जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ-साथ, अमित शाह ने पूछे ये सवाल

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए

गुरुवार शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा, “ख़ुदा चाहेगा तो हमारा कांग्रेस के साथ गठबंधन अच्छे से चलेगा. हम सही ट्रैक पर हैं.”

कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के बीच इस चुनाव पूर्व गठबंधन का एलान विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान किया गया.

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला और पूर्व मख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से उनके श्रीनगर स्थित गुपकार निवास पर बैठक की.

इसी बैठक के बाद डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि जम्मू -कश्मीर की सभी 90 सीटों पर 'चुनाव पूर्व गठबंधन' हुआ है.

फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी ) भी इस गठबंधन में शामिल है.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता यूसुफ़ तारिगामी ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि हम भारी बहुमत से चुनाव जीतकर आम लोगों का जीवन आसान बनाएंगे."

तारिगामी ने बीबीसी को बताया, “जम्मू-कश्मीर के लोगों ने 2019 से जिन हालात का सामना किया है उसकी कहीं और कोई मिसाल नहीं है. आज जम्मू के लोग भी काफ़ी परेशान हैं. वादा किया गया था कि स्टेटहुड को वापस किया जायेगा , लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया. परिसीमन का प्रोसेस पूरा करने के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए. जनता समझती है कि लोकतंत्र पर एक हमला हुआ है. इसलिए ये कोशिश रहनी चाहिए कि एक सेक्युलर सरकार बने और लोग भी ऐसा ही चाहते हैं."

जम्मू -कश्मीर में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 01 अक्टूबर को तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे.

क्या कह रही है बीजेपी?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के गठबंध पर प्रतिक्रिया दी और आरक्षण के मामले पर घेरा.

उन्होंने ट्वीट किया, "मोदी सरकार ने आर्टिकल 370 और 35ए हटाने के बाद वर्षों से दलितों, आदिवासियों, पहाड़ियों और पिछड़ों के साथ हो रहे भेदभाव को ख़त्म करने उन्हें आरक्षण देने का काम किया. क्या राहुल गांधी जेकेएनसी के घोषणापत्र में उल्लेखित दलितों, गुज्जर, बकरवाल और पहाड़ियों के आरक्षण को समाप्त करने वाले आरक्षण विरोधी प्रस्ताव का समर्थन करते हैं?"

"नेशनल कॉन्फ़्रेंस के साथ गठबंधन करने के बाद कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को देश के सामने अपनी आरक्षण नीति को स्पष्ट करना चाहिए."

वहीं, जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस चुनाव पूर्व गठबंधन से उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

पार्टी के नेता डॉक्टर रफ़ी किदवई कहते हैं, “हमारी पार्टी ऐसे गठबंधन से डरने वाली नहीं है और ना ही हमें इसके कारण चुनाव में कोई परेशानी आएगी. बीते सालों में भारतीय जनता पार्टी ने हर चुनौती का मुक़ाबला किया है, उसी तरह आज भी उसका मुक़ाबला करने के लिए तैयार है. पहले भी इन सियासी दलों ने गठबंधन किया है और उसका नतीजा हम देख चुके हैं.”

गठबंधन के क्या हैं मायने?

कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक तारिक़ भट्ट ने बीबीसी से कहा, “नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस बार कांग्रेस के साथ जो गठबंधन किया है, वो एक सोचा समझा क़दम है. इस गठबंधन से ये भी हो सकता है कि जम्मू में जो मुस्लिम वोट हैं, अब उसके बंटने की आशंका कम हो सकती है. दूसरी बात ये है कि जम्मू-कश्मीर में इस गठबंधन से बीजेपी की चिंताएं और चुनौतियां बढ़ गई हैं. जम्मू -कश्मीर, ख़ासकर कश्मीर घाटी में इस गठबंधन से लोगों में ये भी संदेश गया है कि भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ दो बड़े सियासी दल खड़े हो गए हैं."

हलांकि तारिक़ भट्ट ये भी कहते हैं कि इस गठबंधन की राह में भी आगे मुश्किलें पेश आ सकती हैं और सबसे अधिक दिक़्क़त सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करने में हो सकती है.

जहां कश्मीर घाटी में नेशनल कॉन्फ्रेंस का क़िला मज़बूत माना जाता है तो वहीं कांग्रेस को जम्मू क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी.

जम्मू क्षेत्र में क़रीब 11 ऐसी सीटें हैं जहां मुस्लिम वोट अहम भूमिका निभा सकता है.

राजनीतिक विश्लेषक ताहिर मोउनुद्दीन कहते हैं कि अटकलें लगाई जा रही थीं कि बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन हो सकता है. लेकिन गुरुवार को हुए घटनाक्रम से इन अटकलों को विराम लगा है.

लेकिन वो ये भी कहते हैं कि ये गठबंधन चुनाव जीतने की गारंटी कतई नहीं है क्योंकि पीडीपी और बीजेपी से इस गठबंधन को कड़ी चुनौती मिल सकती है.

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं आए साथ

तारिक भट्ट कहते हैं कि पीडीपी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस एक दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं इस वजह से इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में दोनों ने गठबंधन नहीं किया.

वो कहते हैं, “आर्टिकल 370 हटने के बाद पीडीपी एक बड़े संकट से गुज़र रही है. इस पार्टी के कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर चले गए हैं. तो इस माहौल में नेशनल कॉन्फ्रेंस उनसे गठबंधन करके अपने लिए क्यों सियासी ख़तरा मोल लेगी.”

वहीं यूसुफ़ तारिगामी कहते हैं, “आप को पता है कि अभी जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो उस चुनाव में भी पीडीपी ने आपसी मतभेद के कारण अलग चुनाव लड़ा."

बीजेपी ने जब पीडीपी से किया था गठबंधन

2014 के विधानसभा चुनाव होने के बाद पीडीपी और बीजेपी ने गठबंधन सरकार बनाई थी.

ये गठबंधन सरकार 2018 में आपसी मतभेदों के कारण उस वक्त गिर गई जब बीजेपी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया था.

2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी को सबसे ज़्यादा 28 सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी, 25 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी.

उसके बाद से राज्य में विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं.

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लोकसभा चुनाव 2024

जब साल 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया था तब इसके विरोध में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस क्षेत्र के कई स्थानीय दलों के साथ मिलकर सामने आए थे और जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिलाने के लिए साथ मिलकर मुहिम छेड़ी थी.

लेकिन इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मतभेद खुलकर सामने आए थे. दोनों ही पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन से परहेज़ किया था.

चुनाव में पीडीपी एक भी सीट जीत नहीं पाई. यहां तक कि पीडीपी का गढ़ समझे जाने वाले दक्षिण कश्मीर से खुद पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती चुनाव हार गई थीं.

वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी चुनाव हार गए थे.

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हुआ था ख़त्म

पांच अगस्त 2019 को जम्मू -कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद से ही इस केंद्र शासित प्रदेश के सियासी दल स्टेटहुड का दर्जा वापस देने की मांग कर रहे हैं.

2019 में विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद जम्मू -कश्मीर में एक लंबे समय तक कर्फ्यू और प्रतिबंध लगाए गए थे और इंटरनेट को भी बंद किया गया था.

सरकार ने हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया था जिन में सियासी नेता भी शामिल थे.

सरकार के इस फैसले के ख़िलाफ़ कई सियासी दलों ने याचिकाएं दायर कर इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

हालाँकि, दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए जम्मू -कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले को बरक़रार रखा था.

इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 तक जम्मू -कश्मीर में चुनाव कराने के लिए क़दम उठाने को कहा था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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