हल्दी के कई फ़ायदे बताए जाते हैं, लेकिन क्या इससे कोई नुक़सान भी है

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इमेज कैप्शन, भारत में सैंकड़ों साल से खाने में हल्दी का इस्तेमाल होता रहा है
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत समेत लगभग सभी दक्षिण एशियाई देशों की रसोई में हल्दी का इस्तेमाल होता है और अक्सर इस तरह के दावे किए जाते हैं कि हल्दी खाने के कई फ़ायदे हैं.

आपको इंटरनेट से लेकर अख़बार और अलग-अलग पत्रिकाओं में हज़ारों ऐसे लेख मिल जाएंगे, जिनमें हल्दी को सीने में जलन, अपच और डाइबिटीज़, डिप्रेशन, अलज़ाइमर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए फायदेमंद बताया जाता है.

यहां तक कि कुछ लेखों में बताया जाता है कि हल्दी से कैंसर का भी इलाज संभव हो सकता है.

हल्दी न केवल खाने में इस्तेमाल की जाती है बल्कि इसे त्वचा के लिए भी इसे काफ़ी फ़ायदेमंद बताया जाता है.

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हल्दी पर हो चुके हैं कई रिसर्च

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इमेज कैप्शन, करक्यूमिन नाम के एक केमिकल के कारण हल्दी का रंग पीला होता है

हल्दी पर सैकड़ों अध्ययन हो चुके हैं. माना जाता है कि इसमें मौजूद एक यौगिक इसके औषधीय गुणों के लिए ज़िम्मेदार है. यह है- करक्यूमिन.

करक्यूमिन के कारण ही हल्दी का रंग पीला होता है. हल्दी को आम तौर पर एक चमकीला पीला मसाला माना जाता है.

यह अदरक के परिवार का मसाला होता है. इसकी खेती दुनियाभर के कई गर्म इलाक़ों में की जाती है.

लंबे समय से हल्दी का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के साथ ही सेहत से जुड़े फ़ायदों के लिए किया जा रहा है.

हल्दी का उपयोग सैकड़ों साल से भारत और चीन जैसे कई देशों में त्वचा रोग, श्वास संबंधी समस्याओं, जोड़ों के दर्द और पाचन संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है.

भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के मुताबिक़ हल्दी के सेवन से कई तरह के फ़ायदे हैं और मंत्रालय ने इसकी एक लंबी सूची भी दी है.

चूहों पर हुए प्रयोग में पाया गया था कि करक्यूमिन की काफ़ी अधिक मात्रा उनमें कई तरह के कैंसर को बढ़ने से रोकने में सफल रही.

हल्दी के फायदे

चूहों पर ही किए गए अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन से सिरोसिस यानी लीवर की बीमारी को ठीक किया जा सकता है.

ब्रितानी मेडिकल जर्नल 'गट' में यह अध्ययन प्रकाशित भी किया गया है.

ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक अपने अध्ययन में यह पता लगाना चाहते थे कि करक्यूमिन लीवर की बीमारियों को कुछ समय के लिए टाल सकता है या नहीं. इन स्थितियों में प्राइमरी स्क्लेरोसिंग और प्राइमरी बिलियरी सिरोसिस प्रमुख हैं.

इन दोनों स्थितियों में लीवर को कई तरह का नुक़सान पहुँच सकता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इससे घातक लीवर सिरोसिस तक हो सकता है.

इस अध्ययन के प्रमुख ऑस्ट्रिया के ग्राज़ में मौजूद चिकित्सा विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी और हेपोटोलॉजी (लीवर का अध्ययन) के माइकल टर्नर थे.

इसके पहले हुए अध्ययनों में कहा गया था कि हल्दी अपने एंटी-इनफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण कुछ रोगों से आसानी से लड़ सकता है.

हल्दी से जुड़े फ़ायदे

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इमेज कैप्शन, हल्दी पर कई रिसर्च हो चुके हैं, जिसमें इसके फायदे बताए गए हैं

लेकिन हल्दी में दो-तीन फ़ीसदी ही करक्यूमिन होता है और जब हम इसे खाते हैं तो उतनी भी मात्रा में ये हमारे शरीर में अवशोषित नहीं होती.

हालांकि लिखित अध्ययनों में बहुत कम जगह ये बताया गया है भोजन में हल्दी की सामान्य मात्रा कितनी होनी चाहिए.

बेंगलुरु की डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट आत्रेय निहारचंद्रा कहती हैं, "हल्दी पर कई तरह के रिसर्च किए गए हैं. किसी भी स्टेज के कैंसर पेशेंट को हम एनिमल प्रोडक्ट्स या डेयरी प्रोडक्ट्स नहीं देते हैं. उन्हें सब्ज़ियां या फल देते हैं. ऐसे पेशेंट के लिए हल्दी जर्म्स को मारने और पाचन क्रिया को ठीक रखने में मददगार है."

उनका कहना है, "भारतीय खाने में आम तौर पर हल्दी मिलाई जाती है क्योंकि यह पाचन में मदद करती है. हल्दी प्रदूषण की वजह से शरीर पर होने वाले असर से लड़ने में मदद करती है. दुनिया के कई देशों में हल्दी रोज़ाना के भोजन में नहीं मिलाया जाता है, तो वो इसके बदले हल्दी के टैबलेट लेते हैं.

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इमेज कैप्शन, भारत में हल्दी का इस्तेमाल शादी की रस्म का भी हिस्सा होता है (फ़ाइल फ़ोटो)

डॉक्टर आत्रेय निहारचंद्रा बताती हैं, "आमतौर पर एक टी-स्पून हल्दी या आठ ग्राम तक हल्दी रोज़ाना लेना सुरक्षित होता है."

वो समझाती हैं, "अगर इसे और सूक्ष्मता से देखें तो शरीर के एक किलोग्राम वज़न के लिए 1.4 मिलीग्राम हल्दी का रोज़ाना इस्तेमाल करना चाहिए. यानी अगर किसी का वज़न 60 किलोग्राम है तो वह 8.4 ग्राम के क़रीब हल्दी का सेवन कर सकता है."

भारत में शादियों में भी इस तरह की रस्में होती हैं जिनमें हल्दी का इस्तेमाल होता है. हल्दी के गुणों के कारण यह कई ब्यूटी प्रोडक्ट में भी मिलाया जाता है.

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉक्टर सीमा गुलाटी कहती हैं कि हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. जिसकी वजह से ये कई तरह के स्किन इन्फ़ेक्शन में भी फायदेमंद है.

क्या हल्दी खाने का कोई नुक़सान भी है

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इमेज कैप्शन, बहुत ज़्यादा सेवन करने से हल्दी नुक़सान भी पहुंचा सकती है
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आमतौर पर परंपरागत तरीके से उचित मात्रा में हल्दी का सेवन सुरक्षित होता है. हालांकि खाने में हल्दी की अत्यधिक मात्रा या इसके ज़्यादा टैबलेट खाने का बुरा असर भी हो सकता है.

ज़्यादा हल्दी खाने से उबकाई, वोमिटिंग, एसिड रिफ्लक्स (सीने और गले में जलन), पेट ख़राब होना, डायरिया या कब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.

न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉक्टर सीमा गुलाटी कहती हैं, "किसी को व्यक्तिगत तौर पर हल्दी से कोई समस्या हो तो ये अलग बात है, लेकिन हल्दी को अगर तय मात्रा में लिया जाए तो इसका कोई नुक़सान अब तक सामने नहीं आया है."

करक्यूमिन के ख़ून पर असर और एस्पिरिन के साथ इसके इस्तेमाल के संभावित नतीजों पर भी कई शोध हुए हैं.

सीमा गुलाटी का कहना है, "ज़्यादा मात्रा में लेने से कभी-कभी गैस्ट्रिक जैसी समस्या या एस्पिरिन जैसा असर देखा जा सकता है."

डॉक्टर आत्रेय के मुताबिक़ जो लोग एस्पिरिन जैसी दवा लेते हैं उन्हें हल्दी न लेने की सलाह दी जाती है या ब्लड थिनिंग की समस्या वाले लोगों को भी हल्दी न लेने की सलाह दी जाती है.

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