छत्तीसगढ़: बांध के पानी पर नहीं थम रही मनमानी
आलोक प्रकाश पुतुल
रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

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छत्तीसगढ़ में मोबाइल फ़ोन ढूंढने के लिए बांध का पानी बहा देने के मामले में अभी कार्रवाई चल ही रही है, इस बीच राज्य के जशपुर और राजनांदगांव ज़िले में भी बांध का पानी बहा दिए जाने का मामला सामने आया है.
जशपुर ज़िले में मछली पकड़ने के लिए बांध का पानी बहा दिया गया तो राजनांदगांव में रेत तस्करों ने रेत निकालने के लिए पानी बहा दिया.
ये मामले ऐसे समय में सामने आए हैं, जब गरमी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्से में पानी का संकट गहराया हुआ है.
राज्य सरकार का कहना है कि बांध से पानी बहाए जाने के मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
राज्य सरकार के प्रवक्ता और सिंचाई मंत्री रवींद्र चौबे ने बीबीसी से कहा, “पानी का अपव्यय और उसके दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. राजनांदगांव में जो मामला सामने आया है, उसकी जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. जशपुर का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है लेकिन इस मामले में भी जांच करवा कर, दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.”
उन्होंने कहा कि मोबाइल ढ़ूंढ़ने के लिए बांध का पानी बहाने के मामले में ज़िम्मेवार अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उन पर जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा इस मामले में तीन लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज़ की गई है.
मोबाइल खोने की कहानी जो दुनिया भर में छाई

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ग़ौरतलब है कि पिछले महीने की 21 तारीख़ को कांकेर ज़िले के पखांजूर में पदस्थापित फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने परलकोट जलाशय गये थे. जहां बांध में उनका महंगा मोबाइल फ़ोन गिर गया.
राजेश विश्वास ने आसपास के इलाकों के गोताखोरों को मोबाइल ढूंढ़ने के काम में लगाया लेकिन मोबाइल नहीं मिल पाया.
इसके बाद राजेश विश्वास ने सिंचाई विभाग के अफ़सरों से कथित मौखिक अनुमति ले कर बांध में दो मोटर पंप लगा कर, लगातार चार दिनों तक बांध का पानी बाहर बहाया. चौथे दिन उन्हें अपना मोबाइल मिल गया. हालांकि फ़ोन पानी में लगातार डूबे रहने के कारण बंद हो चुका था.
सिंचाई विभाग के अफ़सरों का दावा है कि 22 से 26 मई तक बांध का कम से कम 41 लाख लीटर पानी मोटर पंप से बहा दिया गया.
बांध से पानी बहाए जाने की ख़बर सोशल मीडिया पर फ़ैली तो मामले की जांच शुरू हुई. इसके बाद फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास को निलंबित कर दिया गया. सिंचाई विभाग ने फूड इंस्पेक्टर को बिना अनुमति 4104 घन मीटर पानी के बदले प्रति घन मीटर 10.50 रुपये की दर से 43,092 रुपये और पानी की बर्बादी के लिए 10 हज़ार रुपये का जुर्माना भी जमा करने का निर्देश दिया.
बांध से पानी निकालने की कथित मौखिक अनुमति देने वाले सिंचाई विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरएल धीवर को भी बुधवार को निलंबित कर दिया गया.
अब जा कर कांकेर ज़िले की पुलिस ने फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास, सिंचाई विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरएल धीवर और सहायक अभियंता सीएल ध्रुव के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 430 के तहत मामला दर्ज़ किया है. मानव या दूसरे जीव-जंतुओं के लिए या सिंचाई के पानी की आपूर्ति में कमी के लिए ज़िम्मेवार ठहराए जाने पर इस धारा के अंतर्गत 5 साल तक की सज़ा का प्रावधान है.
मछली पकड़ने के लिए बांध का पानी बहा दिया

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मोबाइल फ़ोन के लिए बांध का पानी बहाए जाने के मामले में कार्रवाई चल ही रही थी, इसी बीच जशपुर ज़िले के बादलखोल राष्ट्रीय अभयारण्य में एक स्टॉप डैम का पानी, मछली पकड़ने के नाम पर बहा दिया गया.
गायलूंगा गांव के पास लुम्बालता में वन्यजीवों और सिंचाई के लिए बनाए गए स्टॉप डैम से पानी बहा दिए जाने की ख़बर मंगलवार को सामने आई.
गांव के सोनू जायसवाल कहते हैं, “इस बांध में पानी लबालब भरा रहता है. एक दिन पहले तक तीन सौ मीटर की दूरी तक लाखों लीटर पानी भरा हुआ था. लेकिन अगली सुबह जब गांव के लोग बांध के पास पहुंचे तो देखा की बांध का गेट खुला हुआ है. हमें पता चला कि कुछ लोगों ने मछली पकड़ने के लिए बांध का पानी बहा दिया.”
जशपुर के पत्रकार विकास पांडेय का कहना है कि कुछ समय पहले जशपुर शहर के बांकी नदी पर बनाया गया बांध भी शरारती तत्वों ने खोल दिया था. लेकिन बादलखोल अभयारण्य के भीतर बांध से पानी बहाए जाने को वे गंभीर स्थिति मान रहे हैं.
उन का कहना है कि जशपुर जंगली हाथियों का इलाका है और बड़ी संख्या में हाथी समेत अन्य वन्यप्राणी पानी के लिए इस बांध पर निर्भर रहते हैं.
विकास पांडेय ने बीबीसी से कहा, “आसपास के गांवों में कटहल के पेड़ बहुतायत हैं और ग्रामीणों के लिए यह आजीविका का साधन है. यह कटहल के पकने का समय है. पानी की तलाश में गांव तक पहुंचने वाले हाथी कटहल को भी बर्बाद करेंगे और जानमाल को भी नुकसान पहुंचाएंगे. दूसरे वन्यजीव भी पानी की तलाश में गांव का रुख करेंगे. ऐसे में मनुष्य-वन्यजीव संघर्ष के मामले बढ़ सकते हैं.”
वन विभाग के एसडीओ विजय भूषण केरकेट्टा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मछली मारने के लिए स्टॉप डैम का पानी बहाए जाने के बाद, फिर से स्टॉप डैम की मरम्मत का काम किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मछली पकड़ने के लिए बांध का पानी बहाया है, उनके ख़िलाफ़ जांच कर के भारतीय वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

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रेत निकालने के लिए खोल दिए बांध के गेट
जशपुर की घटना के बाद बुधवार को राजनांदगांव ज़िले के मोहरा नदी के बांध से पानी बहाने की ख़बर सामने आई.
सरकारी अधिकारियों के अनुसार मंगलवार की रात, रेत तस्करों ने राजनांदगांव की मोहरा नदी के एनीकेट के पांच गेट खोल दिए, जिससे लाखों लीटर पानी बह गया.
इसी मोहरा नदी से राजनांदगांव शहर में पानी की आपूर्ति होती रही है और पूरा राजनांदगांव ज़िला मुख्यालय इन दिनों गहरे जलसंकट से जूझ रहा है.
आरंभिक तौर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार देर रात रेत की तस्करी करने वालों ने नदी का पानी बहा दिया, ताकि उन्हें रेत निकालने और रखने के लिए और अधिक जगह मिल सके. एनिकेट से कम-से कम सात से दस घंटे तक पानी लगातार बहता रहा.
सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता जीडी रामटेके के अनुसार, इस मामले में सिंचाई विभाग ने बसंतपुर थाने में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज़ कराई है और मामले की जांच की जा रही है.
छत्तीसगढ़ में नदी घाटी मोर्चा के संयोजक गौतम बंदोपाध्याय का कहना है कि सरकार की नीतियों के कारण इस तरह की घटनाएं पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी हैं. प्राकृतिक संपदा के नुकसान की भरपाई, महज मुआवजे से करने की प्रवृत्ति के कारण ऐसी घटनाओं पर रोक भी नहीं लगाया जा सकता.
गौतम बंदोपाध्याय कहते हैं, “गवर्नेंस की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं. कोई प्रदूषण फ़ैलाता है और उस पर जुर्माना लगा कर सरकार मान लेती है कि प्रदूषण की क्षतिपूर्ति हो गई. इसे बदलने की ज़रूरत है. व्यक्तिगत या सामुदायिक लाभ के लिए लोक संपदा को नुकसान पहुंचाने पर रोक की कोई नीति हमारे पास नहीं है, जिसका परिणाम हम भुगत रहे हैं.”
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