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निमिषा प्रिया को बचाने के लिए महीनों से यमन में संघर्ष कर रहीं उनकी माँ ने क्या बताया
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
निमिषा प्रिया की मां प्रेमा कुमारी ये बताते हुए भावुक हो जाती हैं कि उनकी बेटी यमन की जेल में बंद हैं. उन्होंने बताया कि बेटी ने जेल में पहली मुलाक़ात के दौरान उनकी कमज़ोर सेहत पर चिंता ज़ाहिर की थी.
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने अपने बिज़नेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सज़ा सुनाई है. तलाल अब्दो महदी यमन के नागरिक थे.
निमिषा की मां प्रेमा कुमारी भारत के दक्षिणी राज्य केरल में लोगों के घरों में काम करती हैं, पिछले आठ महीनों से वह यमन की राजधानी सना में रह रही हैं जो कि अभी यमन के विद्रोही समूह हूती के नियंत्रण में है.
प्रेमा कुमारी ने बीबीसी हिंदी को बताया है कि जब से वह यमन की राजधानी सना पहुंची हैं तब से लेकर अब तक उन्हें दो बार अपनी बेटी से मिलने का मौक़ा मिला है.
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निमिषा की मां ने और क्या बताया
उन्होंने बताया कि निमिषा ने उन्हें ज़्यादा चिंता नहीं करने की सलाह दी और वो कई बार अपनी बेटी के बारे में पूछ रही थी.
प्रेमा कुमारी ने कहा कि "निमिषा ने मुझे बताया कि क्या हुआ था. उसने कहा कि मैं कमज़ोर हो गई हूं और उसने मुझसे धैर्य रखने को कहा और कहा कि भगवान उसकी रक्षा करेंगे. उसने मुझसे निराश न होने के लिए कहा."
प्रेमा कुमारी ने अप्रैल 2024 में बीबीसी को बताया था कि निमिषा प्रिया की रिहाई के बदले सज़ा काटने का ऑफर देने के लिए वो वहां गई थीं.
उन्होंने बताया कि निमिषा से दूसरी मुलाक़ात के लिए मदर टेरेसा की संस्था सिस्टर्स ऑफ द पूअर्स की दो बहनें उनके साथ गई थीं और दूसरी मुलाक़ात में उन्होंने निमिषा की रिहाई के लिए प्रार्थनाएं कीं.
प्रेमा कुमारी ने ये भी बताया कि दूसरी मुलाक़ात में भी निमिषा ने उनकी सेहत पर चिंता ज़ाहिर की.
यमन में निमिषा की रिहाई के लिए मध्यस्थता की कोशिशों की अगुआई करने वाले सैमुएल जेरोम ने बीबीसी हिंदी को बताया कि दोनों मां और बेटी के बीच की पहली मुलाक़ात काफ़ी भावुक थी.
सैमुएल जेरोम ने कहा, "महिला जेल में निमिषा नर्स के तौर पर काम कर रही हैं. उनके पास मोबाइल फोन है और जेल में उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है."
उन्होंने आगे कहा, "निमिषा से पहली मुलाक़ात के बाद से ही अम्मा (प्रेमा कुमारी) अपने आप में ही रहती हैं. मुझसे कोई भी बात साझा नहीं करती हैं."
निमिषा की मां प्रेमा कुमारी यमन में सैमुएल के घर पर रहती हैं. सैमुएल उन्हें अम्मा बुलाते हैं.
सैमुअल जेरोम यमन में एक विमानन सलाहकार और समाजसेवी हैं और वही वो शख्स हैं जो निमिषा प्रिया के मामले को भारत के सामने सबसे पहले लेकर आए.
निमिषा प्रिया कौन हैं?
34 वर्षीय निमिषा प्रिया को साल 2017 में एक स्थानीय व्यक्ति और उनके पूर्व बिज़नेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई है. निमिषा पर महदी को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा की ज़्यादा ख़ुराक देने और कथित तौर पर महदी के शरीर के टुकड़े करके पानी की टंकी में फेंकने का आरोप हैं.
निमिषा 19 साल की थीं, जब वह पहली बार यमन में एक सरकारी अस्पताल में नर्स के तौर पर काम करने गई थीं.
अभी वह यमन की राजधानी सना की केंद्रीय जेल में बंद हैं. पिछले हफ्ते यमन के राष्ट्रपति रशद मुहम्मद अल-अलीमी ने भी निमिषा को सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल से मिली फांसी की सज़ा को मंज़ूरी दे दी.
काउंसिल के फैसले के तुरंत बाद, उनके परिजनों और समर्थकों ने 'दिया' या ब्लड मनी जुटानी शुरू कर दी. यमन में शरिया क़ानून के तहत शासन चलता है जिसके मुताबिक़ पीड़ित के परिवार से माफ़ी मांगने के लिए उन्हें ब्लड मनी दी जाती है.
यमन के क़ानूनों के मुताबिक, निमिषा का परिवार पीड़ित के परिवार से सीधे संपर्क नहीं कर सकता है. उनसे संपर्क करने के लिए उन्हें वार्ताकारों को नियुक्त करना होगा. भारत सरकार ने पीड़ित के परिवार से बातचीत करने के लिए वकीलों की व्यवस्था की है.
पीड़ित के परिवार और उस जनजाति के सदस्यों की मेज़बानी के लिए और उनके यात्रा ख़र्च के लिए सेव निमिषा इंटरनेशनल एक्शन कमिटी काउंसिल ने दो किस्तों में 20 हज़ार अमेरिकी डॉलर (19 लाख रुपए) भेजे हैं. आख़िरी किस्त पिछले हफ्ते ही भेजी गई थी.
क्यों हो रही है समझौते में देरी?
समझौते में देरी के दो मुख्य कारण हैं. पहला कारण है कि पीड़ित के परिवार को दी जाने वाली रक़म को ले जाने वाले वार्ता दल को तीन अलग-अलग जगहों से होकर जाना होता है तब जाकर अंत में वह रक़म पीड़ित के परिवार तक पहुंचती है.
सबसे पहले यह रक़म यमन की राजधानी सना पहुंचती है जो कि इस समय यमन के विद्रोही समूह हूती के नियंंत्रण में है. उसके बाद अल बयादा प्रांत के सुवादिया में, जहां पर निमिषा के बिज़नेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या हुई थी और अंत में धमार प्रांत के अल-बाइदा में पहुंचती है जहां पर पीड़ित का परिवार रहता है.
सैमुएल जेरोम ने कहा, "बातचीत के लिए नियुक्त किए गए लोगों को इन सब जगहों पर जाना पड़ता है और परिवारों की मेज़बानी करनी होती है. अरब की दुनिया में मेज़बानी का मतलब सिर्फ एक या दो लोगों की मेज़बानी करना नहीं होता है. इसका मतलब है 15 से 20 लोगों की मेज़बानी करना. शानदार खाने के बाद वहां चर्चाएं शुरू होती हैं."
सैमुएल ने इस समझौते में देरी का दूसरा कारण पैसों की दूसरी क़िस्त (20,000 अमेरिकी डॉलर) आने में हुई देरी को बताया.
सैमुएल जेरोम ने कहा कि इस मामले में अब उन्हें छोटी-सी संभावना दिखाई दे रही है.
उन्होंने कहा, "मुद्दा बातचीत को फिर से शुरू करने का नहीं है. फांसी की सहमति के लिए लोक अभियोजक का कार्यालय पीड़ित के परिवार को बुलाएगा ताकि वे फांसी के लिए सहमति दें. अब प्राथमिकता है पीड़ित के परिवार को फांसी के लिए सहमति न देने के लिए मनाना. अगर वह फांसी के लिए हामी नहीं भरेंगे तो इसके बाद उन्हें इस बात के लिए राज़ी करना होगा कि वो निमिषा को माफ़ी दे दें. ये सारा मामला आपस में जुड़ा हुआ है."
सैमुएल जेरोम ने ये भी स्पष्ट किया कि फांसी के लिए राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद एक महीने का समय देने का यमन में कोई प्रावधान नहीं है.
उन्होंने कहा, "अगर पीड़ित का परिवार फांसी के लिए अपनी सहमति दे देता है तो कोई ये नहीं बता सकता कि फांसी कब हो सकती है. परिवार की सहमति के बाद फांसी एक हफ्ते या दो हफ्ते या फिर तुरंत भी दी जा सकती है और अगर पीड़ित के परिवार ने निमिषा को माफ़ कर दिया तो फांसी की सज़ा दी ही नहीं जाएगी. अब स्थिति ऐसी है कि हमारे पास वक्त बहुत कम है."
लेकिन सैमुएल जेरोम को उम्मीद है कि पीड़ित के परिवार के पास सहमति न देने का विकल्प शायद नहीं होगा क्योंकि माफी पर हुई चर्चा के दौरान इस तरह के संकेत दिए गए थे.
माफ़ीनामा को ब्लड मनी के रूप में देखा जाता है जो किसी की हत्या के बाद उसके परिवार को माफ़ी के तौर पर दिया जाता है. व्यावहारिक तौर पर, ब्लड मनी पर चर्चा शेखों की ओर से तब होती है जब आरोपी को माफ़ कर दिया जाता है.
बीते कुछ दिनों में, भारतीय अधिकारियों ने पीड़ित के परिवार के साथ नए सिरे से बातचीत का सिलसिला शुरू किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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