हाशिम सैफ़िद्दीन: हिज़्बुल्लाह के वो नेता, जिन्हें इसराइल ने मारने का दावा किया

    • Author, पैट्रिक जैकसन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

इसराइल की सेना ने दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह के उत्तराधिकारी माने जाने वाले हाशिम सैफ़िद्दीन को मार दिया है.

पिछले महीने हसन नसरल्लाह भी इसराइली हमले में मारे गए थे.

इसराइली सेना (आईडीएफ) के मुताबिक़ सैफ़िद्दीन को तीन सप्ताह पहले एक हवाई हमले में मारा गया. आईडीएफ ने कहा है कि हाशिम सैफ़िद्दीन लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरीय इलाके में एक हवाई हमले में मारे गए हैं.

हालांकि हिज़्बुल्लाह ने सैफ़िद्दीन के मारे जाने की पुष्टि नहीं की है. नसरल्लाह को 27 सितंबर को बेरूत में मारा गया था.

हिज़्बुल्लाह के अधिकारियों ने कहा था कि 4 अक्टूबर को बेरूत के एयरपोर्ट के नजदीक हवाई हमले के बाद उनका सैफ़िद्दीन से संपर्क टूट गया था.

जबकि अमेरिकी मीडिया ने इसराइली अधिकारियों के हवाले से कहा था कि सैफ़िद्दीन उनकी बमबारी के निशाने पर हैं.

उस रात भारी बमबारी ने पूरे बेरूत शहर को हिला दिया था. सुबह तक शहर से धुएं के गुबार उठ रहे थे.

इसराइली सेना ने क्या कहा

मंगलवार को आईडीएफ ने एक बयान जारी कर कहा कि सैफ़िद्दीन को अली हुसैन हज़ीमा के साथ मार दिया गया है.

हज़ीमा को हिज़्बुल्लाह के इंटेलिजेंस मुख्यालय का कमांडर बताया गया है. आईडीएफ ने कहा है कि बेरूत में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हमला करके हज़ीमा को मारा गया.

आईडीएफ ने ये भी कहा है कि सैफ़िद्दीन 'वर्षों से इसराइल के ख़िलाफ़ आतंकवादी हमले' करते आए थे. वो हिज़्बुल्लाह में केंद्रीय स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में भी शामिल रहते थे.

आईडीएफ के ट्वीट में कहा गया है कि हाशिम सैफ़िद्दीन हिज़्बुल्लाह की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के प्रमुख थे. जबकि अली हुसैन हज़ीमा हिज़्बुल्लाह के इंटेलिजेंस मुख्यालय के कमांडर थे. इसराइली सेना ने बताया कि इन लोगों को लगभग तीन सप्ताह पहले दाहिया में मारा गया.

हाशिम सैफ़िद्दीन हिज़्बुल्लाह के सबसे बड़े सैन्य-राजनीतिक फोरम शूरा काउंसिव के सदस्य भी थे. हिज़्बुल्ला में नीतिगत फैसले यही काउंसिल लेती है.

आईडीएफ के ट्वीट के मुताबिक़ हाशिम सैफ़िद्दीन हसन नसरल्लाह के कज़िन थे और उनका हिज़्बुल्लाह की ओर लिए जाने वाले फैसले में काफी दखल होता था.

जब नसरल्लाह लेबनान में नहीं थे तब हाशिम ही हिज़्बुल्लाह के सेक्रेट्री जनरल का पद संभाल रहे थे.

हिज़्बुल्लाह एक सैन्य,राजनीतिक और सामाजिक संगठन है और लेबनान में इसका काफी प्रभाव है.

अमेरिका, ब्रिटेन, इसराइल और कुछ अन्य देशों ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है.

सैफ़िद्दीन को भी 2017 में अमेरिका और सऊदी अरब ने ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी’ घोेषित कर दिया था.

कौन थे सैफ़िद्दीन

सैफ़िद्दीन नसरल्लाह के कज़िन यानी रिश्ते के भाई थे. उन्होंने ईरान में धार्मिक शिक्षा ली थी.

उनके बेटे की शादी ईरान के सबसे ताकतवर सैन्य कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की बेटी से हुई थी. 2020 में इराक़ में एक अमेरिकी हमले में सुलेमानी मारे गए थे.

ऐसा माना जाता है कि सैफिद्दीन की उम्र 60 साल के आस पास थी.

इन गर्मियों में बेरूत में दिए भाषण में सैफिद्दीन ने इस बात का जिक्र किया था कि हिज़्बुल्लाह में मौजूदा नेतृत्व के बाद बागडोर कौन संभाल सकता है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी की इस बारे में एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सैफ़िद्दीन ने कहा था,'' हमारे प्रतिरोध की इस लड़ाई में जब कोई नेता शहीद हो जाता है तो दूसरा शख़्स झंडा उठा लेता है और एक निश्चित और मजबूत प्रतिबद्धता के साथ इस सफर को आगे बढ़ाता है.''

नसरल्लाह को मारने के बाद इसराइल ने क्या कहा था

इससे पहले 27 सितंबर को हिज़्बुल्लाह के सर्वोच्च नेता हसन नसरल्लाह को मारने के बाद इसराइल सेना ने ट्वीट कर कहा था, '' हसन नसरल्लाह अब दुनिया को आतंकित नहीं कर पाएंगे.''

हसन नसरल्लाह एक शिया आलिम (धार्मिक विद्वान) थे जो लेबनान में हिज़्बुल्लाह ग्रुप के प्रमुख थे. इस ग्रुप को इस समय लेबनान के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों में गिना जाता है जिसकी अपनी सशस्त्र विंग भी है.

उनके ईरान और अली ख़ामनेई के साथ बहुत निकट के और विशेष संबंध थे.

इस वास्तविकता के बावजूद कि हिज़्बुल्लाह को अमेरिका की ओर से आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया गया है, न तो ईरान के नेताओं और न ही नसरल्लाह ने अपने निकट संबंधों को कभी छिपाया.

हसन नसरल्लाह के जितने उत्साही समर्थक थे उतने ही उनके दुश्मन भी थे.

इसी वजह से वह इसराइल के हाथों मारे जाने के भय से वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे. लेकिन इसी वजह से उनके समर्थक उनसे रूबरू होने से वंचित रहते थे.

हिज़्बुल्लाह के उद्देश्यों में से एक इसराइल की बर्बादी है जो इस समूह को हमास से अधिक शक्तिशाली दुश्मन के तौर पर देखता है.

हिज़्बुल्लाह के पास हथियारों का एक बहुत बड़ा भंडार है जिसमें ऐसी मिसाइलें शामिल हैं जो इसराइली इलाक़ों में दूर तक हमला कर सकती हैं. इसके पास हज़ारों प्रशिक्षित लड़ाके भी हैं.

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कह रखा है कि अगर हिज़्बुल्लाह इस विवाद में दूसरा मोर्चा खोलता है तो उसको 'अकल्पनीय' जवाब दिया जाएगा.

इसराइल ने हमास के बड़े नेताओं को भी मारा

पिछले सप्ताह इसराइल ने हमास के बड़े नेता याह्या सिनवार को मारा था. सिनवार को ही इसराइल के 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड कहा जा रहा था.

इससे पहले जुलाई महीने में उसने हमास के सबसे बड़े इस्माइल हनिया को मार दिया था.

इसके अलावा हमास के सैन्य सैन्य संगठन इज़े-अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड के प्रमुख मोहम्मद दिएफ़ को भी इसराइल ने मार दिया था.

फ़लस्तीनी उन्हें मास्टरमाइंड के रूप में जानते हैं. वहीं इसराइली उन्हें 'द मैन ऑफ डेथ' या 'द फाइटर विद नाइन लाइव्स' के नाम से पुकारते हैं.

मोहम्मद दिएफ़ ने उन सुरंगों को बनाने की योजना बनाई जिससे हमास के लड़ाके ग़ज़ा से इसराइल में दाख़िल हुए. उनका असली नाम मोहम्मद दीब अल-मसरी है, लेकिन उन्हें अबू खालिद और अल दीएफ़ नामों से भी पुकारा जाता था.

मार्च 2024 में इसराइल ने दावा किया था कि अल-क़ासम ब्रिगेड के डिप्टी कमांडर मारवान इस्सा को एक शरणार्थी शिविर के नीचे एक सुरंग पर हवाई हमले में मार डाला.

हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ आक्रामक रुख़

पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमले के एक साल बाद इसराइल ने हमास और हिज़्बुल्लाह, दोनों के ख़िलाफ़ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है.

इसराइल लेबनान से सटे अपने उन सीमाई इलाकों में अपने नागरिकों को वापसी चाहता है जो हिज़्बुल्लाह के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों के बुरी तरह शिकार हुए हैं.

दूसरी ओर लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में किए गए इसराइली हमले में अब तक 2464 लोग मारे गए हैं और 12 हजार लोग घायल हुए हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ पिछले एक साल के दौरान हिज़्बुल्लाह ने इसराइल पर हजारों रॉकेट दागे हैं और ड्रोन से हमले किए हैं. इससे उत्तरी इसराइल और कब्जे वाले गोलन पहाड़ियों में कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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