.
भारी हिमस्खलन के बाद लगातार बर्फ़बारी के बीच भारतीय सेना की आईबैक्स ब्रिगेड ने राहत और बचाव कार्य को अंजाम दिया.
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आईबैक्स ब्रिगेड भारतीय सेना की एक विशिष्ट ब्रिगेड है. इसका नाम आईबैक्स नस्ल की पहाड़ी बकरी के नाम पर रखा गया है.
यह बकरी सीधी और बेहद नुकीली पहाड़ियों में चढ़ने में निपुण होती हैं. यह माइनस 46 डिग्री तापमान में भी सहज रहती हैं.
यह भारतीय सेना की एक माउंटेन ब्रिगेड है. यह ब्रिगेड पर्वतीय क्षेत्र में किसी भी अभियान को अंजाम देने में बहुत ही अनुभवी और सक्षम है. इन्हें किसी भी ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में अभियान को अंजाम देने में प्रशिक्षित किया गया है.
इसके जवानों की ट्रेनिंग ऐसी होती है कि नौ से 15 हजार फीट तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभियान को आसानी से अंजाम दे सकते हैं. इन्हें भारी बर्फबारी में भी कठोर ट्रेंनिंग दी जाती है.
कर्नल मनीष ओझा (सेवानिवृत्त) बताते हैं," आईबैक्स ब्रिगेड भारतीय सेना की एक विशेष पर्वतीय ब्रिगेड है. यह किसी भी दुर्गम एवं अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑपरेट करने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित है. यह हर परिस्थिति में किसी भी सैन्य अभियान को पूरा करने में दक्ष है."
आईबैक्स बिग्रेड उत्तराखंड के गढ़वाल की चीन से सटी सीमा की ज़़िम्मेदारी संभालती है. यह बिग्रेड अत्यंत ही ऊंचाई वाले अभियानों को अंजाम देने में निपुण और प्रशिक्षित है.
भारतीय सेना के उत्तराखंड प्रवक्ता कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने कहा,"भारतीय सेना के हर जवान को इस तरह की स्थिति से लड़ने के लिए और ऐसे अभियान को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है."
माणा गांव के पास हिमस्खलन की जानकारी मिलते ही भारतीय सेना ने त्वरित कार्रवाई की. एक यूनिट वहां तैनात थी और दूसरी यूनिट के सैनिकों ने मिलकर करीब 170 भारतीय सैनिकों ने घटना के आधे घंटे भीतर ही मोर्चा संभाल लिया.
भारतीय वायु सेना के समन्वय और जिला प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के सहयोग से राहत व बचाव कार्य को तेजी से अंजाम दिया गया.
कर्नल मनीष श्रीवास्तव बताया है कि 15 किलोमीटर तक पूरी तरह से रास्ता बंद था. ऐसे में हेलीकॉप्टर के माध्यम से बचाव अभियान को पूरा किया गया.
हिमस्खलन के बाद बारिश और बर्फ़बारी के बीच चल रहे राहत एवं बचाव कार्य के बीच आईबैक्स बिग्रेड को पांच चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
मौसम : हिमस्खलन के बाद मौसम काफी खराब है. तेज हवाओं के बीच बारिश के साथ बर्फबारी भी हो रही है. इसके कारण शिविर के लोगों की तलाश करने में काफी कठिनाई आई.
विजिबिलिटी : माणा गांव से जोशीमठ आने का प्रारंभिक 15 किलोमीटर का रास्ता बंद है. मौसम खराब होने के कारण विजिबिलिटी कम हो रही है. इसके कारण हेलीकॉप्टर की उड़ान में अड़चन रही.
हाइपोथर्मिया : बर्फबारी की चपेट में आए मजदूरों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह रही कि इतने लंबे समय तक बर्फ में दबने के कारण उनके साथ हाइपोथर्मिया की स्थिति बन गई.
हाइपोथर्मिया एक मेडिकल इमरजेंसी है. इसमें शरीर का तापमान 35° सेल्सियस से कम होता है और इसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है. शरीर के गई अंग काम करना बंद कर देते हैं. दिल की धड़कन अनियमित होने लगती है.
रिसोर्स : हिमस्खलन के कारण रास्ता बंद हो गया और इसके बाद बचाव कार्य को तेजी से अंजाम देने के लिए जरूरी रिसोर्स कम साबित हुए.
कनेक्टिविटी: हिमस्खलन के बाद बारिश और बर्फबारी के बीच संचार के साधन बड़ी चुनौती बन गए. संचार सही न होने के कारण घटनास्थल और बेस के बीच समन्वय की कठिनाई भी बड़ी चुनौती रही.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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