नेपाल में ऐसा क्या हुआ जो राजशाही के लिए सड़कों पर उतर आए लोग

नेपाल में शुक्रवार को राजशाही समर्थकों ने एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था. इस दौरान काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की.

पुलिस और प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प में एक पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं.

यह प्रदर्शन राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने आयोजित किया था जिसे नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का समर्थन प्राप्त है और यह पार्टी देश में राजशाही स्थापित करने की मांग कर रही है.

बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार, काठमांडू पुलिस ने आरपीपी के महासचिव और सांसद धवल शमशेर राणा और पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवींद्र मिश्र समेत पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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नेपाली पुलिस के डीआईजी दिनेश आचार्य ने बताया कि राजशाही समर्थक प्रदर्शन में संलिप्तता के लिए इन्हें गिरफ़्तार किया गया. प्रदर्शन के दौरान काठमांडू के तिनकुने में भारी हिंसा हुई थी.

सरकार ने राजशाही समर्थक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा की है.

बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार, शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट और मौत की जांच कराने का फ़ैसला लिया गया.

नेपाली सरकार के प्रवक्ता पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने बताया कि प्रधानमंत्री के आवास पर हुई इस बैठक में घायलों को मुफ़्त इलाज मुहैया कराने पर भी निर्णय लिया गया.

काठमांडू में कुछ जगहों पर शनिवार सुबह तक कर्फ़्यू लगा दिया गया था.

पुलिस ने बताया है कि शनिवार सुबह से काठमांडू घाटी में स्थिति सामान्य है.

अब कैसे हैं हालात

बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार, पुलिस ने कहा है कि शनिवार सुबह तक काठमांडू में हालात सामान्य हो रहे हैं.

सहायक मुख्य ज़िला अधिकारी ने बीबीसी नेपाली सेवा से कहा कि शनिवार सुबह से कर्फ़्यू को भी स्थगित कर दिया गया है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं कि सुरक्षा से कोई समझौता किया जाएगा. यह एक सचेत निर्णय है.

शुक्रवार की हिंसा में हुए नुकसान का प्रशासन आंकलन कर रहा है.

पुलिस के अनुसार, शुक्रवार के विरोध प्रदर्शन के दौरान 53 पुलिसकर्मी और 24 सशस्त्र बल के सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं.

नेपाली पुलिस का कहना है कि 'प्रदर्शनकारियों ने आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की.'

हालांकि राजशाही को फिर से लाने के समर्थकों की ओर से गठित संयुक्त जन आंदोलन समिति ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर अधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए.

समिति के संयोजक नवराज सुबेदी ने शनिवार को एक बयान जारी कर दावा किया कि "यह अप्रिय घटना पुलिस दमन के कारण हुई."

नवराज सुबेदी ने कहा कि उन्हें घर में नज़रबंद कर लिया गया है.

पुलिस को दुर्गा प्रसाई की तलाश

बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार, नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि अनुमान है कि राजशाही समर्थक प्रदर्शन में 10,000 से 12,000 लोग इकट्ठा हुए थे.

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव छबी रिजाल ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि भृकुटिमंडप में इसी दिन आयोजित सोशलिस्ट फ़्रंट के प्रदर्शन में करीब 35,000 लोग इकट्ठा हुए थे.

शुक्रवार को तिनकुने और भृकुटी मंडप में 5,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने तिनकुने में कई घरों में तोड़फोड़ की, एक घर को आग के हवाले कर दिया और आलोकनगर में स्थित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनाइटेड सोशलिस्ट) पार्टी के दफ़्तर में घुसने की कोशिश की.

प्रदर्शनकारियों ने पेरिसदंदा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के कार्यालय में भी घुसने की कोशिश की और कई सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया.

मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिजाल ने कहा, "चूंकि दुर्गा प्रसाई ने आंदोलन की अगुवाई की थी, इसलिए इस घटना के लिए मूल रूप से वही जिम्मेदार हैं. जो भी नुकसान हुआ, उसके लिए आयोजकों को पूरी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."

उन्होंने कहा है कि 'राजशाही समर्थकों ने तिनकुने इलाक़े में कई निजी घरों में तोड़फोड़ की और एक हर्बल प्रॉसेसिंग कारखाने और उसके परिसर में मौजूद गाड़ियों में आग लगा दी.'

उन्होंने कहा, "नेपाल के संविधान में दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार का उन्होंने (राजशाही समर्थक) ग़लत इस्तेमाल किया. ऐसा दिखा कि उनकी मंशा सुरक्षा बलों को मारने की थी. इसके बाद ही हालात बिगड़े."

एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें दुर्गा प्रसाई तेज़ी से कार चलाते हुए बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

इसमें उन्हें प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते भी देखा गया.

इस विरोध प्रदर्शन से एक दिन पहले ही प्रसाई ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह से मुलाक़ात की थी और राजशाही और 'हिंदू राज्य की स्थापना' को अपना 'धर्म' बताया.

राजशाही समर्थकों के कमांडर प्रसाई को तलाश रही है लेकिन वह लापता हैं.

क्यों शुरू हुआ राजशाही बहाली का आंदोलन

राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाल में राजशाही को बहाल किए जाने को लेकर कुछ समय से सरगर्मी तेज़ हुई है.

बीते कुछ दिनों में कई ऐसी रैलियां और प्रदर्शन हुए जिसमें राजशाही को फिर से स्थापित किए जाने की मांग की गई. हाल ही में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सक्रियता भी देखी गई है.

इस महीने 5 मार्च को काठमांडू में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने एक बाइक रैली की थी, जिनमें नेपाल के राष्ट्रध्वज के साथ लोग शामिल हुए.

छह मार्च को पोखरा में ज्ञानेंद्र ने पूर्व राजा वीरेंद्र की मूर्ति का अनावरण किया गया और इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने राजशाही व्यवस्था वाला राष्ट्रगान गाया.

ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद से इस तरह सार्वजनिक रूप से न के बराबर दिखते थे. कुछ ख़ास मौक़ों पर बहुत ही औपचारिक बयान जारी करते थे.

नौ मार्च को वह पोखरा से काठमांडू पहुंचे, जहां हज़ारों लोगों की भीड़ उनके स्वागत में इकट्ठा हुई थी.

इसी भीड़ में एक व्यक्ति, ज्ञानेंद्र की तस्वीर के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर खड़ा था.

सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य विष्णु रिजाल ने ज्ञानेंद्र पर 'राजा बनने के लिए विदेशियों की दलाली करने' के आरोप लगाए.

कहा जा रहा है कि नेपाल में लोग सरकार से काफ़ी निराश हैं और इसी से राजतंत्र के समर्थकों को मौक़ा मिला है.

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर भी कुछ दिनों से हलचल दिख रही है. मार्च 2023 में नेपाल के जनकपुर में रामनवमी के दिन शोभा यात्रा के दौरान हंगामा होने के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया था.

असल में यहां जानकी मंदिर के पास एक मस्जिद भी है जहां शोभा यात्रा में शामिल लोगों ने हंगामा किया था. नेपाल में ऐसा पहली बार हुआ था. प्रशासन का कहना था कि इस शोभा यात्रा को विश्व हिंदू परिषद ने आयोजित किया था.

बीबीसी संवाददाता रजनीश कुमार की मार्च 2023 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार सीके लाल का कहना है कि नेपाल के मधेस इलाक़े में आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति को 2014 के बाद ज़्यादा बल मिला है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, जनकपुर संभाग में हिंदू स्वयंसेवक संघ के कार्यवाह रंजीत साह ने दावा किया था कि वह 'नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र' बनाना चाहते हैं.

नेपाल के तराई इलाके में योगी आदित्यनाथ का भी प्रभाव है क्योंकि उनका चुनावी क्षेत्र गोरखपुर, नेपाल की सीमा के क़रीब पड़ता है.

साल 2018 में योगी आदित्यनाथ जनकपुर बारात लेकर भी पहुँचे थे.

पिछले कुछ सालों से बीजेपी और आरएसएस के नेताओं का काठमांडू का काफ़ी दौरा हुआ है.

मार्च 2023 में बीजेपी के विदेश मामलों के प्रमुख विजय चौथाईवाले ने काठमांडू और नेपाल के सुदूर इलाक़े का दौरा किया था. काठमांडू में उन्होंने शीर्ष नेताओं से मुलाक़ात की थी.

बीजेपी विदेशों में एक कार्यक्रम चला रही है 'बीजेपी को जानो' और 2022 में ऐसे ही एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने हिस्सा लिया था.

नेपाल में माओवादियों के साथ दस वर्षों के संघर्ष में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी.

साल 2007 में 240 साल पुरानी राजशाही को ख़त्म करने और लोकतंत्र को अपनाने पर राजनीतिक दलों में सहमति बनी थी.

हालांकि गृहयुद्ध ख़त्म होने के बाद संविधान बनाने की प्रक्रिया आठ साल तक खिंच गई और इसके प्रस्तावों को लेकर लंबा गतिरोध चला.

इस दौरान संविधान के प्रस्तावों के ख़िलाफ़ भारी विरोध प्रदर्शनों में 40 से अधिक लोग लोग मारे गए. यहां तक कि 20 सितंबर 2015 को जब नया सेक्युलर संविधान लागू हुआ तो काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन हुए थे और इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

आख़िरकार साल 2015 में नया संविधान लागू हुआ और इसके साथ ही नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना.

लेकिन नेपाल के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने के बाद से नेपाली कांग्रेस के कुछ नेता हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए अभियान चला रहे हैं.

पिछले साल नेपाली कांग्रेस की महासमिति की बैठक से पहले नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की मांग के मुद्दे ने और ज़ोर पकड़ा था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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