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चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी पर बांग्लादेश के मीडिया में क्या कहा जा रहा है?
बांग्लादेश के इस्कॉन मंदिर से जुड़े रहे चिन्मय दास की गिरफ़्तारी और फिर चटगांव में एक वकील सैफ़ुल इस्लाम की हत्या के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर तनातनी देखने को मिली है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने चिन्मय दास की गिरफ़्तारी के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने को लेकर बयान जारी कर चिंताई जताई थी.
उसके बाद बांग्लादेश ने भारत के बयान को बेबुनियाद करार दिया था और कहा था कि ये दोस्ती की भावना और दो पड़ोसी देशों की समझ के ख़िलाफ़ है.
बांग्लादेश के अख़बारों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा है.
बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार 'डेली स्टार' ने लिखा कि चटगांव कोर्ट परिसर में सहायक लोक अभियोजक (वकील) सैफ़ुल इस्लाम की हत्या बेहद परेशान करने वाली है.
अख़बार लिखता है, ''हाल में मीडिया घरानों पर हमले और कॉलेज स्टूडेंट्स की ओर से हिंसक व्यवधानों पर बढ़े तनाव के बीच ये सोचना गलत नहीं होगा कि कोई भयावह ताकत सुनियोजित अराजकता फैलाकर देश को अस्थिर करने की दिशा की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है.''
लिहाजा ये ज़रूरी है कि हमें सतर्क रहना होगा और कोई भी कदम पूरी ज़िम्मेदारी के साथ उठाना होगा.
अख़बार लिखता है, ''ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि अगर इन वारदातों को ठीक से नियंत्रित न किया जाए तो इसके गहरे सांप्रदायिक नतीजे हो सकते हैं. ये एक ऐसे देश के लिए घातक होगा जिसने कभी-कभार उकसावे की घटनाओं के बावजूद देश में समुदायों के बीच सदभाव कायम करने के लिए काफी जद्दोजहद की है और इस पर उसे गर्व भी है.''
अख़बार लिखता है, ''इस तरह के विवाद में स्वार्थी तत्व भी शामिल हो सकते हैं. जैसे भारतीय मीडिया का एक वर्ग ये झूठी और भड़काऊ बातें प्रकाशित और प्रसारित कर रहा है कि मारे गए वकील सैफु़ल इस्लाम इस्कॉन से जुड़े चिन्मय दास के वकील थे.''
बांग्लादेश में सांप्रदायिक सदभाव बिगड़ने न देने की अपील
एक और प्रमुख अख़बार 'प्रथम आलो' के अंग्रेजी संस्करण ने भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के संयोजक रहे हसनत अब्दुल्ला की उस अपील को प्रमुखता से कवर किया है, जिसमें उन्होंने हाल में चिन्मय दास की गिरफ़्तारी और उसके बाद हुए हिंसक प्रदर्शन जैसी घटनाओं को न दोहराने की अपील की है.
अख़बार के मुताबिक़ हसनत अब्दुल्ला ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में लिखा, ''बांग्लादेश सांप्रदायिक सद्भाव की धरती है. हम इस देश की एकता को नष्ट की इज़ाज़त नहीं दे सकते.''
अख़बार ने लिखा है कि एक अन्य फेसबुक पोस्ट में राष्ट्रीय नागरिक कमेटी के सदस्य और जुलाई शहीद स्मृति फाउंडेशन के महासचिव सरजिस इस्लाम ने लिखा, ''अगर कोई भी व्यक्ति, चरमपंथी समूह या संगठन धर्म का इस्तेमाल करके सांप्रदायिक उन्माद भड़काता है तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.''
अख़बार 'नया दिगंत' ने लिखा है कि वकील सैफुल इस्लाम के जनाजे में लाखों लोग शामिल हुए. जनाज़े के बाद, उनके शव को उनके पैतृक गांव में दफनाया गया.
बाद में गुस्साई भीड़ शहर के टाइगरपास इलाके इकट्टा हुई और फिर भेदभाव-विरोधी छात्र आंदोलन ने एक विशाल रैली निकाली.
इसमें मांग की गई कि सैफुल इस्लाम के हत्यारों को तुरंत गिरफ़्तार कर सज़ा दी जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर छात्र सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने क्या कहा?
'काल कंठो' अख़बार ने राष्ट्रीय एकता के आह्वान शीर्षक से लिखी रिपोर्ट में बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के उस बयान का ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने चिन्मय दास की गिरफ़्तारी और उसके बाद हुई हिंसा को लेकर चिंता जताई है.
अख़बार के मुताबिक़ पार्टी ने कहा है देश की स्थिरता को नष्ट करने वालों का विरोध करने के लिए राष्ट्रीय एकता बनाने की कोशिश होनी चाहिए.
अख़बार लिखता है, ''उन्होंने (तारिक रहमान) अपने एक बयान में बांग्लादेश की सेनाओं से एकजुट रहने का आह्वान किया. बैठक में सनातन धार्मिक संगठन 'इस्कॉन' और बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता रहे चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया गया.''
अख़बार के मुताबिक़ इस बीच, बीएनपी ने विभिन्न दलों और संगठनों की ओर इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग से असहमति जताई है. इसके बजाय पार्टी ने इस्कॉन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया और अंतरिम सरकार को शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ने की सलाह दी.
बीएनपी ने विशेष रूप से विभाजन पैदा करने और नफ़रत फैलाने वाले मीडिया घरानों से सतर्क रहने को कहा है.
समकाल ऑनलाइन ने लिखा है, ''चटगांव अदालत के सहायक लोक अभियोजक सैफुल इस्लाम की "हत्या" ने विरोध प्रदर्शनों को हवा दे दी है. वकील और अलग-अलग पेशों के लोग न्याय की मांग कर रहे हैं. चटगांव में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की. प्रदर्शनकारियों ने 24 घंटे के भीतर अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की.''
कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस्कॉन के समर्थकों पर हिंसा का आरोप लगाते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की.
समकाल के मुताबिक़ चटगांव वकील एसोसिएशन ने भी अदालत के बहिष्कार समेत छह सूत्री मांग जारी की है.
बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता रहे चिन्मय कृष्ण दास के समर्थकों और चटगांव अदालत में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों के बीच झड़प के दौरान वकील पर जानलेवा हमला किया गया था.
अख़बार के मुताबिक़ '' भेदभाव-विरोधी छात्र आंदोलन के नेताओं, हसनत अब्दुल्ला और सरजिस आलम ने इस्कॉन को "उग्रवादी संगठन" करार देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.''
वकील की मौत पर न्याय की मांग को लेकर ढाका (राष्ट्रीय राजधानी) और अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए.
बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीबी) और अन्य वामपंथी समूहों ने भी रैलियां आयोजित कीं और सरकार से सांप्रदायिक सद्भाव बरकरार रखने की कोशिशों को तेज करने की अपील की.
सरकारी अधिकारियों ने किसी भी समूह को गलत तरीके से निशाना बनाए जाने से रोकने के लिए सावधानी बरतने को कहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित