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निमिषा प्रिया के पति बोले - 'मैंने अपनी बेटी से कहा कि उसकी मां जल्द लौट आएगी'
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
युद्धग्रस्त देश यमन में मौत की सज़ा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जाएगी. निमिषा को एक स्थानीय व्यक्ति और उनके पूर्व बिज़नेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
साल 2017 में महदी का शव पानी की टंकी से बरामद किया गया था.
यमन में इस्लामी शरिया क़ानून है इसलिए निमिषा प्रिया को बचाने का एक रास्ता यही था कि अगर महदी परिवार ब्लड मनी के बदले निमिषा को माफ़ करता है तो वो फांसी की सज़ा से बच सकती हैं.
निमिषा और उनके परिवार की यही एकमात्र उम्मीद थी. हालांकि निमिषा के परिवार का कहना है कि फांसी की तारीख़ 16 जुलाई मुकर्रर कर दी गई है.
बीबीसी ने केरल के पलक्कड़ में निमिषा के पति और निमिषा को जानने वालों से बात की है और जानने की कोशिश की है कि वो इस मुद्दे को किस तरह से देखते हैं.
निमिषा के गांव के कई लोग इस बात से हैरान हैं कि वो किसी का क़त्ल कर सकती हैं.
पलक्कड़ के पी सतीशन कहते हैं, "हमारे पूरे गांव में इस बात पर कोई यक़ीन करने को तैयार नहीं है. हमें हैरानी हो रही है कि निमिषा ऐसा कर सकती है."
पी सतीशन बताते हैं कि शादी होने के बाद निमिषा अपने पति के साथ यमन गई थी, फिर उनकी बेटी का जन्म हुआ.
वो बताते हैं, "जब बच्ची थोड़ी बड़ी हुई तो टॉमी अपनी बच्ची के साथ वापस आ गए."
निमिषा का गांव कोलेंगोड ग्राम पंचायत के अधीन आता है. एन शनमुगम इस ग्राम पंचायत के सदस्य हैं.
वो कहते हैं, "वो बहुत शांत स्वभाव की थी. वो अपने काम और पढ़ाई से ही मतलब रखती थी. उसने खेत में भी काम किया था. वो ट्रैक्टर चलाती थी. उसने लैब टेक्नीशियन का कोर्स पूरा कर के शादी की थी और फिर विदेश चली गई."
निमिषा के बचाव में दलील
गांव वालों के मुताबिक़ निमिषा और उनके पति टॉमी थॉमस ने यमन में एक क्लिनिक खोलने का फैसला लिया था, जिसमें यमनी शख्स तलाल अब्दो महदी भी पार्टनर बने थे.
गांववाले बताते हैं कि तलाल अब्दो महदी कुछ दिनों के लिए निमिषा के गांव भी आए थे.
एन शनमुगम बताते हैं, "वो यमनी शख्स यहां आया और कुछ हफ्तों के लिए ठहरा. उस वक़्त ये लोग दोस्तों की तरह रहे. इसके बाद वो दोस्तों की तरह ही वापस भी लौटे. बाद में ख़बरों से पता चला कि उसकी हत्या हो गई है."
केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा प्रिया साल 2008 में एक नर्स के रूप में काम करने के लिए यमन गई थीं.
वहां कई अस्पतालों में काम करने के बाद वह साल 2011 में केरल वापस आईं और टॉमी थॉमस से उनकी शादी हुई. दोनों की एक बेटी है, जो इस समय केरल में रहती है.
साल 2015 में निमिषा ने यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर एक मेडिकल क्लीनिक की शुरुआत की थी.
साल 2017 में महदी का शव एक वॉटर टैंक में पाया गया.
इसके एक महीने बाद निमिषा को यमन-सऊदी अरब की सीमा से गिरफ़्तार किया गया.
निमिषा पर आरोप लगे कि उन्होंने नींद की दवा की अधिक डोज़ देकर महदी की हत्या की और उनके शव को छिपाने की कोशिश की.
निमिषा के वकील ने दलील दी कि महदी ने निमिषा का शारीरिक उत्पीड़न किया था. उन्होंने उनसे सारी रकम छीन ली थी, उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया था और बंदूक से उन्हें धमकाया था.
निमिषा ने अपने बचाव में ये कहा है कि उनकी पार्टनशिप में मतभेद शुरू हो गया जिसके बाद वो भारत वापस आना चाहती थीं, लेकिन महदी उनका पासपोर्ट वापस नहीं कर रहे थे.
निमिषा के लिए माफ़ी की मांग
गांव के लोग ये ख़बर पाकर और ज़्यादा हैरान हुए कि कुछ ही दिनों में निमिषा को फांसी दे दी जाएगी. वो मानते हैं कि निमिषा प्रिया को माफ़ देना चाहिए.
एन शनमुगम कहते हैं, "कोई भी किसी की जान नहीं लेना चाहता. इसलिए हमारी ये इच्छा है कि निमिषा प्रिया को मौत की सज़ा नहीं देनी चाहिए."
निमिषा के गांव की विनीता टी कहती हैं, "हम सभी का मानना है कि उसे मौत की सज़ा नहीं होनी चाहिए. हम जितना जानते हैं वो ऐसी लड़की नहीं थी. हमें नहीं पता कि वहां जाने के बाद उसे क्या हुआ?"
"मैं निमिषा और प्रेमा को जान पहचान वाले के तौर पर ही जानती थी वरना तो हम एक गांव के ही हैं. हम मानते हैं कि निमिषा प्रिया को मौत की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए."
निमिषा को बचाने के लिए अभियान
निमिषा के पति टॉमी थॉमस 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल काउंसिल' के साथ काम कर रहे हैं और नेताओं से ये अपील कर रहे हैं कि वो निमिषा को बचा लें.
वो लगातार निमिषा की मां प्रेमा कुमारी के साथ संपर्क में हैं जो अपने वकील सैमुएल जेरोम के साथ यमन में ही हैं.
टॉमी थॉमस कहते हैं, "हमारी बच्ची हमेशा अपनी मां को देखना चाहती है. वो उदास और चिंतित है. मैं हमेशा उसे कहता हूं कि उसकी मां जल्द ही लौट आएगी."
इससे पहले पिछले सप्ताह ही बीबीसी तमिल ने निमिषा की मां प्रेमा कुमारी और समाजिक सैमुअल जेरोम से एक वीडियो इंटरव्यू के ज़रिए बात की थी.
प्रेमा कुमारी ने बताया कि निमिषा ने जेल प्रशासन के ज़रिए एक संदेश भेजा था.
उन्होंने बताया, "उसने संदेश भेजा था लेकिन ताज़ा फ़ैसले के बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया था. उसने सिर्फ़ हालचाल पूछा था. वो मुझे चिंता में नहीं डालना चाहती थी इसलिए उसने कुछ नहीं बताया. मुझे सैमुअल जेरोम से ही पता चला."
पिछले साल यमन गईं प्रेमा कुमारी अब तक जेल में अपनी बेटी से दो बार मिल चुकी हैं.
प्रेमा कुमारी ने कहा, "मैं निमिषा से 12 साल बाद मिली थी. 23 अप्रैल को दूतावास के अधिकारी और मैं उससे मिलने गए थे. मुझे डर था कि शायद हमें मिलने की अनुमति न मिले."
"वो दो अन्य लोगों के साथ आई, सभी ने एक जैसे कपड़े पहने हुए थे. वो दौड़कर आई और गले लगकर रोने लगी. वहां मौजूद लोगों ने हमें चुप रहने को कहा. मैं 12 साल में पहली बार उससे मिल रही थी. मर भी जाऊं तब भी वो पल नहीं भूलने वाली. निमिषा ने मेरे सामने ऐसे दिखाया जैसे वो ख़ुश है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित